पूर्वोत्तर में 6 यूक्रेनी नागरिकों को NIA ने हिरासत में लिया है. अब एजेंसियों को शक है कि कुछ विदेशी भाड़े के लड़ाके यानी फ्रीलांसर म्यांमार के गृहयुद्ध में शामिल होने के लिए भारत का इस्तेमाल रास्ते के तौर पर कर रहे हैं. NIA ने अब तक 7 विदेशियों को पकड़ा गया है, इनमें 6 यूक्रेन के और 1 अमेरिका का नागरिक है. अब एजेंसियां ये पता लगाने में जुटी हैं कि ये फ्रीलांसर किसके लिए काम कर रहे थे और इनका असली मकसद क्या था.
2024 में ही मिल गए थे संकेत
सूत्रों के मुताबिक, 2024 में मिजोरम के अधिकारियों ने पहली बार अलर्ट किया था.उन्होंने देखा कि इलाके में अचानक पश्चिमी देशों के संदिग्ध लोग आने लगे हैं. चौंकाने वाली बात ये थी कि वहां आमतौर पर विदेशी पर्यटक ज्यादा नहीं आते, फिर भी उनकी संख्या बढ़ रही थी तभी से एजेंसियों को शक हो गया था कि मामला सिर्फ घूमने-फिरने का नहीं है.
जंगलों में दिखे विदेशी हथियारबंद लोग
एजेंसियों के पास कुछ वीडियो और फोटो भी आए हैं, जिनकी जांच चल रही है। इनमें मिजोरम के जंगलों में कुछ विदेशी हथियारबंद लोग नजर आ रहे हैं. उनकी भाषा और बोलचाल स्थानीय नहीं लगती, जिससे शक और बढ़ गया है कि ये बाहर से आए लड़ाके हैं. सूत्रों का कहना है कि इनकी गतिविधियां वैसी ही हैं जैसी दूसरे देशों में विदेशी लड़ाकों की होती रही हैं.
नए अंतरराष्ट्रीय ग्रुप भी एक्टिव
पहले म्यांमार में कुछ संगठन खुद को सिर्फ मदद करने वाला बताते थे, लेकिन अब कुछ नए ग्रुप सामने आए हैं जो खुले तौर पर कह रहे हैं कि उनके साथ विदेशी लड़ाके हैं , कई लोगों को सीरिया और यूक्रेन की लड़ाई का अनुभव है और वे म्यांमार में ऑपरेशन में भी हिस्सा ले रहे हैं.
यूक्रेन कनेक्शन भी सामने आया
पकड़े गए लोगों में यूक्रेनी नागरिक मारियन स्टेफानकिव का नाम यूक्रेन के कुछ कट्टरपंथी संगठनों से जुड़ा रहा है. बताया जाता है कि स्टेफानकिव को डोनबास इलाके में लड़ाई का अनुभव है. हालांकि, इन बातों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
फंडिंग पर भी शक
जांच में ये भी सामने आया है कि अमेरिकी नागरिक मैथ्यू विदेशों में कुछ ईसाई संगठनों और धार्मिक ग्रुप्स से चंदा इकट्ठा कर रहा था. कहा जा रहा है कि ये पैसा सामाजिक और धार्मिक कामों के नाम पर लिया जाता था, लेकिन शक है कि इसका कुछ हिस्सा भारत-म्यांमार सीमा पर सक्रिय विद्रोही समूहों तक पहुंचाया गया.
एजेंसियों के सामने बड़े सवाल
अब जांच एजेंसियां कुछ अहम सवालों के जवाब ढूंढ रही हैं. क्या दान देने वाले लोगों को पता था कि उनका पैसा कहां जा रहा है? क्या मदद के नाम पर कोई बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क काम कर रहा है? और सबसे जरूरी क्या विदेशी लड़ाके भारत के रास्ते म्यांमार पहुंच रहे हैं? फिलहाल सभी पकड़े गए विदेशियों से पूछताछ जारी है और एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ी जोड़ने में लगी हुई हैं.
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