दिल की बीमारी दुनिया भर में मौत की मुख्य वजहों में से एक है. हालांकि ज्यादातर लोग जानते हैं कि ज्यादा चीनी और सैचुरेटेड फैट दिल की सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं, लेकिन ट्रांस फैट को सबसे नुकसानदायक फैट माना जाता है. अगर इसे थोड़ी मात्रा में भी रेगुलर खाया जाए, तो यह धीरे-धीरे आपकी धमनियों (आर्टरीज) को नुकसान पहुंचा सकता है और हार्ट अटैक का खतरा काफी बढ़ सकता है.
कई देशों ने इंडस्ट्रियल ट्रांस फैट पर रोक लगा दी है, फिर भी ये कुछ प्रोसेस्ड फूड, बेक्ड प्रोडक्ट्स और डीप-फ्राइड स्नैक्स में मिल सकते हैं. आइए जानते हैं कि ट्रांस फैट क्या है और यह आपके दिल पर कैसे असर डालता है.
ट्रांस फैट क्या है?
ट्रांस फैट एक तरह का अनसैचुरेटेड फैट है जो दो रूपों में पाया जाता है:
नेचुरल ट्रांस फैट: ये डेयरी प्रोडक्ट्स और जुगाली करने वाले जानवरों के मांस में थोड़ी मात्रा में पाए जाते हैं.
इंडस्ट्रियल ट्रांस फैट: ये वेजिटेबल ऑयल को आंशिक रूप से हाइड्रोजनेट करके बनाए जाते हैं ताकि प्रोडक्ट का टेक्सचर, शेल्फ-लाइफ और स्टेबिलिटी बेहतर हो सके. सेहत के लिए सबसे ज्यादा खतरा इसी इंडस्ट्रियल रूप से होता है.
फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल में एडल्ट कार्डियोथोरेसिक सर्जन और हेड एंड सीनियर कंसल्टेंट डॉ. समीर भाटे के अनुसार, ट्रांस फैट दिल की सेहत के लिए सबसे नुकसानदायक डाइटरी फैट में से एक हैं क्योंकि ये शरीर पर दोहरा हमला करते हैं.
ट्रांस फैट दिल को कैसे नुकसान पहुंचाते हैं?
दूसरे अनहेल्दी फैट के उलट, ट्रांस फैट कोलेस्ट्रॉल पर एक साथ दो तरह से बुरा असर डालते हैं.
LDL (खराब) कोलेस्ट्रॉल बढ़ाते हैं, जिससे धमनियों के अंदर प्लाक बनता है.
HDL (अच्छा) कोलेस्ट्रॉल कम करते हैं, जो आम तौर पर खून से अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को हटाने में मदद करता है.
डॉ. भाटे बताते हैं कि यह असंतुलन कोरोनरी आर्टरीज के अंदर फैटी जमाव को तेजी से बढ़ाता है. समय के साथ, ये प्लाक अस्थिर हो सकते हैं और फट सकते हैं, जिससे ब्लड क्लॉट बन सकता है जो दिल तक खून के बहाव को रोक देता है, और हार्ट अटैक का कारण बनता है.

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किन फूड्स में आमतौर पर ट्रांस फैट होता है?
इंडस्ट्रियल ट्रांस फैट अक्सर आंशिक रूप से हाइड्रोजनेटेड तेलों से बने फूड्स में मौजूद होते हैं. इनके कॉमन सोर्स हैं
- हाइड्रोजनेटेड वेजिटेबल ऑयल
- डीप-फ्राइड फूड्स
- कमर्शियल बेकरी प्रोडक्ट्स
- बिस्कुट
- केक और पेस्ट्री
- पैकेज्ड स्नैक्स
- कुछ फास्ट-फूड आइटम
- कुछ प्रोसेस्ड फ्रोजन फूड्स
क्योंकि ये प्रोडक्ट्स सस्ते होते हैं और इनकी शेल्फ-लाइफ ज्यादा होती है, इसलिए कई इलाकों में इनका बड़े पैमाने पर सेवन किया जाता है.
ट्रांस फैट इतना खतरनाक क्यों है?
सबसे बड़ी चिंताओं में से एक यह है कि ट्रांस फैट से तुरंत कोई लक्षण नहीं दिखते. डॉ. भाटे कहते हैं, "हो सकता है कि आप बिना किसी स्वास्थ्य समस्या के इन्हें नियमित रूप से खाते रहें, जबकि आपकी धमनियों को नुकसान चुपचाप सालों तक बढ़ता रहता है." उन बीमारियों के विपरीत जिनमें शुरुआती चेतावनी के संकेत मिलते हैं, ट्रांस फैट से धमनियों को होने वाला नुकसान अक्सर तब तक पता नहीं चलता जब तक कि यह गंभीर समस्याओं का कारण न बन जाए, जैसे:
- हार्ट अटैक
- स्ट्रोक
- पेरिफेरल आर्टरी डिजीज
WHO क्या कहता है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार:
इंडस्ट्रियल ट्रांस फैट का ज्यादा सेवन कोरोनरी हार्ट डिजीज का खतरा 21% तक बढ़ा देता है.
यह कोरोनरी हार्ट डिजीज से मौत का खतरा 28% तक बढ़ा देता है.
WHO ट्रांस फैट का सेवन टोटल डेली एनर्जी कंजम्पशन के 1% से कम रखने की सलाह देता है. हालांकि, डॉ. भाटे का कहना है कि क्लिनिकल नजरिए से, सबसे सुरक्षित तरीका इंडस्ट्रियल ट्रांस फैट से पूरी तरह बचना है.
किन्हें ज्यादा खतरा है?
हालांकि ट्रांस फैट सभी के लिए नुकसानदायक हैं, लेकिन कुछ लोगों को दिल की बीमारी होने का खतरा बहुत ज्यादा होता है. जैसे वो लोग जिनमें ये स्थितियां हैं.
- डायबिटीज
- मोटापा
- हाई ब्लड प्रेशर
- हाई कोलेस्ट्रॉल
- स्मोकिंग की आदत
- पहले से दिल की बीमारी
- परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास
ऐसे लोगों में, ट्रांस फैट की थोड़ी सी मात्रा भी धमनियों को नुकसान पहुंचाने की रफ्तार बढ़ा सकती है.
आप ट्रांस फैट से कैसे बच सकते हैं?
पैकेज्ड और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं.
डीप-फ्राइड स्नैक्स और कमर्शियली बेक किए गए सामान का सेवन कम करें.
घर का खाना खाएं.
हेल्दी फैट के ऑप्शन
- जैतून का तेल (Olive oil)
- सरसों का तेल
- नट्स (मेवे)
- बीज
- फैटी फिश
- एवोकाडो
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