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जब शरीर का इम्यून सिस्टम ही दिमाग पर हमला कर दे, अचानक गायब हो सकती हैं यादें, बदल जाती है पूरी पर्सनालिटी

जरा सोचिए. एक दिन सब कुछ नॉर्मल है. काम, परिवार, दोस्त, रोजमर्रा की जिंदगी. लेकिन कुछ ही समय बाद यादें धुंधली पड़ने लगती हैं. पुरानी बातें भूलने लगते हैं, नई चीजें दिमाग में टिकती ही नहीं. आसपास के लोग कहते हैं उम्र का असर है या तनाव होगा. लेकिन कई बार वजह कुछ और ही होती है. ये वजह आपकी दिमाग से ही नहीं बल्कि ओवरऑल सेहत से जुड़ी हो सकती है. ये ऑटोइम्यून एन्सेफलाइटिस की स्थिति की वजह से भी हो सकता है. आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं.

जब शरीर का इम्यून सिस्टम ही दिमाग पर हमला कर दे, अचानक गायब हो सकती हैं यादें, बदल जाती है पूरी पर्सनालिटी
जब अचानक बदल जाता है किसी का बिहेवियर,अल्जाइमर नहीं ये बीमारी होती है वजह

What is Autoimmune Encephalitis : कभी सोचा है कि लाइफ एकदम स्मूथ चल रही हो और अचानक सब धुंधला होने लगे. मतलब कल क्या हुआ था वो याद नहीं आ रहा और आज जो सीख रहे हो वो दिमाग में रुक ही नहीं रहा. लोग कहेंगे कि 'भाई तू स्ट्रेस ले रहा है' या शायद रात भर रील स्क्रॉल करने का नतीजा है. पर क्या हो अगर असल विलेन आपका अपना शरीर ही हो. जी हां ये कोई साइ फाई मूवी का प्लॉट नहीं है बल्कि एक मेडिकल कंडीशन है जिसे ऑटोइम्यून एन्सेफलाइटिस (Autoimmune Encephalitis) कहते हैं.

आसान शब्‍दों में कहें तो जब आपकी अपनी बॉडी की डिफेंस टीम यानी इम्यून सिस्टम ही आपके दिमाग पर अटैक कर दे. जो एंटीबॉडीज वायरस और बैक्टीरिया से लड़ने के लिए बनी थीं वही गलती से आपके ब्रेन सेल्स को अपना दुश्मन मान बैठती हैं. इससे दिमाग में सूजन आ जाती है और फिर शुरू होता है असली ड्रामा. आपकी मेमोरी सोचने की ताकत और बिहेवियर सब कुछ टॉस पर चला जाता है.

इस हालत को ऑटोइम्यून एन्सेफलाइटिस कहते हैं. इसमें शरीर का डिफेंस मैकेनिज्म, जो आम तौर पर वायरस और बैक्टीरिया से लड़ता है, गलती से ब्रेन के सेल्स को निशाना बना लेता है. इससे दिमाग में सूजन आ जाती है और सबसे ज्यादा असर मैमोरी, बिहेवियर और सोचने की क्षमता पर पड़ता है.

सबसे डरावना पार्ट 

इस बीमारी का सबसे डरावना पार्ट ये है कि ये बहुत सडन होती है. एक हफ्ते पहले तक जो बंदा एकदम चिल था अचानक उसका बिहेवियर इतना अजीब हो जाता है कि घर वालों को लगता है इस पर किसी भूत प्रेत का साया है. इंसान वही होता है पर उसकी पर्सनैलिटी पूरी तरह बदल जाती है. पहले लोग इसे पागलपन या अल्जाइमर समझ लेते थे पर अब साइंस ने इसका राज खोल दिया है. ये सब उन जिद्दी एंटीबॉडीज का खेल है जो ब्रेन सेल्स को डैमेज करने लगती हैं.

इसके भी कई शेड्स हैं जैसे एंटी एनएमडीए रिसेप्टर एन्सेफलाइटिस. इसमें नई यादें बनाना ऑलमोस्ट इम्पॉसिबल हो जाता है. मजे की बात ये है कि कभी कभी महिलाओं में एक खास तरह के ओवेरियन सिस्ट की वजह से बॉडी ऐसे एंटीबॉडीज बनाने लगती है जो बाद में दिमाग की वाट लगा देते हैं.

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अच्छी खबर...

अच्छी खबर ये है कि अगर टाइम रहते पता चल जाए तो इसे फिक्स किया जा सकता है. डॉक्टर्स ब्लड टेस्ट या स्पाइनल फ्लूइड से इन एंटीबॉडीज को पकड़ लेते हैं. इलाज में हाई डोज स्टेरॉयड और प्लाज्मा एक्सचेंज जैसी थेरेपी से उन डेंजरस एंटीबॉडीज को बॉडी से बाहर निकाला जाता है. आजकल तो साइंटिस्ट ऐसी दवाओं पर ट्रायल कर रहे हैं जो इन एंटीबॉडीज को बनने से ही रोक देंगी.

मैसेज एकदम क्लियर है. अगर आपके किसी दोस्त या जानने वाले की याददाश्त अचानक कम हो रही हो या उसका बिहेवियर बिना वजह वियर्ड हो रहा हो तो उसे सिर्फ स्ट्रेस बोलकर इग्नोर मत करो. हो सकता है उसका अपना इम्यून सिस्टम ही उसका दुश्मन बन बैठा हो. सही वक्त पर डॉक्टर की सलाह इसे पूरी तरह ठीक कर सकती है.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

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