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This Article is From Oct 24, 2020

बिहार चुनाव में इस बार नीतीश कुमार बनाम ऑल क्यों है?

Bihar Assembly Elections: पूरे बिहार में इस वक्त परिवर्तन ब्रिगेड दिखाई पड़ रहा है. ये सभी भाजपा कार्यकर्ता हैं जो मानते हैं कि अब नीतीश कुमार को पद से हटना चाहिए. उनके लिए ये 'अभी या फिर कभी नहीं' का सवाल बन चुका है.

बिहार चुनाव में इस बार नीतीश कुमार बनाम ऑल क्यों है?
बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार.
पटना:

Bihar Assembly Elections: राज्य की चौथी बार सत्ता हासिल करने के लिए चुनाव लड़ रहे नीतीश कुमार का 'सुशासन बाबू' का टैग और उनकी प्रतिष्ठा दांव पर है. उनकी रैलियों में हुड़दंग और लालू यादव के समर्थन में नारेबाजी ने नीतीश के चुनावी रैली प्रबंधकों को चिंता में डाल दिया है. 69 साल के नीतीश कुमार इस बार के विधान सभा चुनाव में कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. कुछ हफ्ते पहले तक सत्ताधारी एनडीए ने ये कल्पना भी नहीं की होगी कि मुख्यमंत्री के खिलाफ इतना रोष है.

आधिकारिक तौर पर उनके लिए मुख्य चुनौती पूर्व उप मुख्यमंत्री और राजद नेता तेजस्वी यादव हैं जो कांग्रेस और वाम दल समर्थित महागठबंधन के सीएम पद के उम्मीदवार हैं. लेकिन तेजस्वी के अलावा कई सियासी खिलाड़ी हैं जो नीतीश का किला ढाहने के लिए चहुंओर हमला कर रहे हैं. इनमें रालोसपा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा हैं, जिन्होंने मायावती की पार्टी बसपा और  AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी से हाथ मिलाया है. कुशवाहा के अलावा जन अधिकार पार्टी के मुखिया पप्पू यादव, जिन्होंने भीम आर्मी के चंद्रशेखर आजाद रावण से हाथ मिलाया है, भी नीतीश के खिलाफ हवा बनाने में जुटे हैं.

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इनके अलावा नीतीश कुमार के लिए सबसे ज्यादा घातक 37 साल के चिराग पासवान हैं, जो अभिनय की दुनिया छोड़ राजनीति में आए हैं. चिराग पिछले तीन साल से नीतीश के सहयोगी रहे हैं लेकिन ऐन चुनाव के वक्त बागी हो गए. लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान बिहार में पहला चुनाव अकेले अपने दम पर लड़ रहे हैं. इसमें उनका मुख्य मुकाबला उनके ही एनडीए सहयोगी से है. उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उनका मुख्य एजेंडा नीतीश कुमार को पद से हटाने और बीजेपी के साथ मिलकर राज्य में सरकार बनाने का है.

नीतीश कुमार के पास तेजस्वी यादव के बारे में चिंता करने के कारण हैं, जो अपनी सभाओं में भारी भीड़ खींच रहे हैं. उनके 10 लाख सरकारी नौकरियों के वादे की वजह से राज्य के लोगों ने उन्हें मुख्यमंत्री के दावे से ज्यादा तवज्जो दिया है लेकिन चिराग पासवान और भाजपा में छिपे हुए कथित विरोधी नेताओं ने पांच बार के मुख्यमंत्री की रातों की नींद हराम कर दी है.

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पूरे बिहार में इस वक्त परिवर्तन ब्रिगेड दिखाई पड़ रहा है. ये सभी भाजपा कार्यकर्ता हैं जो मानते हैं कि अब नीतीश कुमार को पद से हटना चाहिए. उनके लिए ये 'अभी या फिर कभी नहीं' का सवाल बन चुका है. ये लोग चिराग पासवान को एक सहयोगी नहीं बल्कि विद्रोही के रूप में एक अवसर देख रहे हैं.

ऑन रिकॉर्ड भले ही भाजपा नेता चिराग पासवान पर हमले बोल रहे हों लेकिन भाजपा उसे एनडीए से बाहर करने पर चुप्पी साध लेती है, भले ही चिराग रोज-रोज नीतीश कुमार पर नए-नए तरीके से हमला कर रहे हों, जो बिहार में एनडीए के अगुवा हैं.

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दो दिनों में दो साक्षात्कारों में उनके बारे में कुछ भी नहीं कहा, यह उससे अधिक खुलासा करता है. हालांकि, चिराग पासवान के कदम पर अमित शाह ने नाराजगी जाहिर की. रामविलास पासवान के निधन के बाद चिराग पासवान के केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कराने के फैसले पर अमित शाह ने कहा कि इस पर फैसला बिहार चुनावों के बाद होगा. बीजेपी साफ तौर पर लोजपा से कन्नी नहीं काट रही है. बीजेपी के इस रुख से जेडीयू के नेता नाराज हैं.

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