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भारतीय मॉडर्न हॉकी के सुपरस्टार श्रीजेश सोशल मीडिया पर क्यों हो गए भावुक, ‘लगता है मेरा हॉकी कोचिंग करियर’ ...'

PR Sreejesh Emotional on Social Media: मैंने कोचों को खराब प्रदर्शन के बाद बर्खास्त होते हुए सुना है, लेकिन यह पहली बार है जब मैं खुद इस अनुभव से गुजर रहा हूं – एक विदेशी कोच के लिए जगह बनाने के वास्ते हटाया जाना.

भारतीय मॉडर्न हॉकी के सुपरस्टार श्रीजेश सोशल मीडिया पर क्यों हो गए भावुक, ‘लगता है मेरा हॉकी कोचिंग करियर’ ...'
PR Sreejesh Emotional on Social Media:

PR Sreejesh Emotional on Social Media: भारतीय खिलाड़ी मैदान पर चाहे जितने बार तिरंगा लहरा दें, पोडियम पर चढ़कर राष्ट्रगान सुनाने का गौरव दिला दें, अपने मेडल से डेढ़ सौ करोड़ खेलप्रेमियों को सर उठाने का मौक़ा दिला दें, खेल फ़ेडेरेशन और खेल अधिकारी अक्सर मायूसी भरी ख़बर देने में भी पीछे नहीं दिखते. पिछले दो हफ़्तों के अंदर बैडमिंटन, कुश्ती, तैराकी से लेकर हॉकी तक के खिलाड़ी सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म पर आकर अपना दर्द बांटते नज़र आये हैं.  

कुछ ही दिनों पहले वर्ल्ड कप में डबल पदक विजेता और थॉमस कप (बैडमिंटन का टीम वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसा टूर्नामेंट) के डबल पदक विजेता सात्विक साईराज ने फ़ैन्स से एक भावुक अपील कर दी. तो वर्ल्ड चैंपियनशिप में डबल पदक विजेता पहलवान विनेश फोगाट अपने फेडरेशन से अपनी वापसी के लिए लड़ती दिखीं. और, अब एक हॉकी के चैंपियन और बेहद कामयाब खिलाड़ी और कोच पीआर श्रीजेश को भावुक अपील करनी पड़ी है. पीआर श्रीजेश ना सिर्फ़ मॉडर्न हॉकी का सबसे कामयाब चेहरा रहे हैं. अपने कोचिंग करियर में भी वो तेज़ी से कामयाबी की सीढ़ियां चढ़ते दिखाई दे रहे थे कि हॉकी इंडिया ने उन्हें मायूस कर दिया है.      

एक के बाद एक खिलाड़ी कर रहे शिकायत

इसमें कोई शक नहीं कि मॉडर्न हॉकी में पूर्व कप्तान और सुपर स्ट्राइकर धनराज पिल्लै जितनी ख्याति हासिल करने वालों में पीआर श्रीजेश के नाम सबसे ऊपर आता है. 1980 के बाद या एस्ट्रो टर्फ़ वाली हॉकी में जो कामयाबी पीआर श्रीजेश ने देखी वो शायद ही किसी और दूसरे हॉकी खिलाड़ी ने देखी. श्रीजेश हॉकी इंडिया टीम के कप्तान भी रहे और दो-दो बार भारतीय टीम ओलिंपिक के पोडियम तक पहुंचाने में बेहद अहम रोल अदा किया. श्रीजेश ने डेढ़ साल पहले पेरिस ओलिंपिक में भारतीय टीम के पदक के बाद अपने करियर को अलविदा कहा और बतौर कोच अपना योगदान देने का फ़ैसला किया. 

श्रीजेश का लाजवाब करियर

श्रीजेश उस टीम का हिस्सा रहे जिसने भारत के लिए 41 साल बाद ओलिंपिक्स में पदक का सूखा ख़त्म किया. हॉकी इंडिया के सुपर गोलकीपर श्रीजेश के नाम 2 ओलिंपिक पदक, एक वर्ल्ड लीग का पदक, 2-2 चैंपियंस ट्रॉफ़ी और कॉमनवेल्थ गेम्स के पदक, एशियन गेम्स के 2 गोल्ड मेडल समेत 3 पदक, एशिया कप, एशियन चैंपियंस ट्रॉफ़ी और जूनियर एशिया कप के बेशुमार पदक हासिल हैं. 

हॉकी की कोचिंग करते वक्त भी श्रीजेश ने अपना जी-जान झोंक दिया. डेढ़ साल के करियर में उनकी अगुआई में भारतीय जूनियर टीम ने 5 टूर्नामेंट खेले और टीम पांच बार पोडियम तक पहुंची. एक संवरती टीम को इससे बेहतर क्या चाहिए? लेकिन श्रीजेश के मुताबिक जिस तरीके और जिस वजह से उनके कोचिंग करियर पर विराम लगाने की बात की जा रही है, वो, वैसे भी हॉकी सर्किट में खिलाड़ी और पूर्व खिलाड़ियों का हौसला तोड़ेगी. 

श्रीजेश का दर्द! 

पूर्व ओलिंपिक पदक विजेता भारतीय कप्तान पीआर श्रीजेश ने सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म ‘X' पर एक बेहद ही मार्मिक पोस्ट किया है, जो इस प्रकार है: 

“ऐसा लगता है कि डेढ़ साल बाद मेरा कोचिंग करियर समाप्त हो रहा है, जिसके दौरान हमने 5 टूर्नामेंट खेले और 5 बार पोडियम फिनिश हासिल की, जिसमें जूनियर वर्ल्ड कप का कांस्य पदक भी शामिल है.

मैंने कोचों को खराब प्रदर्शन के बाद बर्खास्त होते हुए सुना है, लेकिन यह पहली बार है जब मैं खुद इस अनुभव से गुजर रहा हूं – एक विदेशी कोच के लिए जगह बनाने के वास्ते हटाया जाना.

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष ने कहा कि सीनियर पुरुष टीम के मुख्य कोच जूनियर टीम के लिए एक विदेशी हेड कोच को प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इससे जूनियर स्तर से लेकर सीनियर स्तर तक भारतीय हॉकी को विकसित करने में मदद मिलेगी. इसलिए, विदेशी कोचों को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है.

क्या भारतीय कोच भारतीय हॉकी को विकसित नहीं कर सकते?

07-03-2026 को, माननीय खेल मंत्री श्री मनसुख मांडविया के साथ एक बैठक के दौरान मुझसे कहा गया था, “श्रीजेश, हमें 2036 की तैयारी के लिए तुम्हारे जैसे कोचों की जरूरत है जो आगे आकर देश का नेतृत्व करें.”

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