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This Article is From Jan 09, 2013

गैंगरेप : हाईकोर्ट ने पूछा, पुलिस आयुक्त को जवाबदेह क्यों नहीं बनाया गया?

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस बात पर सख्त एतराज जताया कि 23 वर्ष की छात्रा के साथ सामूहिक हत्या और उसकी हत्या की वीभत्स घटना के लिए सिर्फ एक जूनियर पुलिस अधिकारी को निलंबित किया गया और पुलिस आयुक्त समेत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जवाबदेह नहीं बनाया गया।

मुख्य न्यायाधीश डी मुरुगेसन की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने सवाल किया, ‘‘क्यों सिर्फ अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, पुलिस उपायुक्त को क्यों नहीं, आयुक्त को क्यों नहीं जिम्मेदार बनाया गया?’’ खंडपीठ ने यह बात उन इलाकों में गश्त कर रहे पुलिसकर्मियों के नाम प्रकट नहीं करने पर नाराजगी जताते हुए कही जहां 16 दिसंबर को चलती हुई बस में छात्रा के साथ बलात्कार किया गया था।

अदालत ने दिल्ली पुलिस को यह भी चेताया कि वह परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे।

खंडपीठ ने कहा, ‘‘हमने आपको संबंधित पीसीआर वैनों और संबंधित क्षेत्रों में तैनात अधिकारियों का नाम देने का निर्देश दिया था। आज भी, हम (स्थिति रिपोर्ट पर) संतुष्ट नहीं हैं क्योंकि (इसमें) अधिकारियों के नाम नहीं दिए गए हैं। आप (दिल्ली पुलिस) अदालत पर दोष नहीं मढ़ेंगे। हम कल आदेश सुनाएंगे।’’

अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस को ‘‘काफी’’ मौके दिए गए लेकिन पुलिस अधिकारियों के नाम मुहैया नहीं कराए गए। अदालत को जब बताया गया कि दक्षिण जिले में 67 पीसीआर वैन तैनात हैं, तो उसने कहा, ‘‘हमें उन 67 पीसीआर वैन से सरोकार नहीं है और हमें तीन पीसीआर वैन और पुलिस अधिकारियों से सरोकार है, इसपर रिपोर्ट कहां है?’’

दिल्ली पुलिस के वकील डी कृष्णन ने कहा कि स्थल से निकट दो पीसीआर वैन थे और यह नहीं कहा जा सकता है कि वह बस उनके पास से गुजरी जिसपर अपराध हुआ था।

खंडपीठ ने कहा, ‘‘पहले, यह कहा गया था कि तीन पीसीआर वैन थे। अब आप कह रहे हैं कि वहां दो पीसीआर वैन थे।’’ खंडपीठ ने कहा कि चूंकि आरोपपत्र दाखिल कर दिया गया है, वह मामले की निगरानी नहीं करेगी।

अदालत ने सामूहिक बलात्कार का स्वत: संज्ञान लिया था और यह सवाल कर पुलिस की खिंचाई की थी कि अपराध का पता कैसे नहीं चल पाया।

सुनवाई की शुरुआत में दिल्ली पुलिस ने एक मुहरबंद लिफाफे में स्थिति रिपोर्ट दाखिल की और उसका अध्ययन करने पर तथा उसमें पुलिस अधिकारियों का नाम नहीं पाकर अदालत ने नाराजगी जताई।

अदालत ने कहा, ‘‘आज तक, आप नाम नहीं दे रहे हैं। दिक्कत क्या है? आप इस तरह नाम छिपा नहीं सकते। हम खुश नहीं हैं। पहले भी, हमने अपनी नाराजगी जताई थी। तब भी आप नाम नहीं दे रहे हैं। आपने अभी तक क्या कार्रवाई की है?’’

दिल्ली पुलिस के वकील ने बताया कि एक एसीपी (पीसीआर) निलंबित किया गया है। बहरहाल, यह अदालत को संतुष्ट करने में नाकाम रहा। खंडपीठ ने कहा कि वह कल आदेश पारित करेगी।

अदालत ने कहा, ‘‘हम मामले की एक उचित, तेज और उच्च मानक वाली जांच चाहते हैं। आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। हम :मामले की: और निगरानी नहीं कर सकते। यह मामले और सुनवाई के हित में नहीं है।’’

खंडपीठ में शामिल न्यायमूर्ति वीके जैन ने जानना चाहा कि कैसे काले शीशे और परदे वाली बस को दिल्ली की सड़कों पर चलने की इजाजत दी गई और क्या कार्रवाई की गई। दिल्ली पुलिस के वकील ने कहा कि एक एसीपी (ट्रैफिक) के खिलाफ कार्रवाई की गई।

इसपर न्यायमूर्ति जैन ने कहा, ‘‘आप एसीपी और संयुक्त सचिव (ट्रैफिक) के खिलाफ क्यों कार्रवाई कर रहे हैं, क्या आप कहना चाहते हैं कि बस सिर्फ दक्षिण दिल्ली में चल रही थी?’’
(इनपुट भाषा से भी)

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