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पीआर श्रीजेश के आरोपों पर हॉकी इंडिया प्रेसिडेंट का बड़ा बयान, “मैंने ऐसा कभी नहीं कहा”

Dilip Tirkey on PR Sreejesh Claim: PR श्रीजेश ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम के साथ उनका कार्यकाल समाप्त हो गया है - और वह भी उनकी शर्तों पर नहीं.

पीआर श्रीजेश के आरोपों पर हॉकी इंडिया प्रेसिडेंट का बड़ा बयान, “मैंने ऐसा कभी नहीं कहा”
Dilip Tirkey on PR Sreejesh Claim

Dilip Tirkey on PR Sreejesh Claim: दो दशकों से भी ज़्यादा समय तक, पी. आर. श्रीजेश भारतीय हॉकी के लिए डिफ़ेंस की आखिरी दीवार बनकर खड़े रहे, लेकिन बुधवार को उन्होंने एक बड़ा खुलासा करके सबको चौंका दिया. उन्होंने बताया कि हॉकी इंडिया ने उनके साथ नाइंसाफ़ी की और भारत के जूनियर कोच के तौर पर उनकी भूमिका इसलिए खत्म कर दी गई ताकि किसी विदेशी कोच को जगह दी जा सके. NDTV ने हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की से संपर्क किया, जिन्होंने इस बात से साफ़ इनकार कर दिया कि श्रीजेश को नाइंसाफ़ी करके टीम से बाहर किया गया था. इसके बजाय, टिर्की ने दावा किया कि जूनियर पुरुष टीम के साथ श्रीजेश के सफल कार्यकाल के बाद, फ़ेडरेशन ने उन्हें राष्ट्रीय टीम के सेटअप में शामिल करने की कई बार कोशिशें की थीं.

हॉकी इंडिया के अध्यक्ष और पूर्व कप्तान दिलीप टिर्की ने NDTV से EXCLUSIVE बात करते हुए कहा, “मैंने खुद पीआर श्रीजेश से बात की और उन्हें इंडिया-A टीम (या डेवलेपमेंटल टीम) को कोच करने का ऑफ़र दिया. उनसे गोलकीपिंग का भी स्पेशलिस्ट कोच बनने को कहा. मगर वो माने ही नहीं. वो बहुत बड़े खिलाड़ी रहे हैं. हम उनका टीम के लिए इस्तेमाल करना चाहते हैं. हम भारतीय टीम के लिए भी अच्छा कोच तैयार करना चाहते हैं. इस वक्त, आप देखें, हमारे पास भारतीय टीम के लिए क्या विकल्प है? श्रीजेश हमारे ऑफ़र के लिए माने ही नहीं.”  

बुधवार शाम को PR श्रीजेश ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम के साथ उनका कार्यकाल समाप्त हो गया है - और वह भी उनकी शर्तों पर नहीं. ओलंपिक पदक विजेता ने X पर लिखा, "ऐसा लगता है कि 1.5 साल बाद मेरा कोचिंग करियर खत्म हो रहा है, इस दौरान हमने पाँच टूर्नामेंट खेले और पाँच बार पोडियम पर जगह बनाई, जिसमें जूनियर विश्व कप का कांस्य पदक भी शामिल है."

उन्होंने आगे कहा, "मैंने खराब प्रदर्शन के बाद कोचों को निकाले जाने के बारे में सुना है. लेकिन यह पहली बार है जब मैं किसी विदेशी कोच के लिए जगह बनाने के लिए हटाए जाने का अनुभव कर रहा हूँ."

इससे भारतीय बनाम विदेशी कोच पर वह बहस फिर से शुरू हो गई है, जो लंबे समय से भारतीय कोचिंग व्यवस्था का हिस्सा रही है. श्रीजेश की निराशा समझ में आती है, क्योंकि उन्होंने अपने छोटे से कार्यकाल में जूनियर टीम को पाँच बार पोडियम पर जगह बनाने और जूनियर विश्व कप में कांस्य पदक जीतने में मदद की है. यह एक बेहतरीन खिलाड़ी से एक बेहतरीन कोच बनने की ओर उनके बदलाव का संकेत था.

मामले पर दिलीप टिर्की ने कहा, "हमने उनसे कहा है कि वो सोचकर बतायें. हॉकी इंडिया की ओर से ये ऑफ़र अभी भी बरक़रार है. अगर वो हां करते हैं तो हम उन्हें इंडिया-A का कोच भारतीय टीम का स्पेशल गोलकीपिंग कोच बना देंगे."

NDTV संवादादाता विमल मोहन ने कहा कि श्रीजेश ने आप पर आरोप लगाये हैं. श्रीजेश ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ‘X' पर लिखा है- 
“हॉकी इंडिया के अध्यक्ष ने कहा कि सीनियर पुरुष टीम के मुख्य कोच जूनियर टीम के लिए एक विदेशी हेड कोच को प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि उनका मानना है कि इससे जूनियर स्तर से लेकर सीनियर स्तर तक भारतीय हॉकी को विकसित करने में मदद मिलेगी। इसलिए, विदेशी कोचों को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है” इसपर हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा, “मैंने तो ऐसा श्रीजेश से कहा ही नहीं."

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