कर्नाटक: चर्च पर हमले के हफ्तेभर बाद भी नहीं कोई गिरफ्तारी, बजरंग दल के आरोपी घूम रहे खुल्लम खुल्ला

हासन जिले के पुलिस अधीक्षक श्रीनिवास गौड़ा ने कहा, "हमने दोनों समुदायों को थाने बुलाया और शांति समिति की बैठक की. दोनों समुदायों ने सुनिश्चित किया है कि वे मुद्दों को आगे नहीं बढ़ाएंगे और इसे सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाएंगे."

कर्नाटक: चर्च पर हमले के हफ्तेभर बाद भी नहीं कोई गिरफ्तारी, बजरंग दल के आरोपी घूम रहे खुल्लम खुल्ला

28 नवंबर को बजरंग दल के करीब 25 कार्यकर्ता चर्च में तब घुस गए थे, जब वहां प्रार्थना सभा चल रही थी.

बेलूर, कर्नाटक:

कर्नाटक (Karnataka) के बेलूर शहर के एक छोटे से चर्च में जबरन धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए हिंदूवादी संगठनों के एक समूह के जबरन चर्च में घुसने की घटना को एक सप्ताह हो गया है, लेकिन अभी तक इस मामले में एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई है, जबकि बजरंग दल के पांच कार्यकर्ताओं के खिलाफ सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है. यह घटना बेंगलुरु से करीब पांच घंटे की दूरी पर "लाइफ टू द नेशन मिनिस्ट्रीज" नामक चर्च में हुई थी.

28 नवंबर को बजरंग दल के करीब 25 कार्यकर्ता चर्च में तब घुस गए थे, जब वहां प्रार्थना सभा चल रही थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए जिन पुलिसकर्मियों को स्थिति पर काबू पाने के लिए बुलाया गया था, उन्हें हमलावरों पर नकेल कसने के बजाय, कथित तौर पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत करते देखा गया था.

चर्च के सदस्यों की शिकायत के बाद बेलूर पुलिस ने शांति भंग करने के आरोप में बजरंग दल के पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी. एक शीर्ष पुलिस अधिकारी ने कानूनी कार्रवाई करने के बजाय, एक शांति बैठक का आयोजन किया और दोनों पक्षों से औपचारिक आश्वासन प्राप्त किया कि भविष्य में कोई परेशानी नहीं होगी, भले ही घटना के दिन के वीडियो में स्पष्ट रूप से बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को आक्रामकता की शुरुआत करते हुए देखा गया हो.

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हासन जिले के पुलिस अधीक्षक श्रीनिवास गौड़ा ने कहा, "हमने दोनों समुदायों को थाने बुलाया और शांति समिति की बैठक की. दोनों समुदायों ने सुनिश्चित किया है कि वे मुद्दों को आगे नहीं बढ़ाएंगे और इसे सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाएंगे."

इधर, चर्च के सदस्यों ने जबरन धर्म परिवर्तन के आरोपों से इनकार किया है. सुनीता, जो विवाद के दिन चर्च में मौजूद थी, ने NDTV से कहा, "हमारा वो जबरन धर्म परिवर्तन क्यों कराएंगे? हम भगवान की पूजा कर रहे हैं. बलपूर्वक धर्मांतरण से क्या लाभ है? हम उनके कार्यों से पीड़ित थे. मुझे धर्म में विश्वास है और मैं ईसाई बनना चाहती थी, यह मेरा व्यक्तिगत निर्णय है और यह मेरा अधिकार है. पिछले पांच सालों से, मैं प्रार्थना सभा का हिस्सा रही हूं. किसी ने मुझे मजबूर नहीं किया. चर्च में आने का यह मेरा स्वैच्छिक निर्णय है."

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चर्च के पादरी सुरेश पॉल ने भी इन आरोपों से इनकार किया है. चर्च पिछले तीन सालों से सक्रिय है. उन्होंने कहा, "कोई धर्मांतरण नहीं हो रहा है. यह धर्मांतरण की जगह नहीं है. कार्यकर्ता यहां आए और हमें धमकी दी और यहां तक ​​कि कुछ लोगों को पीटने की भी कोशिश की."

उधर, बजरंग दल के कार्यकर्ता, जो चर्च में घुसने वाली भीड़ में शामिल थे, क्षमाप्रार्थी नहीं हैं. हासन जिले में बजरंग दल के संयोजक मंजूनाथ ने NDTV से कहा, "हां, हमें ईसाई धर्म अपनाने वालों के साथ एक समस्या है. एक बार हिंदू में पैदा होने के बाद, आप एक हिंदू के रूप में ही मर सकते हैं. नागनहल्ली के बजरंग दल के एक सदस्य ने हमें फोन पर बताया कि बेलूर में जबरन धर्मांतरण हो रहा है. बहुत से लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित कर दिया गया है और यह जारी रहेगा, कृपया इसका संज्ञान लें." 

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हाल के दिनों में कर्नाटक में चर्चों पर हमले हुए हैं जब कर्नाटक के मुख्यमंत्री ने विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान धर्मांतरण विरोधी विधेयक लाने का वादा किया है.