
मुकेश मीणा (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
दिल्ली एसीबी के ज्वाइंट सीपी मुकेश मीणा को दिल्ली हाईकोर्ट ने अवमानना के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार ने हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में मीणा पर कोर्ट की अवमानना करने का आरोप लगाया था, जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी।
कोर्ट में दिल्ली सरकार की दलील
1.1031 हेल्पलाइन से आई हुई 81 शिकायतें भेजी गईं, लेकिन इन्होंने किसी में FIR दर्ज नहीं की।
2. सीएम की एंटी करप्शन हेल्पलाइन 1031 बंद कर दी गई।
3. मीणा ने प्रेस कांफ्रेंस करके गाइडलाइन्स का उल्लंघन्न किया, जो विजिलेंस विभाग की तरफ पहले से जारी है।
4. गाइडलाइन्स के मुताबिक़ प्रिंसिपल सेक्रेटरी से पूछकर ही कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस की जा सकती है।
ज्वाइंट सीपी के पास कोई अधिकार नहीं कि वह अपने किसी आदमी को ACB में लाए। ये अधिकार विजिलेंस डायरेक्टर के पास है, लेकिन मीणा ने अपने आदमी लगा दिए।
5. सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि थानों में CCTV लगे और मीणा ने ACB से CCTV कैमरा हटवा दिए।
6. एसडीएम ने डीडीए के दो कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए पकड़े, लेकिन FIR तो क्या, शिकायत तक रिसीव नहीं की गई।
7. मीणा को आदेश दिया जाए कि वह कानून का पालन करें।
8.अगर एसडीएम भी एक FIR दर्ज नहीं करा पा रहा, तो एक आम आदमी के साथ क्या होता होगा?
9. दिल्ली सरकार ने कारण बताओ नोटिस जारी किया तो मीणा ने कहा किस अधिकार से पूछ रहे हैं?
10. मीणा ने अदालत की अवमानना की है।
मुकेश मीणा की तरफ से एएसजी संजय जैन ने बहस की
1. सरकार अपनी दुश्मनी निकाल रही है मीणा से।
2. ये लोग चाहते हैं कि किसी तरह से मीणा से काम वापस लिया जाए।
3. मीणा को ACB चीफ के तौर पर काम करने से रोका जा रहा है।
4. एसडीएम को ये अधिकार नहीं कि वो इस तरह से किसी को पकड़े।
5. DDA केंद्र सरकार के तहत है, इसलिए ACB इस पर करवाई नहीं कर सकती, ये सीबीआई का काम है।
6. इस केस में जाल बिछकर पकड़ना सीबीआई का काम है, किसी एक्जिक्यूटिव मजिस्ट्रेट का नहीं।
7. मीडिया में आने के लिए ये सब किया जा रहा है।
8. मीणा को परेशान किया जा रहा है।
9. अगर आप वाकई किसी करप्शन केस को पकड़ना चाहते हैं, तो सीबीआई को साथ लेने में क्या दिक्कत थी? दिल्ली सरकार की कोई भी दलील तब देखी जाएगी, जब कोर्ट अधिकार क्षेत्र के मूल सवाल का कोर्ट फैसला करेगी, जिसकी सुनवाई 11 अगस्त को तय है।
10. अगर जल्दी थी तो कोर्ट से पूछकर स्थिति साफ़ करा लेते?
11. ACB के अधिकार क्षेत्र में केंद्रीय कर्मचारी नहीं हैं, न ही केंद्र का नोटिफिफिकेशन रद्द हुआ?
अवमानना का केस तो इन पर होना चाहिए।
सुनवाई के दिलचस्प मोड़
याचिका दिल्ली सरकार की थी यानी पहले अपनी बात सरकार को रखनी थी, लेकिन मीणा के वकील ने पहले अपने दलील पेश कर दी। फिर कोर्ट के समझाने पर सरकार ने अपना पक्ष रखा और मीणा के वकील बैठे।
बाद में मीणा के वकील ने कोर्ट से बहुत देर इस बात पर बहस की कि आप नोटिस नहीं दे सकते इस मामले में। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में बिना नोटिस दिए कैसे काम होगा? मीणा के वकील ने कहा कि हाईकोर्ट का इस मामले में नोटिस ही किस सज़ा से कम नहीं होगा।
दिल्ली सरकार ने पिछले महीने कोर्ट में याचिका दायर कर एंटी करप्शन ब्रांच में मीणा की नियुक्ति को अवैध ठहराया था, लेकिन कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कोई राहत न देते हुए कहा था कि मीणा कानून के मुताबिक़ काम करेंगे।
कोर्ट में दिल्ली सरकार की दलील
1.1031 हेल्पलाइन से आई हुई 81 शिकायतें भेजी गईं, लेकिन इन्होंने किसी में FIR दर्ज नहीं की।
2. सीएम की एंटी करप्शन हेल्पलाइन 1031 बंद कर दी गई।
3. मीणा ने प्रेस कांफ्रेंस करके गाइडलाइन्स का उल्लंघन्न किया, जो विजिलेंस विभाग की तरफ पहले से जारी है।
4. गाइडलाइन्स के मुताबिक़ प्रिंसिपल सेक्रेटरी से पूछकर ही कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस की जा सकती है।
ज्वाइंट सीपी के पास कोई अधिकार नहीं कि वह अपने किसी आदमी को ACB में लाए। ये अधिकार विजिलेंस डायरेक्टर के पास है, लेकिन मीणा ने अपने आदमी लगा दिए।
5. सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि थानों में CCTV लगे और मीणा ने ACB से CCTV कैमरा हटवा दिए।
6. एसडीएम ने डीडीए के दो कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए पकड़े, लेकिन FIR तो क्या, शिकायत तक रिसीव नहीं की गई।
7. मीणा को आदेश दिया जाए कि वह कानून का पालन करें।
8.अगर एसडीएम भी एक FIR दर्ज नहीं करा पा रहा, तो एक आम आदमी के साथ क्या होता होगा?
9. दिल्ली सरकार ने कारण बताओ नोटिस जारी किया तो मीणा ने कहा किस अधिकार से पूछ रहे हैं?
10. मीणा ने अदालत की अवमानना की है।
मुकेश मीणा की तरफ से एएसजी संजय जैन ने बहस की
1. सरकार अपनी दुश्मनी निकाल रही है मीणा से।
2. ये लोग चाहते हैं कि किसी तरह से मीणा से काम वापस लिया जाए।
3. मीणा को ACB चीफ के तौर पर काम करने से रोका जा रहा है।
4. एसडीएम को ये अधिकार नहीं कि वो इस तरह से किसी को पकड़े।
5. DDA केंद्र सरकार के तहत है, इसलिए ACB इस पर करवाई नहीं कर सकती, ये सीबीआई का काम है।
6. इस केस में जाल बिछकर पकड़ना सीबीआई का काम है, किसी एक्जिक्यूटिव मजिस्ट्रेट का नहीं।
7. मीडिया में आने के लिए ये सब किया जा रहा है।
8. मीणा को परेशान किया जा रहा है।
9. अगर आप वाकई किसी करप्शन केस को पकड़ना चाहते हैं, तो सीबीआई को साथ लेने में क्या दिक्कत थी? दिल्ली सरकार की कोई भी दलील तब देखी जाएगी, जब कोर्ट अधिकार क्षेत्र के मूल सवाल का कोर्ट फैसला करेगी, जिसकी सुनवाई 11 अगस्त को तय है।
10. अगर जल्दी थी तो कोर्ट से पूछकर स्थिति साफ़ करा लेते?
11. ACB के अधिकार क्षेत्र में केंद्रीय कर्मचारी नहीं हैं, न ही केंद्र का नोटिफिफिकेशन रद्द हुआ?
अवमानना का केस तो इन पर होना चाहिए।
सुनवाई के दिलचस्प मोड़
याचिका दिल्ली सरकार की थी यानी पहले अपनी बात सरकार को रखनी थी, लेकिन मीणा के वकील ने पहले अपने दलील पेश कर दी। फिर कोर्ट के समझाने पर सरकार ने अपना पक्ष रखा और मीणा के वकील बैठे।
बाद में मीणा के वकील ने कोर्ट से बहुत देर इस बात पर बहस की कि आप नोटिस नहीं दे सकते इस मामले में। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में बिना नोटिस दिए कैसे काम होगा? मीणा के वकील ने कहा कि हाईकोर्ट का इस मामले में नोटिस ही किस सज़ा से कम नहीं होगा।
दिल्ली सरकार ने पिछले महीने कोर्ट में याचिका दायर कर एंटी करप्शन ब्रांच में मीणा की नियुक्ति को अवैध ठहराया था, लेकिन कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कोई राहत न देते हुए कहा था कि मीणा कानून के मुताबिक़ काम करेंगे।
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