गांव पहुंचते ही भावुक हुए राष्ट्रपति कोविंद, झुककर जन्मभूमि को किया नमन, माथे पर लगाई माटी

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, "मैं कहीं भी रहूं, मेरे गांव की मिट्टी की खुशबू और मेरे गांव के निवासियों की यादें सदैव मेरे हृदय में विद्यमान रहती हैं. मेरे लिए परौंख केवल एक गांव नहीं है, यह मेरी मातृभूमि है"

गांव पहुंचते ही भावुक हुए राष्ट्रपति कोविंद, झुककर जन्मभूमि को किया नमन, माथे पर लगाई माटी

पैतृक गांव परौंख पहुंचकर भावुक हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोेविंद

नई दिल्ली:

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) उत्तर प्रदेश के तीन दिवसीय दौरे पर हैं. दौरे के दूसरे दिन रविवार को राष्ट्रपति कोविंद कानपुर देहात स्थित अपने पैतृक गांव परौंख पहुंचे हैं. इस दौरान, एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने लोगों के दिल को छू लिया. दरअसल, गांव परौंख के पास बने हेलिपैड पर लैंड करने के बाद राष्ट्रपति ने  झुककर अपनी जन्मभूमि को नमन किया और जन्मभूमि की मिट्टी को माथे पर लगाया. राष्ट्रपति भवन इस भावुक पल की तस्वीरें साझा की हैं. 

राष्ट्रपति भवन की ओर से किए गए ट्वीट में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, "मैं कहीं भी रहूं, मेरे गांव की मिट्टी की खुशबू और मेरे गांव के निवासियों की यादें सदैव मेरे हृदय में विद्यमान रहती हैं. मेरे लिए परौंख केवल एक गांव नहीं है, यह मेरी मातृभूमि है, जहां से मुझे, आगे बढ़कर, देश-सेवा की सदैव प्रेरणा मिलती रही."

उन्होंने आगे कहा, "मातृभूमि की इसी प्रेरणा ने मुझे हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट से राज्यसभा, राज्यसभा से राजभवन व राजभवन से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा दिया."  

राष्ट्रपति भवन ने ट्वीट किया, "जन्मभूमि से जुड़े ऐसे ही आनंद और गौरव को व्यक्त करने के लिए संस्कृत काव्य में कहा गया है: 'जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी' अर्थात जन्म देने वाली माता और जन्मभूमि का गौरव स्वर्ग से भी बढ़कर होता है."

उन्होंने कहा कि मैंने सपने में भी कभी कल्पना नहीं की थी कि गांव के मेरे जैसे एक सामान्य बालक को देश के सर्वोच्च पद के दायित्व-निर्वहन का सौभाग्य मिलेगा, लेकिन हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था ने यह करके दिखा दिया. 

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