क्या आप भी उन लोगों में से हैं जिन्हें मछली (Fish) खाना बहुत पसंद है? अगर आपका जवाब हां है, तो यह आर्टिकल आपके लिए है. जब हम बाजार में मछली खरीदने जाते हैं, तो हमारा ध्यान सिर्फ उसके स्वाद या कीमत पर होता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी प्लेट तक पहुंचने वाली मछली आपकी सेहत के लिए कितनी खतरनाक हो सकती है? जी हां आपने बिल्कुल सही सुना.
हम बात कर रहे हैं थाई मांगुर (Thai Mangur) या अफ्रीकी कैटफिश (African Catfish) की. यह एक ऐसी मछली है जिसे भारत में साल 2000 में ही नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा पूरी तरह बैन कर दिया गया था. इसके बावजूद, देश के कई हिस्सों में इसकी चुपचाप खेती और बिक्री आज भी धड़ल्ले से जारी है. हाल ही नागपुर में प्रतिबंधित थाई मांगुर मछली पालन के खिलाफ प्रशासन का सख्त रूख देखने को मिला. एक बड़े जॉइंट ऑपरेशन में 36 टन यानी 360 क्विंटल मछली को जब्त कर 8 फीट गहरे गड्ढे में वैज्ञानिक तरीके से जमींदोज कर दिया गया.
आइए जानते हैं कि आखिर सरकार ने इस मछली पर रोक क्यों लगाई है और इसे खाना आपकी सेहत के लिए क्यों खतरनाक है.
आखिर क्या है थाई मांगुर और यह इतनी खतरनाक क्यों है?
थाई मांगुर मूल रूप से अफ्रीका की कैटफिश प्रजाति (Clarias gariepinus) है. इसे भारत में तेजी से बढ़ने और ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए लाया गया था. यह मछली इतनी मजबूत होती है कि यह बहुत गंदे पानी में, कीचड़ में और बिना ज्यादा ऑक्सीजन के भी आसानी से जिंदा रह सकती है.
लेकिन इसकी यही खूबी हमारे पर्यावरण और हमारी सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गई है.
1. गंदा खाना और खतरनाक टॉक्सिन्स-
सामान्य मछलियां तालाब के प्राकृतिक जीवों और साफ चीजों को खाकर बड़ी होती हैं. लेकिन इसके विपरीत, थाई मांगुर को पालने वाले लोग इसे बहुत ही गंदा खाना खिलाते हैं. इसे फैक्ट्रियों का कचरा, सड़ा हुआ मांस, मुर्गीखानों का बेकार कचरा और सड़ी हुई चीजें खिलाई जाती हैं. यह मछली बहुत गंदे और प्रदूषित पानी में रहती है, इसलिए इसके शरीर में लेड, मर्करी जैसे खतरनाक भारी धातु (Heavy Metals) और जहरीले तत्व जमा होने लगते हैं. जब कोई इंसान इस मछली को खाता है, तो ये सारे टॉक्सिन्स उसके शरीर के अंदर पहुंच जाते हैं, जिससे कई बीमारियां हो सकती हैं.
2. पर्यावरण को नुकसान-
थाई मांगुर एक बहुत ही आक्रामक और भूखी शिकारी मछली है. यह पानी में मौजूद बाकी सभी छोटी और देसी मछलियों को खा जाती है. इसके आने से हमारे तालाबों और नदियों की मूल और शुद्ध मछलियां धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं.
यह मछली पानी के तल में कीचड़ को खोदती रहती है, जिससे पानी बहुत गंदा हो जाता है और दूसरे जलीय जीवों के लिए सांस लेना मुश्किल हो जाता है.
3. सेहत के लिए खतरा-
अगर आप सोचते हैं कि पकाने के बाद इसके सारे कीटाणु मर जाते हैं, तो आप गलत हैं. इस मछली में मौजूद टॉक्सिन्स और केमिकल इतनी आसानी से खत्म नहीं होते. इसे खाने से पेट की गंभीर बीमारियां, एलर्जी, स्किन के रोग और लंबे समय में कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियां होने का खतरा रहता है. शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) भी कमजोर हो सकती है.
कानून सख्त है, फिर भी बेची जा रही-
कानूनी रूप से बैन होने के बावजूद, ज्यादा मुनाफे के लालच में कुछ लोग आज भी इसकी अवैध रूप से खेती कर रहे हैं. सरकार और प्रशासन समय-समय पर इस पर छापे मारते हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण लोग सस्ते दाम के चक्कर में इसे खरीद लेते हैं.

आपको क्या करना चाहिए?
जब भी आप मछली खरीदने जाएं, तो अच्छी तरह जांच लें कि वह देसी मछली है या नहीं. दुकानदार से पूछें और थाई मांगुर या किसी भी अनजान दिखने वाली कैटफिश को खरीदने से बचें. आपकी थोड़ी सी सावधानी आपको और आपके पूरे परिवार को गंभीर बीमारियों से बचा सकती है.
क्या कहती है रिसर्च-
Environmental and Health Impacts of Invasive Alien Fish Species (Clarias gariepinus) की इस रिसर्च में बताया गया है कि कैसे अफ्रीकी कैटफिश जलीय प्रदूषण को बढ़ाती है और इसे खाने से शरीर में टॉक्सिन्स (Toxic buildup) का खतरा कैसे पैदा होता है.
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