- महाराष्ट्र में महायुति सरकार ने जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए नया विधेयक पेश किया है
- शिवसेना (यूबीटी) ने इस बिल का समर्थन किया और इसका उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा बताया है
- विधेयक में गैर-कानूनी धर्मांतरण के लिए सात साल जेल और एक लाख रुपये जुर्माना प्रस्तावित है
राजनीति में ऐसे मौके बहुत ही कम होते हैं, जब पक्ष और विपक्ष एक साथ आते हैं. महाराष्ट्र की सियासत में भी ऐसा ही मौका आया है, जब शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे महायुति सरकार के समर्थन में आए हैं. मौका है जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून का. महायुति सरकार के इस बिल का शिवसेना (यूबीटी) ने समर्थन किया है.
सोमवार को इस बिल को पेश करते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में प्रस्तावित धर्मांतरण विरोधी कानून किसी खास धर्म के खिलाफ नहीं है, और इसका मकसद सिर्फ जबरदस्ती, धोखे या लालच से होने वाले धर्मांतरण को रोकना है. 13 मार्च को पेश किए गए 'महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026' में शादी की आड़ में किए गए गैर-कानूनी धर्मांतरण के लिए 7 साल की जेल और 1 लाख रुपये के जुर्माने का प्रस्ताव है.
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फडणवीस ने बताया कि प्रस्तावित बिल में सिर्फ गैर-कानूनी धर्मांतरण के मकसद से की गई शादियों को ही अदालत रद्द कर सकती है. फडणवीस ने यह भी कहा कि प्रभावित व्यक्ति या उसके करीबी रिश्तेदार शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जबकि कुछ मामलों में पुलिस भी खुद कार्रवाई कर सकती है.
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महायुति के बिल को ठाकरे का मिला साथ
खास बात यह है कि विपक्षी दल शिवसेना (UBT) ने इस विधेयक को अपना समर्थन दिया है. शिवसेना (UBT) के विधायक भास्कर जाधव ने कहा कि इस विधेयक का मकसद धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करना और गैर-कानूनी धर्मांतरण को रोकना है.
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर धर्म में कुछ ऐसी हानिकारक प्रथाएं होती हैं जो इंसानी अधिकारों को सीमित करती हैं, और इस बिल का मकसद ऐसी प्रथाओं को कानूनी तौर पर नियंत्रित करना है. जाधव ने इस बिल को पेश करने के लिए मुख्यमंत्री और सरकार को बधाई दी, और उनसे गुजारिश की कि इसे लागू करते समय किसी भी धर्म को खास तौर पर निशाना न बनाया जाए.
हालांकि, शिवसेना (UBT) के विधायक ने यह बात उठाई कि इस प्रस्तावित बिल में बेगुनाही साबित करने की जिम्मेदारी आरोपी व्यक्तियों पर डाली गई है. उन्होंने कहा कि जो लोग आरोप लगा रहे हैं, उन्हें ही इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए और सबूत भी पेश करने चाहिए.
उद्धव ठाकरे ने क्या कहा?
महाराष्ट्र में महायुति सरकार के धर्मांतरण विरोधी कानून को उद्धव ठाकरे ने समर्थन दिया है. उद्धव ठाकरे ने स्पष्ट किया कि यदि कोई डरा-धमकाकर धर्म परिवर्तन कराता है, तो कानून उस पर कड़ा प्रहार करे. उन्हें इस विधेयक से कोई आपत्ति नहीं है.
उन्होंने एक गंभीर राजनीतिक सवाल उठाया कि यदि धर्म बदलने के लिए 'डर' गलत है, तो राजनीति में ED और CBI का डर दिखाकर 'दल बदल' करवाना भी गलत है, इसके लिए भी सख्त कानून चाहिए.

दोनों सदनों में नेता प्रतिपक्ष (LoP) न होने पर उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर से तीखे सवाल किए और इसे लोकतांत्रिक इतिहास की बड़ी विफलता बताया. उन्होंने कहा कि इतिहास में पहली बार होगा, जब दोनों सदनों में नेता विपक्ष नहीं है, इसलिए हम अध्यक्ष से आज मिले. पता नहीं इन्हें क्या डर है? अध्यक्ष हर बार कहते हैं उचित कदम उठाया जाएगा. इस बार भी यही कहा है.
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बिल के विरोध में कांग्रेस और विपक्ष
इस बिल पर महायुति को भले ही ठाकरे शिवसेना का साथ मिल गया हो लेकिन कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों ने इसका विरोध किया है. ज़्यादातर विपक्षी विधायकों ने यह मांग की कि इस बिल को चर्चा के लिए विधानसभा की एक संयुक्त चयन समिति के पास भेजा जाए.
कांग्रेस विधायक नितिन राउत और विपक्ष के कई विधायकों ने इस बात पर चिंता जताई कि अगर यह बिल पास हो जाता है, तो इससे 'खुद कानून हाथ में लेने' वाली घटनाएं बढ़ सकती हैं.
कांग्रेस विधायक असलम शेख ने कहा कि इस बिल का मकसद और इसका मूल भाव, दोनों ही संविधान और निजता के अधिकार पर बुरा असर डालते हुए दिखाई देते हैं. शेख ने कहा कि अगर दो बालिग लोग अपनी मर्जी से शादी करने का फैसला करते हैं, तो इस बिल के तहत कोई भी तीसरा व्यक्ति या कोई रिश्तेदार उनके खिलाफ शिकायत दर्ज करवा सकता है.
समाजवादी पार्टी के विधायक अबु आसिम आजमी ने इस बिल का जोरदार विरोध किया. उनके पार्टी सहयोगी रईस शेख ने कहा कि यह बिल संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन करता है.
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