गोलाघाट जिले में असम-नगालैंड सीमा पर स्थिति शांतिपूर्ण रही, लेकिन करीब 10 हजार लोग अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेने को मजबूर हुए हैं। सीमा पर 11 लोगों की मौत हो चुकी है।
असम के मुख्य सचिव जितेश खोसला ने संवाददाताओं से कहा कि नगालैंड सरकार हमारे साथ सहयोग कर रही है, लेकिन कुछ भूमिगत तत्व सीमावर्ती क्षेत्रों में संकट पैदा कर रहे हैं। इस बीच, पुलिस ने कहा कि नगालैंड के बदमाशों द्वारा हत्याओं के विरोध में विभिन्न संगठनों ने रेल और सड़क मार्ग नाकेबंदी का आह्वान किया, जिसके बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित रहा।
हालांकि अब तक हिंसा की किसी ताजा घटना की खबर नहीं है। खोसला ने कहा कि वर्ष 1979 में दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच हस्ताक्षरित समझौते के अनुसार, सीआरपीएफ को क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी दी गई है। 13 अगस्त को हुई हिंसा के बाद से अर्धसैनिक बलों की संख्या बढ़ा दी गई है।
उन्होंने कहा, असम सरकार ने गोलाघाट के मजिस्ट्रेटों को स्थिति पर निगरानी रखने और स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए तैनात किया है। अशांत उरियमघाट क्षेत्र में शुक्रवार को नौ शव बरामद हुए थे, जबकि दो अन्य शव इससे पहले बरामद हो चुके हैं।
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