
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस एनवी रमना (Justice NV Ramana) ने आज कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़ी कॉलेजियम की सिफारिशों पर मीडिया रिपोर्टों से "बेहद परेशान" हैं. उन्होंने मीडिया से ऐसी खबरों की रिपोर्टिंग में "जिम्मेदार" होने का आग्रह किया. CJI ने कहा कि किसी भी औपचारिक घोषणा से पहले ही नियुक्तियों पर रिपोर्ट "प्रतिकूल" हैं.
जस्टिस नवीन सिन्हा की विदाई के मौके पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया पवित्र है और इससे कुछ गरिमा जुड़ी हुई है. मीडिया मित्रों को इस प्रक्रिया की पवित्रता को समझना और पहचानना चाहिए."
जस्टिस रमना ने कहा, "ऐसी गैर-जिम्मेदार रिपोर्टिंग और अटकलों के कारण उज्ज्वल प्रतिभाओं के योग्य लोगों के कैरियर को आघात पहुंचने के कई उदाहरण हैं. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है और मैं इससे बेहद परेशान हूं. मैं इस तरह के गंभीर मामलों पर अटकलें नहीं लगाने में वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया घरानों द्वारा प्रदर्शित परिपक्वता और जिम्मेदारी की सराहना करता हूं."
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उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों की नियुक्ति की प्रक्रिया अभी जारी है, बैठकें होंगी और निर्णय लिए जाएंगे. यह कहते हुए कि सर्वोच्च न्यायालय मीडिया की स्वतंत्रता और व्यक्तियों के अधिकारों को उच्च सम्मान में रखता है, जस्टिस रमना ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सभी स्टेकहोल्डर्स इस संस्था की अखंडता और गरिमा को बनाए रखेंगे.
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इससे पहले आज कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि जस्टिस रमना की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने शीर्ष अदालत में पदोन्नति के लिए 9 जजों के नाम की सिफारिश की है. इनमें जस्टिस बीवी नागरत्ना भी शामिल हैं, जो 2027 में भारत की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बन सकती हैं.
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