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This Article is From Oct 24, 2017

जानें केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने क्यों कहा, 'नया जूता तीन दिन काटता है'

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नोटबंदी और जीएसटी के चलते नौकरियों में कमी की बात को खारिज करते हुए कहा है कि इस बारे में बेवजह हौवा खड़ा किया जा रहा है.

जानें केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने क्यों कहा, 'नया जूता तीन दिन काटता है'
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की फाइल तस्वीर
इंदौर / उज्जैन: केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नोटबंदी और जीएसटी के चलते नौकरियों में कमी की बात को खारिज करते हुए कहा है कि इस बारे में बेवजह हौवा खड़ा किया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि देश में जीएसटी की वजह से करदाताओं की संख्या बढ़ी है और टैक्स प्रणाली आसान हुई है. उन्होंने कहा, 'आप कोई नया जूता लेते हैं, तो वह तीन दिन काटता है और चौथे दिन पैर में ​फिट बैठ जाता है.' विपक्ष के इस आरोप पर कि सरकार नौजवानों को रोजगार देने में विफल रही है, प्रधान ने कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, 'जो लोग तीन पीढ़ी से देश पर शासन कर रहे थे, वे लोग आज नौजवानों के नाम पर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं.' कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा जीएसटी को 'गब्बर सिंह टैक्स' बताए जाने को प्रधान ने 'असभ्य' करार दिया. उन्होंने कहा, राहुल इस तरह के शब्दों के इस्तेमाल के आदी हैं. 2014 के आम चुनावों में जनता ने उन्हें करारी हार का स्वाद चखाया था. लिहाजा मैं उनकी मानसिक हालत समझ सकता हूं.'

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धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि केंद्र सरकार द्विपक्षीय समझौते के तहत भारतीय युवाओं को कृषि, कपड़ा उद्योग, सेवा क्षेत्र और कल-कारखानों में प्रशिक्षण एवं रोजगार के लिए जापान भेजेगी. पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी में लाने की मांग के जोर पकड़ने के बीच उन्होंने कहा कि इन वस्तुओं को नई टैक्स प्रणाली के दायरे में लाने के लिए राज्यों के साथ सहमति बनाने के प्रयास जारी हैं. उन्होंने कहा, 'पेट्रोलियम पदार्थों को जीएसटी के दायरे में लाए जाने के बारे में वित्त मंत्री अरुण जेटली की अगुवाई वाली जीएसटी परिषद राज्यों से राय-मशविरे के बाद फैसला करेगी.'

VIDEO : जीएसटी ने किया बेहाल
गौरतलब है कि फिलहाल पेट्रोलियम पदार्थों के जीएसटी के दायरे में नहीं होने से राज्य सरकारें अलग-अलग दरों से पेट्रोल-डीजल पर वैट और अन्य टैक्स वसूलती हैं. इससे देश में इन ईंधनों के खुदरा दाम में भारी असमानता है.

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