जिम जाने वाले हर लड़के या लड़की का एक सपना होता है कि उनकी ताकत बढ़े और वो भारी वजन आसानी से उठा सके. लेकिन ज्यादातर लोग एक ही गलती करते हैं. वो जिम जाते ही पहले दिन से अपनी पूरी जान झोंक देते हैं. नतीजा क्या निकलता है. अगले तीन दिन तक बदन दर्द, चोट लगने का डर या फिर एक-दो महीने बाद प्रोग्रेस का रुक जाना. अगर आप भी इसी परेशानी से जूझ रहे हैं, तो जिम वेन्डलर का बनाया 5/3/1 वर्कआउट प्रोग्राम आपके बहुत काम आ सकता है.
ये कोई हवा-हवाई प्लान नहीं है, बल्कि दुनिया भर के पावरलिफ्टर्स और फिटनेस पसंद लोगों का आजमाया हुआ तरीका है. इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि इसमें आपको रोज अपनी आखिरी सांस तक जान नहीं लगानी पड़ती.
आखिर क्या है ये 5/3/1 वर्कआउट प्रोग्राम
5/3/1 एक ऐसा स्ट्रेंथ ट्रेनिंग प्लान है जो चार हफ्तों के चक्र यानी साइकिल पर चलता है. इसका पूरा ढांचा चार खास एक्सरसाइजेस पर टिका हुआ है, जिन्हें कंपाउंड मूवमेंट्स कहा जाता है. ये हैं:
- स्क्वैट (Squat)
- बेंच प्रेस (Bench Press)
- डेडलिफ्ट (Deadlift)
- ओवरहेड प्रेस (Overhead Press)
इस प्रोग्राम का नाम 5/3/1 इसलिए पड़ा क्योंकि इसमें अलग-अलग हफ्तों के दौरान 5, 3 और 1 रेप्स के सेट लगाए जाते हैं. सबसे मजेदार बात ये है कि इसमें आपको अपने 100 परसेंट मैक्सिमम वजन से शुरुआत नहीं करनी होती. इसकी जगह ये ट्रेनिंग मैक्स का इस्तेमाल करता है, जिससे आपके जोड़ और मांसपेशियां सुरक्षित रहती हैं.
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ये 4 हफ्तों का चक्कर काम कैसे करता है
मान लीजिए आपने आज से ये रूटीन शुरू किया. अब आपका महीना कुछ इस तरह बंटेगा:
पहला हफ्ता यानी 5s वाला हफ्ता
इस हफ्ते में मुख्य फोकस 5-5 रेप्स के सेट्स पर होता है. वजन हल्का से शुरू होकर भारी होता जाता है. आखिरी सेट थोड़ा भारी होता है, लेकिन इतना भी नहीं कि आप बिल्कुल पस्त हो जाएं.
दूसरा हफ्ता यानी 3s वाला हफ्ता
दूसरे हफ्ते में वजन थोड़ा और बढ़ जाता है और रेप्स घटकर 3 रह जाते हैं. यहां इंटेंसिटी बढ़ती है पर कंट्रोल हाथ में रहता है.
तीसरा हफ्ता यानी असली 5/3/1
ये इस रूटीन का सबसे भारी हफ्ता होता है. इसमें पहले 5 रेप्स, फिर वजन बढ़ाकर 3 रेप्स और फिर सबसे भारी वजन से 1 या उससे ज्यादा रेप्स लगाए जाते हैं. इसमें भी पूरा फोकस साफ और सही फॉर्म पर होता है.
चौथा हफ्ता यानी डीलोड हफ्ता
ये हफ्ता सबसे जरूरी है. इसे लोग अक्सर इगनोर कर देते हैं. इसमें वजन बहुत हल्का रखा जाता है ताकि पिछले तीन हफ्तों की थकान मिट सके और शरीर अगले महीने के लिए रिकवर हो जाए.
ट्रेनिंग मैक्स का क्या है
बहुत से भाई जिम में गलती करते हैं कि अगर उन्होंने किसी तरह 100 किलो की एक बेंच प्रेस मार ली, तो वो हर हफ्ते 100 किलो के हिसाब से हिसाब लगाने लगते हैं. 5/3/1 कहता है कि अपनी असल ताकत का सिर्फ 90 प्रतिशत हिस्सा ही अपना ट्रेनिंग मैक्स मानिए.
जैसे मान लो आप एक बार में 140 किलो का स्क्वैट लगा सकते हैं, तो आपका ट्रेनिंग मैक्स लगभग 126 किलो माना जाएगा. आगे के सारे सेट्स और परसेंट इसी 126 किलो से तय होंगे. इससे आपके कंधे, घुटने और कमर हमेशा सेफ रहते हैं और ईगो लिफ्टिंग से बचाव होता है.
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आम इंसान के लिए इसके क्या फायदे हैं
धीरे-धीरे और पक्की ताकत बढ़ना: इसे फिटनेस की भाषा में प्रोग्रेसिव ओवरलोड कहते हैं. जब आप धीरे-धीरे वजन बढ़ाते हैं, तो मसल्स को ग्रो करने का पूरा मौका मिलता है.
बड़ी मांसपेशियों पर काम : स्क्वैट और डेडलिफ्ट जैसी एक्सरसाइज आपके पूरे बदन को मजबूत बनाती हैं. इससे कमर का दर्द और रोजमर्रा की कमजोरी दूर होती है.
दिमाग पर कोई टेंशन नहीं : जिम जाकर ये सोचना नहीं पड़ता कि आज क्या लगाएं. आपके पास पहले से कॉपी या फोन में लिखा होता है कि आज कितने किलो वजन उठाना है.
रिकवरी का पूरा ध्यान : हफ्ते दर हफ्ते भारी वजन उठाने से नर्वस सिस्टम थक जाता है. डीलोड हफ्ता आपकी बॉडी को रीचार्ज कर देता है.
क्या नए लड़के इसे कर सकते हैं
अगर आप आज ही पहली बार जिम गए हैं, तो पहले डंबल और रॉड को सही तरीके से पकड़ना सीखें. जब आपकी फॉर्म ठीक हो जाए और आपको कंपाउंड लिफ्ट्स समझ आने लगे, तब इस प्लान पर आएं. नए लोगों को बस इस बात का ध्यान रखना है कि इसे कोई रेस न समझें. सही तकनीक से 40 किलो उठाना गलत तकनीक से 70 किलो उठाने से हजार गुना बेहतर है.
क्या इससे बॉडी या मसल्स भी बनती हैं
जी हां, बिल्कुल. जब आपकी ताकत बढ़ती है, तो मसल्स का साइज अपने आप बड़ा होता है. बहुत से लोग 5/3/1 के मेन सेट्स के बाद डंबल कर्ल्स, पुशअप्स या चिनअप्स जैसी एक्सेसरी एक्सरसाइज जोड़ लेते हैं. इससे ताकत के साथ-साथ शानदार बॉडी शेप भी मिल जाती है.
फेलियर तक जाना क्यों सही नहीं है
इंटरनेट पर आपने देखा होगा कि हर कोई कहता है 'ट्रेन टू फेलियर', यानी जब तक रॉड गिर न जाए तब तक करते रहो. 5/3/1 इस सोच के बिल्कुल खिलाफ है. भारी वजन के साथ बार-बार फेलियर तक जाने से इंजरी का खतरा 90 परसेंट बढ़ जाता है. समझदारी इसी में है कि आखिरी रेप ऐसा हो जिसमें आपका कंट्रोल बना रहे.
ध्यान रखने वाली कुछ जरूरी बातें
- कोई भी वर्कआउट प्लान जादू की पुड़िया नहीं होता. आपकी डाइट, 7 से 8 घंटे की नींद और पानी पीने की आदत सबसे ज्यादा मायने रखती है.
- अगर किसी जोड़ में खिंचाव या तेज दर्द महसूस हो, तो जबरदस्ती वर्कआउट पूरा न करें. तुरंत रुक जाएं.
- वजन बढ़ाने की जल्दी में अपनी फॉर्म कभी खराब न करें.
Fitness Expert क्या कहते हैं?
फिटनेस एक्सपर्ट्स के अनुसार स्ट्रेंथ ट्रेनिंग में सबसे बड़ी गलती जल्दी रिजल्ट पाने की कोशिश करना है. 5/3/1 वर्कआउट प्रोग्राम धीरे-धीरे वजन बढ़ाने और सही रिकवरी पर जोर देता है, जिससे लंबे समय तक ताकत और मसल्स दोनों बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
सीधी बात ये है कि जिम में रोज अपनी छाती पीटकर खुद को साबित करने की जरूरत नहीं होती. महीनों और सालों तक टिके रहकर धीरे-धीरे वजन बढ़ाना ही असली फिटनेस है. 5/3/1 आपको यही सब्र और अनुशासन सिखाता है.
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