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This Article is From Nov 26, 2020

महाराष्ट्र में कोरोना से मृत्यु दर में गिरावट, Remdesivir से मरीज़ों को बचाने में मिल रही है मदद

महाराष्ट्र एक बार फिर कोरोना के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. मौतें कुछ दिनों की तुलना में डबल हुई हैं. लेकिन अच्छी ख़बर है मुंबई से जहां मृत्यु दर में बड़ी गिरावट दिख रही है.

महाराष्ट्र में कोरोना से मृत्यु दर में गिरावट, Remdesivir से मरीज़ों को बचाने में मिल रही है मदद
प्रतीकात्मक तस्वीर
मुंबई:

महाराष्ट्र एक बार फिर कोरोना (coronavirus) के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. मौतें कुछ दिनों की तुलना में डबल हुई हैं. लेकिन अच्छी ख़बर है मुंबई से जहां मृत्यु दर में बड़ी गिरावट दिख रही है. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि रेमडेसिवीर से मरीज़ों को ठीक करने में काफ़ी मदद मिली है. पिछले कुछ हफ़्तों से रोज़ाना औसतन 4,700 मामले महाराष्ट्र (Maharashtra) में सामने आ रहे हैं. पिछले 24 घंटों में 6,159 नए मामले मिले हैं. मौतें जहां 30 के आसपास दिख रही थीं अब दोगुनी होकर एक दिन में 65 मौतें दर्ज हुई हैं. हालांकि इसके कारणों को टेस्टिंग से भी जोड़ा जा रहा है. 

सितम्बर तक रोज़ाना टेस्टिंग का एवरेज जहां 88,000 के क़रीब हुआ करता था, अक्टूबर में गिरकर 70,700  और नवम्बर में 65,000 तक और दीवाली के दौरान तो क़रीब 25,000 तक पहुच गया था.  लेकिन बीते 24 घंटों में राज्य में 90,383 टेस्टिंग हुई है. आईएमए-महाराष्ट्र के अध्यक्ष डॉ अविनाश भोंडवे के अनुसार ‘'दीवाली के दौरान, और पहले बाज़ार में बहुत भीड़ थी, लोग एक दूसरे से चिपक पर चल रहे थे, दिवाली के दौरान बाहर राज्यों शहरों से यहां आए,महाराष्ट्र के भी लोग दूसरी जगहों पर गए, वो भी भारी हुई बसों में, ट्रेनों में. इसी तरह मामले बढ़ते रहे तो दिसंबर में बड़ी वेव आएगी, इस नई लहर में बहुत ज़्यादा लोग बीमार हो सकते हैं, आईसीयू में अब तक 5% लोग भर्ती होते थे उनकी तादाद भी बढ़ेगी.''

हालांकि मुंबई ने मौतों पर कुछ हद तक क़ाबू पाया है.  जुलाई-अगस्त में 5% मृत्यु दर देख रहे शहर में अब ये दर 2% से भी कम है. कोविड टास्क फ़ोर्स के सदस्य डॉ राहुल पंडित के अनुसार ‘'बीते नौ महीने से हम कोविड से जूझ रहे हैं, तो हमें इस बीमारी के बारे में काफ़ी कुछ पता चला है, इसका प्रोग्रेशन कैसा होता है,  दूसरा कारण है मरीज़ अस्पताल में अब जल्दी आ रहे हैं, तीसरा कारण है की ट्रीटमेंट प्रोटकॉल अब काफ़ी नियमित तरीक़े से दिए जा रहे हैं.''

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO ने  रेमडेसिवीर का उपयोग भले ही न करने की सिफारिश की हो लेकिन मुंबई में तमाम अस्पताल इसका इस्तेमाल कर मरीज़ों को राहत पहुंचाने का दावा कर रहे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि रेमडेसिवीर भले ही डेथ कम नहीं करती लेकिन सिम्प्टम रिलीफ़ में काफ़ी इसका इस्तेमाल हुआ है और मरीज़ों को राहत मिली है. डॉक्टर प्रीतम मून का कहन है कि कोरोना के लिए जो हम दवाई देते हैं उनमें रेमडेसिवीर बहुत अहम दवा है, फ़र्स्ट लाइन दवा है ये, शरीर में जो वाइरस मल्टिप्लाई होता है उसको ये रोकता है, तो हमने ये देखा है की अर्ली स्टेज में हमने जिन मरीज़ों को ये दिया है उनमें काफ़ी अच्छा रेस्पॉन्स मिला है.''

मुंबई में अब भी कुल मौतों में 85% मौतें 50 साल से ऊपर के मरीज़ों की हूई है. जल्द जांच, वक़्त पर अस्पताल में भर्ती करना और जीवन रक्षक दवाइयों के सहारे इनकी मौतों पर क़ाबू पाने में BMC की कोशिश रंग लाती दिख रही है. 

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