Testicular Torsion: भारतीय बल्लेबाज तिलक वर्मा को 8 जनवरी 2026 को राजकोट में टेस्टिकुलर टॉर्शन के कारण इमरजेंसी सर्जरी करानी पड़ी. इस वजह से उनके न्यूज़ीलैंड के खिलाफ आगामी टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज और अमेरिका के खिलाफ भारत के पहले टी20 वर्ल्ड कप मैच से बाहर रहने की आशंका है. 23 साल के तिलक वर्मा को अचानक पेट में तेज दर्द हुआ, जिसके बाद टेस्टिकुलर टॉर्शन की पुष्टि हुई और तुरंत उनकी सर्जरी की गई. डॉक्टरों ने उन्हें 2–4 हफ्ते के आराम की सलाह दी है.
क्या है टेस्टिकुलर टॉर्शन?
टेस्टिकुलर टॉर्शन एक गंभीर मेडिकल कंडीशन है, जिसमें शुक्रवाहिका (spermatic cord) मुड़ जाती है और अंडकोष में रक्त प्रवाह रुक जाता है. समय पर सर्जरी न होने पर स्थायी नुकसान, बांझपन या अंडकोष खोने का खतरा हो सकता है, इसलिए इसका तुरंत इलाज बेहद जरूरी होता है. विशेषज्ञों के मुताबिक, सर्जरी के बाद रिकवरी में 2–4 हफ्ते लगते हैं. समय रहते इलाज हो जाने से अंडकोष सुरक्षित रहता है. बता दें कि टेस्टिकुलर टॉर्शन एथलीट्स में दुर्लभ माना जाता है और 25 साल से कम उम्र के लगभग 4,000 पुरुषों में से 1 को प्रभावित करता है.
टेस्टिकुलर टॉर्शन क्यों होता है?
मेडिकल रिसर्च के अनुसार, टेस्टिकुलर टॉर्शन के पीछे कई कारण हो सकते हैं-
- जन्मजात संरचना (Bell Clapper Deformity)
- अचानक फिजिकल एक्टिविटी या एक्सरसाइज
- खेल के दौरान चोट लगने से
- सोते समय अचानक करवट बदलने से
- ठंडे मौसम में अंडकोष का सिकुड़ना भी इसका एक कारण हो सकता है.
American Urological Association (AUA) के अनुसार, जिन पुरुषों में Bell Clapper Deformity होती है, उनमें टेस्टिकुलर टॉर्शन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. (https://www.ncbi.nlm.nih.gov/books/NBK448199/)
कितनी उम्र में ज्यादा खतरा?
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रिसर्च बताती है कि-
- यह समस्या 12 से 25 साल के युवाओं में सबसे ज्यादा देखी जाती है.
- हर साल लगभग 1 में से 4,000 पुरुष इस स्थिति से प्रभावित होते हैं.
- एथलीट्स और एक्टिव लाइफस्टाइल वालों में इस बीमारी का रिस्क थोड़ा ज्यादा माना जाता है.
टेस्टिकुलर टॉर्शन के लक्षण
टेस्टिकुलर टॉर्शन के लक्षण अचानक और तेज होते हैं-
- अंडकोष में अचानक तेज दर्द.
- पेट के निचले हिस्से में दर्द होना.
- मतली और उल्टी होना.
- अंडकोष में सूजन या रेडनेस.
- एक अंडकोष का ऊपर की ओर खिंच जाना.
- कुछ मामलों में बुखार भी आ जाता है.
समय पर इलाज क्यों जरूरी है?
Cleveland Clinic & British Medical Journal में हुई एक रिसर्च के अनुसार-
- 6 घंटे के अंदर सर्जरी हो जाती है तो 90–95% अंडकोष सुरक्षित रहता है.
- 12 घंटे बाद इसका सक्सेस रेट 50% तक होता है.
- 24 घंटे बाद अंडकोष बचने की संभावना बेहद कम हो जाती है.
इलाज में देरी होने पर
- अंडकोष को निकालना पड़ सकता है.
- भविष्य में इनफर्टिलिटी (बांझपन) का खतरा बढ़ सकता है.
- हार्मोनल असंतुलन हो सकता है.
- मेंटल स्ट्रेस हो सकता है.
टेस्टिकुलर टॉर्शन का इलाज क्या है?
1. इमरजेंसी सर्जरी (Orchiopexy)
इस केस में सबसे ज्यादा प्रभावी इलाज है इसक तुरंत सर्जरी करना ऐसा करने से मुड़ी हुई शुक्रवाहिका को सीधा किया जाता है. दोनों अंडकोष को सर्जरी से फिक्स किया जाता है. भविष्य में टॉर्शन दोबारा न हो, इसका ध्यान रखा जाता है
2. मैनुअल डिटॉर्शन (कुछ केस में)
कुछ स्पेशल कंडीशन में डॉक्टर हाथ से टॉर्शन खोलने की कोशिश करते हैं, लेकिन यह इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं है.
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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