आजकल बढ़ते प्रदूषण के कारण श्वांस नली में जलन, खांसी, जुकाम, गले में खराश और सांस लेने में तकलीफ जैसी शिकायतें आम हो गई हैं. इन समस्याओं से लड़ने के लिए कारगर उपाय हमारी दैनिक दिनचर्या की सरल आदतों में ही छिपे हैं. भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर श्वसन प्रणाली को मजबूत बनाया जा सकता है और प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों से बचा जा सकता है.
आयुष मंत्रालय ने श्वसन स्वास्थ्य के लिए कुछ प्रैक्टिकल और सरल उपाय सुझाए हैं.
1. गरारे करना-
पहला उपाय है गर्म खारे पानी से गरारे करना. इससे गले की जलन, खराश और संक्रमण कम होता है. रोजाना सुबह-शाम गुनगुने पानी में नमक मिलाकर गरारे करने से प्रदूषण के कण गले में जम नहीं पाते और सांस की नली साफ रहती है.
2. हर्बल टी-
दूसरा उपाय है अदरक, तुलसी और काली मिर्च की हर्बल चाय पीना. यह चाय इम्यूनिटी बढ़ाती है और सांस की तकलीफ को दूर करती है. अदरक सूजन कम करता है, तुलसी एंटी-वायरल गुणों से भरपूर है और काली मिर्च बलगम को पतला करती है. रोज एक-दो कप यह चाय पीने से ठंड, खांसी और प्रदूषण के असर से राहत मिल सकती है.

3. भाप लेना-
तीसरा आसान तरीका है कंजेशन (नाक बंद होना) के लिए भाप लेना. गर्म पानी में कुछ बूंदें यूकेलिप्टस ऑयल या सादा पानी लेकर भाप लें. इससे नाक और छाती की जकड़न खुलती है, बलगम बाहर निकलता है और सांस लेना आसान हो जाता है. यह प्रदूषण से होने वाली एलर्जी और साइनस की समस्या में बहुत फायदेमंद है.
4. धुएं से दूर-
चौथा महत्वपूर्ण सुझाव है घर के अंदर कचरा या अगरबत्ती जलाने से बचना. अगरबत्ती और कचरा जलाने से घर के अंदर धुआं फैलता है, जो बाहर के प्रदूषण से भी ज्यादा नुकसानदेह होता है. इससे फेफड़ों पर बोझ पड़ता है और सांस की बीमारियां बढ़ सकती हैं. घर को हवादार रखें और ऐसे धुएं से दूर रहें.
नोटः ये सभी उपाय बेहद सरल और घरेलू हैं. इन्हें अपनाने से प्रदूषण के कारण होने वाली सांस की समस्याएं जैसे खांसी, अस्थमा आदि को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. समस्या ज्यादा होने पर डॉक्टर से परामर्श जरूर लें.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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