Amazon-Future विवाद : 'लीगल टीम अदालत के लिए मुश्किलें पैदा कर रही...' : ज्यादा दस्तावेज दाखिल कराने पर सुप्रीम कोर्ट

दोनों पक्षों के वकीलों को आपस में बैठकर दस्तावेज कम करने को कहा गया है. अब  8 दिसंबर को सुनवाई होगी .

Amazon-Future विवाद : 'लीगल टीम अदालत के लिए मुश्किलें पैदा कर रही...' : ज्यादा दस्तावेज दाखिल कराने पर सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों के भारी मात्रा में दस्तावेज दाखिल कराने पर जताई नाराजगी

नई दिल्ली:

फ्यूचर और अमेजन विवाद मामले में फ्यूचर ग्रुप (Future Group)ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने दोनों पक्षों के भारी मात्रा में दस्तावेज दाखिल कराने पर नाराजगी जताई है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लीगल टीम अदालत के लिए मुश्किलें पैदा कर रही है.  दोनों पक्षों के वकीलों को आपस में बैठकर दस्तावेज कम करने को कहा गया है. अब  8 दिसंबर को सुनवाई होगी . इससे पहले फ्यूचर और अमेजन विवाद मामले में फ्यूचर ग्रुप की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया था . सिंगापुर आपातकालीन मध्यस्थ (Singapore arbitration panel)के आदेश पर रोक लगाने को लेकर दाखिल याचिका पर यह सुनवाई के लिए तैयार हो गया था. 

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सुप्रीम कोर्ट ने फ्यूचर रिटेल डील को मंजूरी देने से नियामकों को रोकने के लिए अमेजन की याचिका पर भी सुनवाई के लिए सहमति जताई थी और नोटिस जारी कर जवाब मांगा था.सुनवाई के दौरान CJI एनवी रमना ने कहा था कि हम इस स्तर पर फ्यूचर ग्रुप को कैसे आगे बढ़ने दे सकते है.अगर फ्यूचर को आगे बढ़ने दिया गया तो इस मामले में कुछ भी नहीं बचेगा.फ्यूचर अपना मीठा समय ले रहा है, मध्यस्थता के साथ आगे बढ़ रहा है.


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सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक तौर पर कहा कि जब तक सुप्रीम कोर्ट इस पर अंतिम फैसला ना दे, फ्यूचर ग्रुप  किसी भी अन्य फोरम में ना जाए. दरअसल फ्यूचर ग्रुप ने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी है जिसमें आपातकालीन मध्यस्थ के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था.हाईकोर्ट ने फ्यूचर की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें शेयरधारकों की मंजूरी और लेनदारों की मांग की प्रक्रिया शुरू करने की अंतरिम राहत की मांग की गई थी. फ्यूचर ने आपातकालीन मध्यस्थ आदेश की प्रयोज्यता को चुनौती दी थी .  फ्यूचर का तर्क है कि पिछले आदेश में दिल्ली हाईकोर्ट ने माना था कि अमेज़ॅन द्वारा दावा किए गए अधिकार 'अत्याचारी हस्तक्षेप'  हैं. फ्यूचर ग्रुप ने डील के शेयरधारकों और लेनदारों की मंजूरी के लिए अदालत से अंतरिम राहत मांगी है.