रायपुर:
छत्तीसगढ़ के कोरसागुडा एवं सरकेगुडा गांव के लोग मुठभेड़ में सात नाबालिग सहित 19 कथित नक्सलियों के मारे जाने के बाद सरकार द्वारा भेजी गई सहायता को आवश्यकता होने के बावजूद स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) द्वारा 28 जून को मुठभेड़ में कथित नक्सलियों एवं इनके समर्थकों के मारे जाने के बाद ग्रामीणों एवं प्रशासन के बीच गहरा अविश्वास पैदा हो गया है।
भोपलापट्टनम के सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) ए. कुरुवंशी ने बताया, "कोरसागुडा एवं सरकेगुडा के ग्रामीणों की हालत जानने के बाद जिला प्रशासन ने शनिवार को आवश्यक सामग्री लेकर एक ट्रक राहत सामग्री भेजी थी, लेकिन ग्रामीणों ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया।"
इस मुठभेड़ में सात नाबालिग एवं एक महिला के मारे जाने के बाद जगह-जगह विरोध हो रहा है। कुरुवंशी के नेतृत्व में मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया गया है।
सरकेगुडा के सरपंच मरकम नारायण ने कहा कि कोरसागुडा एवं सरकेगुडा के ग्रामीण मारे गए 19 लोगों को नक्सली करार दिए जाने से नाराज हैं। उन्होंने कहा, "अधिकारियों द्वारा बार-बार निवेदन करने के बाद भी वे राहत सामग्री नहीं ले रहे और सरकार की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।"
मुठभेड़ के बाद दोनों गांव के अधिकतर पुरुषों ने या तो पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में शरण ली है या फिर अपने रिश्तेदारों के घरों में छिपे हैं।
सुरक्षा बलों एवं नक्सलियों के खौफ का आलम यह है कि 10 दिनों से स्थानीय बाजार नहीं खुले हैं।
दूसरी तरफ, नक्सलियों ने अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। नक्सलियों ने शुक्रवार को जनसुनवाई का आयोजन कर पुलिसकर्मियों के परिजनों को इलाका छोड़ने की चेतावनी दी है।
बीजापुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (नक्सल ऑपरेशंस) अशोक सिंह के अनुसार नक्सलियों की धमकी के मद्देनजर छह पुलिसकर्मियों ने अपने परिवार की सुरक्षा एवं पुनर्वास के लिए गुहार लगाई है।
सिंह ने बताया कि सरकारी प्रावधानों के अनुसार पुलिसकर्मियों के परिवार का उचित पुनर्वास होगा।
बीजापुर के नजदीक कुंदनहार गांव से छह परिवारों के 47 सदस्यों ने नक्सलियों की धमकी के बाद शुक्रवार रात को घर छोड़ दिया था।
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) द्वारा 28 जून को मुठभेड़ में कथित नक्सलियों एवं इनके समर्थकों के मारे जाने के बाद ग्रामीणों एवं प्रशासन के बीच गहरा अविश्वास पैदा हो गया है।
भोपलापट्टनम के सब डिवीजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) ए. कुरुवंशी ने बताया, "कोरसागुडा एवं सरकेगुडा के ग्रामीणों की हालत जानने के बाद जिला प्रशासन ने शनिवार को आवश्यक सामग्री लेकर एक ट्रक राहत सामग्री भेजी थी, लेकिन ग्रामीणों ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया।"
इस मुठभेड़ में सात नाबालिग एवं एक महिला के मारे जाने के बाद जगह-जगह विरोध हो रहा है। कुरुवंशी के नेतृत्व में मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया गया है।
सरकेगुडा के सरपंच मरकम नारायण ने कहा कि कोरसागुडा एवं सरकेगुडा के ग्रामीण मारे गए 19 लोगों को नक्सली करार दिए जाने से नाराज हैं। उन्होंने कहा, "अधिकारियों द्वारा बार-बार निवेदन करने के बाद भी वे राहत सामग्री नहीं ले रहे और सरकार की मंशा पर प्रश्नचिह्न लगा रहे हैं।"
मुठभेड़ के बाद दोनों गांव के अधिकतर पुरुषों ने या तो पड़ोसी राज्य आंध्र प्रदेश में शरण ली है या फिर अपने रिश्तेदारों के घरों में छिपे हैं।
सुरक्षा बलों एवं नक्सलियों के खौफ का आलम यह है कि 10 दिनों से स्थानीय बाजार नहीं खुले हैं।
दूसरी तरफ, नक्सलियों ने अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। नक्सलियों ने शुक्रवार को जनसुनवाई का आयोजन कर पुलिसकर्मियों के परिजनों को इलाका छोड़ने की चेतावनी दी है।
बीजापुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (नक्सल ऑपरेशंस) अशोक सिंह के अनुसार नक्सलियों की धमकी के मद्देनजर छह पुलिसकर्मियों ने अपने परिवार की सुरक्षा एवं पुनर्वास के लिए गुहार लगाई है।
सिंह ने बताया कि सरकारी प्रावधानों के अनुसार पुलिसकर्मियों के परिवार का उचित पुनर्वास होगा।
बीजापुर के नजदीक कुंदनहार गांव से छह परिवारों के 47 सदस्यों ने नक्सलियों की धमकी के बाद शुक्रवार रात को घर छोड़ दिया था।
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