जनता पर महंगाई की जबरदस्त मार, नमक-रोटी खाने को मजबूर ग्रामीण

सोनभद्र के रहने वाले गुलाब गौड़ कहते हैं, 'तेल (रिफाइंड) बहुत महंगा हो गया है. कभी-कभी हम नमक के साथ रोटी भी खा रहे हैं.'

जनता पर महंगाई की जबरदस्त मार, नमक-रोटी खाने को मजबूर ग्रामीण

पिछले कुछ महीनों में खाद्य तेल के दाम काफी बढ़ गए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

खास बातें

  • महंगाई ने बिगाड़ा घर का बजट
  • आसमान छू रहे खाद्य तेल के दाम
  • लॉकडाउन से कारोबार भी प्रभावित
लखनऊ:

कोरोना काल (Coronavirus Pandemic) में महंगाई आसमान छू रही है. पेट्रोल-डीजल के दाम ही नहीं बल्कि खाद्य तेल, दाल, अंडा और अन्य घरेलू सामान की कीमतों में भी काफी इजाफा हुआ है. महंगाई के इस बढ़ते ग्राफ की जबरदस्त मार आम आदमी पर पड़ रही है. खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों ने घर का बजट बिगाड़ दिया है. वहीं इस कोरोना काल में छोटे कारोबार भी प्रभावित हुए हैं. सोनभद्र के ग्रामीण गुलाब गौड़ ने कहा, 'तेल (रिफाइंड) बहुत महंगा हो गया है, तो हम अपने गांव में उपलब्ध इसके विकल्प का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन फिर भी बहुत मुश्किल हो रहा है. प्याज और दालों की कीमतें भी बढ़ी हैं. हम इसे खा ही नहीं रहे हैं. कभी-कभी हम नमक के साथ रोटी भी खा रहे हैं.' 40 वर्षीय गुलाब गौड़ और उनकी पत्नी रुकमणि देवी मजदूरी कर 6000 रुपये महीना कमाते हैं.

गृहणी मनोरमा सिंह विधवा हैं और वह एक कमरे में रहती हैं. उनका बेटा 16 साल का है और वे दोनों गांव में ही रहते हैं. वह 8000 रुपये महीने की नौकरी करती हैं. मनोरमा ने कहा कि रिकॉर्ड महंगाई के इस समय में घर चलाने में काफी मुश्किलें आ रही हैं. पहले वह हर महीने 300 रुपये बचा लेती थीं लेकिन अब बचत संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि अब वह पैसे नहीं बचा सकतीं क्योंकि तेल, चीनी आदि की कीमतें काफी बढ़ गई हैं.

कोरोना काल में दोहरी मार, घर का बिगड़ा बजट, तेल-अंडा-दाल समेत जरूरी सामान हुआ महंगा

उन्होंने कहा कि 2-3 महीने पहले रिफाइंड 110 रुपये था, फिर 120 हुआ, 140 हुआ, 150 हुआ और अब 200 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है. पहले वह नाश्ते में पूरी या पराठा बनाती थीं लेकिन बढ़ती तेल की कीमतों की वजह से उन्होंने इसे बनाना बंद कर दिया है और अब वह रोटी बनाती हैं. तेल का इस्तेमाल अब वह केवल दाल और सब्जी में करती हैं. मनोरमा कहती हैं कि अब वह सिर्फ एक टाइम चाय पीती हैं.

बिहार की राजधानी पटना के रहने वाले 48 वर्षीय टुनटुन साहू लिट्टी-चोखे का स्टॉल लगाते हैं. वह 15 हजार रुपये महीना कमाते हैं. साहू कहते हैं कि महंगाई के चलते उन्होंने अपनी लिट्टी का साइज कम कर दिया है. पटना में पिछले तीन महीनों में खाद्य तेल के दाम 50 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं. वहीं कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में पिछले दो महीनों में 200 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है. साहू ने इसी महीने 4 तारीख को अपना स्टॉल फिर से खोला. पिछले साल उन्होंने लिट्टी-चोखे की प्लेट की कीमत 20 रुपये से बढ़ाकर 25 रुपये कर दी थी.


वह कहते हैं, 'अब हम कम के कम सामग्री के इस्तेमाल की कोशिश करते हैं. हमने लिट्टी का साइज भी छोटा कर दिया है. कीमतें बढ़ी हुई हैं और मुझे सभी कुछ व्यवस्थित करके चलना है. 25 परसेंट सेल भी गिरी है. जब सब कुछ बंद होगा तो बिक्री कहां से होगी.' बहरहाल सभी को उम्मीद है कि जल्द उन्हें महंगाई से मुक्ति मिलेगी और खाने-पीने की चीजों की कीमतें नीचे आएंगी.

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