


विविधता में एकता का मनमोहक प्रदर्शन
राजपथ पर संस्कृति और देश के उज्ज्वल भविष्य की झलक भी दिखाई गई। गोवा की झांकी में यहां की जागोर जनजाति और गुजरात की झांकी में गौरव की पहचान गीर के जंगल दिखाए गए। जम्मू-कश्मीर की झांकी में मेरा गांव मेरा जहां यानी स्वच्छ एवं हरित अभियान का प्रचार किया गया।

राजस्थान की झांकी में जयपुर के गौरव हवा महल को दिखाया गया। हवा महल को 1799 में सवाई प्रताप सिंह ने बनवाया था। चंडीगढ़ की झांकी में सपनों के शहर में खुला स्वागत करते दिखाया गया। ओडिशा की झांकी में बंदाण महोत्सव दिखाया गया। बिहार की झांकी में चंपारण सत्याग्रह को दिखाया गया।

कर्नाटक की झांकी में कॉफ़ी की धरती कोडगु को दिखाया गया। तमिलनाडु की झांकी में थोडा जनजाति की झलक दिखाई गई। उत्तराखंड की झांकी में रम्माण उत्सव की झलक दिखी। उत्तर प्रदेश की झांकी में जरदोई कला प्रदर्शित की गई।
वायुसेना के हैरतअंगेज करतब
सबसे अंत में रोमांच से भर देने वाले वायु सेना के अत्याधुनिक विमानों को राजपथ के ऊपर से हैरतअंगेज कारनामों के साथ उड़ान भरते देख कर उन विमानों की ताकत के साथ ही वायुसेना के पायलटों का हुनर और जांबाज़ी का अहसास हुआ। परेड के अंत में इंडिया गेट को जैसे चूमते हुए गुजर जाने का अहसास देने वाले भारतीय वायुसेना के 27 विमानों ने इस बार फ्लाई पास्ट में हिस्सा लिया। फ्लाई पास्ट की अगुवाई एमआई-17 वी5 हेलिकाप्टरों ने अंग्रेजी वाई की शक्ल में उड़ान भरी। इसके दूसरे चरण के रूप में एमआई 35 के तीन हेलिकॉप्टरों ने चक्र शक्ल में और उसके बाद तीन सी.130 सुपर हर्कुलिस विशाल विमानों ने उड़ान भरी। इसके बाद एक सी.17 और दो सुखोई.30 एमकेआई विमानों ने ग्लोब फार्मेशन में उड़ान भरी। लड़ाकू विमानों की बारी आने पर पांच जगुआर विमानों ने तीर की शक्ल में राजपथ के ऊपर से उड़ान भरी और उसके बाद पांच मिग 29 विमानों ने उसी रूप में परवाज की।

मोटरसाइकिल के करतब को लोगों ने खूब सराहा
हर बार की तरह इस बार भी मोटरसाइकलों पर कौशल और जाबांजी दिखाने वाले डेयरडेविल स्टंट को लोगों ने खूब सराहा। राष्ट्रगान के साथ परेड का समापन हुआ। समापन पर राष्ट्रीय ध्वज के तीन रंगों वाले गुब्बारों ने पूरे आसमान को ढक लिया।
राष्ट्रीय राजधानी के आसपास सुरक्षा का कड़ा घेरा
गणतंत्र दिवस के अवसर पर आतंकी हमले की आशंका की खुफिया सूचना के चलते राष्ट्रीय राजधानी में आज जमीन से हवा तक सुरक्षा के अभूतपूर्व प्रबंध किये गए और हजारों जवान चप्पे-चप्पे पर कड़ी नजर बनाए हुए थे। राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा का यह आलम था कि इसकी एक तरह से किलेबंदी कर दी गई थी। हल्की मशीनगनों से लैस कमांडो को सामरिक महत्व के स्थानों पर तैनात किया गया था और राजधानी में दो महत्वपूर्ण स्थानों पर विमान रोधक तोपें लगाई गई थीं। मध्य और नई दिल्ली इलाकों में दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों के करीब 50 हजार जवान तैनात किए गए थे। राजपथ पर सुरक्षा के विशेष प्रबंध के रूप में समारोह स्थल पर वीवीआईपी गलियारे में सुरक्षा के बहुस्तरीय प्रबंध किये गए थे, जिसमें एक घेरा राष्ट्रपति सुरक्षा गार्डों का था, एक एक घेरा एसपीजी अधिकारियों, एनएसजी कमांडो का था और दिल्ली पुलिस सबसे बाहरी सुरक्षा घेरे के तौर पर चौकसी कर रही थी।
(इनपुट्स भाषा से भी)
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