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This Article is From Feb 20, 2022

नेपाल सरकार ने 50 करोड़ डॉलर की अमेरिकी मदद का एमसीसी बिल भारी विरोध के बीच संसद में किया पेश

संसद के बाहर कम्युनिस्ट पार्टी के छोटे गुटों और कई वाम समर्थक युवा संगठनों ने रैलियां की और अमेरिका विरोधी नारे लगाए, पुलिस ने आंसू गैस के गोले दागे और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया

नेपाल सरकार ने 50 करोड़ डॉलर की अमेरिकी मदद का एमसीसी बिल भारी विरोध के बीच संसद में किया पेश
नेपाल की संसद में अमेरिकी मदद का एमसीसी बिल पेश किया गया (प्रतीकात्मक तस्वीर).
काठमांडू:

नेपाल सरकार ने विरोध के बीच रविवार को 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर की विवादास्पद मिलेनियम कॉर्पोरेशन चैलेंज (MCC) परियोजना से जुड़े समझौते को संसद में मंजूरी के लिए पेश किया. अमेरिका की इस परियोजना को लेकर नेपाल में जोरदार विरोध किया जा रहा है और इस मुद्दे को लेकर हिमालयी देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण तेज हो गया है. प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा, सीपीएन-माओवादी सेंटर के चेयरमैन पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड' और सीपीएन-यूनिफाइड सोशलिस्ट के प्रमुख माधव कुमार नेपाल उन नेताओ में शामिल थे, जिन्होंने रविवार की सुबह गठबंधन दलों की संयुक्त बैठक में भाग लिया. यह बैठक देउबा के आधिकारिक आवास बलुआतर में हुई, जिसमें आम सहमति से संसद में समझौते को पेश करने का फैसला लिया गया.

हालांकि, जब सूचना, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ज्ञानेंद्र बहादुर कार्की ने प्रतिनिधि सभा में समझौते को पेश किया, तो सत्तारूढ़ दल के कुछ सदस्यों समेत विपक्षी दलों के सांसदों द्वारा इसका तीव्र विरोध किया गया. अधिकारियों ने कहा कि संसद के बाहर कम्युनिस्ट पार्टी के छोटे गुटों और कई वाम समर्थक युवा संगठनों ने रैलियां की और अमेरिका विरोधी नारे लगाए. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया.

इस बीच कुछ विपक्षी सांसदों द्वारा समझौते के खिलाफ बोलने के बाद अध्यक्ष अग्नि सपकोटा ने सत्र स्थगित कर दिया. सूत्रों ने बताया कि सदन की अगली बैठक 24 फरवरी को होनी है. नेपाल के राजनीतिक दल एमसीसी समझौते के तहत अमेरिकी अनुदान सहायता को स्वीकार करने को लेकर विभाजित हो गए हैं. यह समझौता प्रतिनिधि सभा में विचाराधीन है.

नेपाल के वामपंथी राजनीतिक दल इस समझौते का विरोध करते हुए कह रहे हैं कि यह राष्ट्रीय हित में नहीं है और यह चीन का मुकाबला करने के लिए है. बीजिंग में चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने शुक्रवार को कहा कि चीन नेपाल को मिलने वाली अंतरराष्ट्रीय सहायता देखकर ‘‘खुश'' है, लेकिन यह बिना किसी राजनीतिक बंधन के मिलनी चाहिए.

अमेरिकी दूतावास ने शनिवार को एक बयान में कहा कि 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर का एमसीसी अनुदान अमेरिकी लोगों की ओर से एक उपहार है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच साझेदारी से नेपाल में रोजगार और बुनियादी ढांचे का सृजन होगा जिससे नेपालियों के जीवन में सुधार होगा.

दूतावास ने यह भी बताया कि इस परियोजना का अनुरोध नेपाली सरकार और नेपाली लोगों द्वारा किया गया था और इसे पारदर्शी रूप से गरीबी को कम करने और नेपाल की अर्थव्यवस्था को विकसित करने के लिए तैयार किया गया था.

नेपाल और अमेरिका ने वर्ष 2017 में एमसीसी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. इसका उद्देश्य नेपाल में बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है जिसमें विद्युत पारेषण लाइन और राष्ट्रीय राजमार्गों का सुधार शामिल है.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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