अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में जुटीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

केंद्र सरकार के एसेट्स के मुद्रीकरण के लिए एक नए नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन का ऐलान किया

अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में जुटीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (फाइल फोटो).

नई दिल्ली:

कोरोना महामारी के असर से उबर रही अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में जुटीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने
सोमवार को केंद्र सरकार के एसेट्स के मुद्रीकरण के लिए एक नए नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन का ऐलान किया. इसके तहत भारत सरकार ने अगले चार साल में छह लाख करोड़ रुपये जुटाने का टारगेट तय किया है. कोरोना के असर से जूझ रही अर्थव्यवस्था में नए निवेश के लिए फंड जुटाने की नई कवायद के तहत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नेशनल मॉनेटाइजेशन पाइपलाइन जारी किया. इसके तहत भारत सरकार के खाली पड़े या Under-Utilized सरकारी संपत्ति को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के ज़रिए उनका मुद्रीकरण करके वित्तीय संसाधन जुटाया जाएगा. 

इसके तहत मॉनेटाइजेशन टारगेट 2021-22 के बचे हुए समय में 88,000 करोड़, अगले वित्तीय साल से हर साल 1.5 लाख करोड़ से ज्यादा का टारगेट तय किया गया है. अगले चार साल में यानी 2024-25 तक क़रीब छह-लाख करोड़ जुटाने का टारगेट है. इसका इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर मज़बूत करने पर किया जाएगा. 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि व्यापक उद्देश्य सरकार के पास संपत्ति के स्वामित्व को सौंपना नहीं है... कुछ समय बाद इन संपत्तियों को वापस कर दिया जाएगा.

इस नई कवायद के तहत हर मंत्रालय के लिए सालाना टारगेट तय किए गए हैं. फोकस 12 मंत्रालयों जैसे --  सड़क, ट्रांसपोर्ट और राजमार्ग, रेलवे, पॉवर, सिविल एविएशन, पोर्ट, टेलिकॉम जैसे सेक्टरों पर रहेगा. इस योजना के तहत भारतीय रेल के 400 रेलवे स्टेशन, पैसेंजर ट्रेन, रेलवे स्टेडियम की पहचान की गई है. 25 एयरपोर्ट, नौ बड़े पोर्ट और खेल मंत्रालय के अधीन दो बड़े नेशनल स्टेडियम भी चुने गए हैं.

ऑपरेट, मेंटेन ट्रांसफर, टोल ऑपरेट ट्रांसफर, इन्फ्रास्ट्रक्चर इनवेस्टमेंट ट्रस्ट्स  जैसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के ज़रिए मोनेटाइजेशन किया जाएगा.

रेलवे बोर्ड  के चेयरमैन सुनीत शर्मा ने कहा कि, "भारतीय रेलवे के पास स्टेशन, ट्रेन, स्टेडियम, हिल रेलवे हैं. हमारे पास इन परिसंपत्तियों के लिए एक मोनेटाइजेशन योजना है." 

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सरकार ने अगले चार साल में छह लाख करोड़ फंड्स जुटाने का टारगेट तय किया है. लेकिन ये योजना कितनी सफल होगी ये इस बात पर निर्भर करेगा कि अगर मालिकाना हक़ सरकार के पास रहेगा और सीमित समय के लिए निजी सेक्टर को भागीदारी का मौका दिया जाता है तो वो भागीदारी और निवेश के लिए तैयार होंगे? अलग-अलग सेक्टरों मैं सरकार की मोनेटाइजेशन की शतें क्या होंगी ये भी इस पर भी ये निर्भर करेगा कि ये स्कीम कितनी कामयाब होगी.