विज्ञापन

क्रिकेटर तिलक वर्मा की वजह से चर्चा मे आई टेस्टिकुलर टॉर्शन, जानिए क्या है और कैसे ये दर्द छीन सकता है पिता बनने का सपना

हाल ही में क्रिकेटर तिलक वर्मा की बीमारी के बाद जिस समस्या पर काफी चर्चा हुई, वह हर साल भारत में लाखों लड़कों और पुरुषों को प्रभावित करती है.

क्रिकेटर तिलक वर्मा की वजह से चर्चा मे आई टेस्टिकुलर टॉर्शन, जानिए क्या है और कैसे ये दर्द छीन सकता है पिता बनने का सपना
ये दर्द छीन सकता है पिता बनने का सपना, टेस्टिकुलर टॉर्शन को हल्के में न लें

Testicular Torsion: अगर आप भविष्य में पिता बनना चाहते हैं, तो यह जानकारी होना बहुत जरूरी है. हाल ही में क्रिकेटर तिलक वर्मा की बीमारी के बाद जिस समस्या पर काफी चर्चा हुई, वह हर साल भारत में लाखों लड़कों और पुरुषों को प्रभावित करती है. दुख की बात यह है कि जानकारी की कमी, शर्म और देर से इलाज की वजह से कई मामलों में एक टेस्टिस यानी अंडकोष तक गंवाना पड़ जाता है. इस बीमारी का नाम है टेस्टिकुलर टॉर्शन, और इसमें समय ही सबसे बड़ा इलाज है.

टेस्टिकुलर टॉर्शन क्या है? (What is Testicular Torsion?)

टेस्टिस एक स्पर्मेटिक कॉर्ड से जुड़ा होता है, जिससे खून की सप्लाई होती है. कभी-कभी यह कॉर्ड अचानक मुड़ जाता है, जिससे टेस्टिस तक खून पहुंचना रुक जाता है. इसी स्थिति को टेस्टिकुलर टॉर्शन कहा जाता है. अगर समय रहते इलाज न मिले, तो टेस्टिस को स्थायी नुकसान हो सकता है.

किस उम्र में ज्यादा खतरा? (Who is at higher risk?)

यह समस्या ज्यादातर 10 से 18 साल की उम्र में देखी जाती है, हालांकि यह यह किसी भी उम्र में हो सकती है. बच्चों से लेकर वयस्क पुरुषों तक. भारत में देर से इलाज होने पर टेस्टिस खोने का खतरा करीब 7 गुना ज्यादा बताया जाता है.

पहले 6 घंटे क्यों हैं सबसे अहम? (Why are the first 6 hours critical?)

अगर दर्द शुरू होने के पहले 6 घंटे के अंदर अस्पताल पहुंच जाएं, तो करीब 90% मामलों में टेस्टिस को बचाया जा सकता है. देरी होने पर यह संभावना तेजी से घटती जाती है.
 

इसके मुख्य लक्षण क्या हैं? (Key Symptoms to watch out for)

  • टेस्टिस में अचानक और बहुत तेज दर्द
  • दर्द का पेट के निचले हिस्से तक फैलना
  • सूजन और छूने पर ज्यादा दर्द
  • टेस्टिस की पोजीशन का असामान्य लगना
  • मतली या उल्टी
  • इनमें से कोई भी लक्षण दिखे तो एक सेकंड भी न गवाएं.


भारत में देर क्यों होती है? (Why treatment gets delayed in India?)

किशोर उम्र में कई बच्चे शर्म, डर या गिल्ट की वजह से किसी को बताते नहीं हैं. स्कूलों में रिप्रोडक्शन से जुड़े टॉपिक अक्सर स्किप कर दिए जाते हैं, जिससे सही जानकारी नहीं मिल पाती. नतीजा दर्द सहते रहना और देर से अस्पताल पहुंचना.

क्या करें और क्या न करें? (What to do and what not to do?)

  • तेज दर्द हो तो सीधे इमरजेंसी में जाएं
  • किसी घरेलू इलाज या इंतजार के चक्कर में न पड़ें
  • माता-पिता और युवाओं के बीच खुली बातचीत जरूरी है

टेस्टिकुलर टॉर्शन कोई दुर्लभ बीमारी नहीं है, लेकिन सही समय पर सही कदम न उठाया जाए तो इसका असर जिंदगी भर रह सकता है. थोड़ी सी जानकारी, खुलकर बात करने की आदत और समय पर इलाज, यह तीन चीजें न सिर्फ एक टेस्टिस, बल्कि भविष्य को भी बचा सकती हैं.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com