
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल का कोर्ट नंबर 1 शुक्रवार को अधिकारियों को खचाखच भरा रहा। सब लाइन हाजिर दिखे। दरअसल 10 साल से पुरानी डीजल वाली गाड़ियों पर पाबंदी को लेकर हर विभाग को अपना जवाब दाखिल करना था और साथ ही दो दिनों में किया क्या ये भी बताना था?
यानी प्रोग्रेस रिपोर्ट भी। सरकार की तरफ से जिरह कर रहे वकील ने कहा कि वक्त मिलना चाहिए। कम से कम 6 महीने। बहुत सारी इमरजेंसी सर्विसेज में लगी गाड़ियों की उम्र भी पूरी हो चुकी है। सब्जियां भी बाहर से आती हैं। लिहाजा थोड़ी मोहलत की दरकार है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने साफ कहा कि आवेदन दीजिए, अपनी परेशानी का जिक्र भी कर सकते हैं, लेकिन आदेश बरकरार रहेगा। आखिर दिल्ली की जनता क्यों सहे? छोटे-छोटे बच्चे भविष्य हैं...उनको हम क्या देंगे? क्या हमें ये नहीं सोचना चाहिए कि आने वाली पीढ़ी को हम इतनी साफ सुथरी हवा तो दें जिसमें वो सांस ले सकें। 5 साल तक का कोई भी बच्चा आज ऐसा नहीं जो एंटीबायटिक के बिना हो। लिहाजा पर्यावरण और दिल्ली के हित में आदेश में कोई फेरबदल नहीं।
ट्रिब्यूनल ये भी कहा कि विभागों की गंभीरता और उनके द्वारा लिया गया एक्शन सराहनीय है। उधर एनजीटी की तरफ से नियुक्त 6 लोकल कमिश्नर अपना सुझाव देंगे और उसको लेकर राज्यों को अपना जवाब 7 दिन में दाखिल करना होगा।
साथ ही ये 6 लोकल कमिश्नर जब चाहें मौके पर जाकर निगरानी कर सकते हैं कि काम ठीक से चल रहा है या नहीं। जब ये स्पॉट पर जाएंगे तब पुलिस इनको सहयोग देगी। अब अगली सुनवाई 17 अप्रैल को होनी है।
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