BioNTech-Pfizer ने कहा, हमारी कोरोना वैक्सीन 12-15 साल के बच्चों पर 100 फीसदी प्रभावी

कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि फेज-3 का ट्रायल अमेरिका में 2,260 किशोरों पर किया गया था और यह 100 फीसदी प्रभावी साबित हुआ है.  

BioNTech-Pfizer ने कहा, हमारी कोरोना वैक्सीन 12-15 साल के बच्चों पर 100 फीसदी प्रभावी

कंपनी के अनुसार, फेज-3 का ट्रायल अमेरिका में 2,260 किशोरों पर किया गया था

बर्लिन:

BioNTech-Pfizer ने उसकी कोविड-19 वैक्‍सीन 12 से 15 साल तक के बच्‍चों पर 100 फीसदी प्रभावी होने का दावा किया है. कंपनी, अगले स्‍कूल सेशन से पहले बच्‍चों के लिए टीकाकरण की मंजूरी की इजाजत मिलने की उम्‍मीद लगाए हुए है. कंपनी की ओर से बुधवार को जारी बयान में कहा गया है कि फेज-3 का ट्रायल अमेरिका में 2,260 किशोरों पर किया गया था और यह 100 फीसदी प्रभावी साबित हुआ और और इसने मजबूत एंटीबॉडी रिस्‍पांस दिखाया .Pfizer के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी अल्‍बर्ट बाउर्ला ने कहा, 'हम यह डेटा आने वाले कुछ सप्‍ताह में अमेरिकी नियामक एफडीए के समक्ष पेश करने की योजना बना रहे हैं. हम अगले स्‍कूल इयर से पहले से इस आयु वर्ग के लिए टीकाकारण शुरू करने की उम्‍मीद लगाए हुए हैं. '  उधर जर्मन कंपनी BioNTech के मुख्‍य कार्यकारी ने कहा कि किशोरों के लिए अत्‍यधिक सुरक्षित (वैक्‍सीन) बताने वाले  यह परिणाम बेहद उत्‍साहजनक हैं.

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गौरतलब है कि कई देशों में ऐसे व्यस्कों को कोविड-19 टीकों की खुराकें दी जा रही है, जो कोरोना वायरस संक्रमण के मामले में अति संवेदनशील हैं. फाइजर का टीका 16 साल या उससे अधिक आयु के लोगों को लगाने की अनुमति है] लेकिन महामारी को रोकने के लिये सभी आयुवर्ग के बच्चों को टीका लगाया जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है. साथ ही इससे कम से कम बड़ी कक्षाओं के छात्रों के स्कूल जाने का रास्ता साफ हो सकता है.फाइजर ने बताया कि 12 से 15 साल के 2,260 अमेरिकियों पर किये गए अध्ययन के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार टीके की पूरी खुराकें ले चुके इनमें से किसी भी बच्चे के कोरोना वायरस से संक्रमित होने का कोई मामला सामने नहीं आया है.यह एक लघु अध्ययन है, जिसे अभी प्रकाशित नहीं किया गया है.

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कंपनी ने कहा कि यह अध्ययन दो साल तक जारी रहेगा ताकि दीर्घकालिक सुरक्षा के बारे में अधिक जानकारी जुटाई जा सके. बोस्टन कॉलेज के डॉक्टर फिलिप जे लैंड्रिगन ने कहा कि अध्ययन परिणाम साहस बढ़ाने वाले हैं. इस अध्ययन में शामिल रहे लैंड्रिगन ने कहा, ''बच्चों को मास्क पहनने और भौतिक दूरी बनाए रखने के नियम का पालन कराना बहुत मुश्किल होता है. लिहाजा कोई ऐसी चीज मिलना जिससे उन्हें अति सुरक्षित रखा जा सके, हम सबके लिये अच्छी बात है.'' (भाषा से भी इनपुट)
 



(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)