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World Brain Awareness Week 2026: एक्सपर्ट ने बताया कैसे स्ट्रेस आपके दिमाग को समय से पहले बना रहा है बूढ़ा ?

World Brain Awareness Week 2026: क्रॉनिक स्ट्रेस का सबसे पहला असर याददाश्त और ध्यान पर पड़ता है. लोग अक्सर भूलने लगते हैं, फोकस कम हो जाता है और निर्णय लेने में कठिनाई होती है. विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार तनाव में रहने से ब्रेन की कॉग्निटिव फंक्शनिंग कमजोर हो जाती है, जिससे काम की क्षमता पर भी असर पड़ता है.

World Brain Awareness Week 2026: एक्सपर्ट ने बताया कैसे स्ट्रेस आपके दिमाग को समय से पहले बना रहा है बूढ़ा ?
World Brain Awareness Week 2026: स्ट्रेस आपके ब्रेन को कर रहा है समय से पहले बीमार.

World Brain Awareness Week 2026: आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में तनाव एक आम समस्या बन चुका है. काम का दबाव, निजी जिंदगी की चुनौतियां और लगातार बदलती लाइफस्टाइल के बीच लोग मानसिक दबाव से जूझ रहे हैं. क्या आपने कभी सोचा है कि लगातार रहने वाला स्ट्रेस आपके दिमाग को समय से पहले बूढ़ा बना सकता है? विशेषज्ञों के अनुसार, क्रॉनिक स्ट्रेस ब्रेन हेल्थ के लिए एक साइलेंट खतरा है. थोड़ा बहुत स्ट्रेस सामान्य है, लेकिन जब यह लंबे समय तक बना रहता है, तो यह दिमाग की संरचना और कार्यक्षमता दोनों को प्रभावित करता है. इसे हम क्रॉनिक स्ट्रेस कहते हैं, जो ब्रेन एजिंग को तेज कर सकता है."

डॉ. मीनाक्षी मनचंदा, एसोशिएट डायरेक्टर, साइकायट्री, एशियन हॉस्पिटल कहती हैं, जब हम तनाव में होते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल नाम का हार्मोन बढ़ जाता है. यह हार्मोन अल्पकालिक स्थिति में मदद करता है, लेकिन लंबे समय तक इसका स्तर बढ़ा रहना दिमाग के लिए हानिकारक हो सकता है. डॉ. मनचंदा कहती  हैं, “लंबे समय तक बढ़ा हुआ कोर्टिसोल हिप्पोकैम्पस को नुकसान पहुंचा सकता है, जो मेमोरी और सीखने की क्षमता के लिए जिम्मेदार होता है."

 याददाश्त

क्रॉनिक स्ट्रेस का सबसे पहला असर याददाश्त और ध्यान पर पड़ता है. लोग अक्सर भूलने लगते हैं, फोकस कम हो जाता है और निर्णय लेने में कठिनाई होती है. विशेषज्ञों के अनुसार, लगातार तनाव में रहने से ब्रेन की कॉग्निटिव फंक्शनिंग कमजोर हो जाती है, जिससे काम की क्षमता पर भी असर पड़ता है.  स्ट्रेस केवल दिमाग को ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है. लंबे समय तक तनाव में रहने से एंग्जायटी, डिप्रेशन और नींद की समस्या बढ़ सकती है. डॉ.  बताती हैं, “क्रॉनिक स्ट्रेस दिमाग के केमिकल बैलेंस को बिगाड़ देता है, जिससे व्यक्ति मानसिक रूप से थका हुआ और अस्थिर महसूस करता है."

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एजिंग

क्रॉनिक स्ट्रेस ब्रेन की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर उसकी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है. डॉ. कहती हैं, “अगर स्ट्रेस को लंबे समय तक कंट्रोल नहीं किया जाए, तो यह न्यूरॉन्स के कनेक्शन को कमजोर कर देता है. इससे ब्रेन की प्रोसेसिंग स्पीड कम हो सकती है, जो उम्र बढ़ने जैसा प्रभाव देता है." स्ट्रेस का असर सिर्फ दिमाग तक सीमित नहीं रहता. यह शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित करता है, जैसे हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज और इम्यूनिटी में कमी. विशेषज्ञों का कहना है कि ब्रेन और बॉडी एक-दूसरे से जुड़े हैं, इसलिए मानसिक तनाव का असर पूरे शरीर पर दिखता है.

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क्रॉनिक स्ट्रेस के लक्षण

  • हर समय थकान महसूस होना
  • छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना
  • नींद की कमी या अनिद्रा
  • ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
  • बार-बार सिरदर्द

अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो यह क्रॉनिक स्ट्रेस का संकेत हो सकता है. डॉक्टर के अनुसार, कुछ आसान उपाय अपनाकर स्ट्रेस को कंट्रोल किया जा सकता है:

  • रोजाना 7-8 घंटे की नींद लें
  • नियमित एक्सरसाइज करें
  • मेडिटेशन और योग अपनाएं
  • स्क्रीन टाइम कम करें
  • दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताएं

डॉ. सलाह देती हैं, “स्ट्रेस को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन इसे मैनेज करना जरूरी है. छोटे-छोटे लाइफस्टाइल बदलाव से हम अपने दिमाग को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकते हैं." क्रॉनिक स्ट्रेस एक साइलेंट खतरे की तरह है, जो धीरे-धीरे हमारे दिमाग को प्रभावित करता है और उसकी उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकता है. इसलिए जरूरी है कि हम समय रहते तनाव को पहचानें और उसे नियंत्रित करने के लिए सही कदम उठाएं. क्योंकि स्वस्थ दिमाग ही एक बेहतर और संतुलित जीवन की कुंजी है.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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