अगरतल्ला:
उत्तरी त्रिपुरा के एक शरणार्थी शिविर में शनिवार को लगी आग में कम से कम 19 लोगों की जलकर मौत हो गई। मरने वालों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। इस शिविर में 1997 से मिजोरम के रेयांग जनजातीय समुदाय के शरणार्थी रह रहे थे। एक अधिकारी के मुताबिक इस अग्निकांड में 20 से अधिक लोग झुलस गए और 2,500 से अधिक झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। आग दोपहर के वक्त मिजोरम से सटे उत्तरी त्रिपुरा के कंचनपुर अनुमंडल में नैशिंग पारा शरणार्थी शिविर में लगी। यह यहां के छह शरणार्थी शिविरों में से एक है। कंचनपुर के अनुमंडल अधिकारी दिलीप चकमा ने कहा कि अब तक 19 शव निकाले जा चुके हैं। आग अभी भी बुझाई नहीं जा सकी है। आग से बुरी तरह झुलसे कुछ लोगों को अस्पताल ले जाया गया है। चकमा ने कहा कि मलबा को पूरी तरह हटाने के बाद ही मरने वालों की सही संख्या का पता चल पाएगा। उन्होंने मलबे में और भी शव के होने की आशंका जताई। आग को बुझाने की कोशिश जारी है। माना जा रहा है कि जंगल में लगी आग ने शिविर को अपनी चपेट में ले लिया। जिला पुलिस अधीक्षक एल. डारलोंग ने कहा कि रेयांग शरणार्थी ने झूम खेती की रिवाज के मुताबिक जंगल को साफ करने के लिए आग लगाई, जो फैलकर इस शिविर तक पहुंच गई। इन छह शरणार्थी शिविरों में 34,000 रेयांग जनजाति के लोग रह रहे थे। स्थानीय भाषा में इन्हें ब्रू कहा जाता है। मिजोरम में बहुसंख्यक मिजो समुदाय के एक वन अधिकारी की हत्या के बाद छिड़े जातीय संघर्ष के बाद रेयांग जनजातीय समुदाय के लोग भाग कर यहां आए थे।
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