बीते कुछ समय से लोगों के बीच एनर्जी ड्रिंक का क्रेज काफी ज्यादा बढ़ गया था. बड़ों से लेकर बच्चे भी इसको बड़े मजे से पी रहे थे. लेकिन हाल ही में एनर्जी ड्रिंक्स को बैन करने की मांग सामने आई है. सिर्फ इतना ही नहीं FSSAI ने भी रेड बुल, पेप्सिको इंडिया और कैम्पा जैसे देश के कई बड़े ब्रैंड को नोटिस जारी किया है. एफएसएसएआई का कहना था कि इन प्रोडक्ट के लेबल पर एनर्जी ड्रिंक शब्द का इस्तेमाल कर के कंज्यूमर को कथित तौर पर गुमराह किया जा रहा है. वहीं कई हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका सेवन कई बीमारियों का कारण बन सकता है.
FSSAI के पूर्व डायरेक्टर प्रदीप चक्रोवर्ती ने भी इसका सेवन ना करने की सलाह दी थी. क्योंकि ये सेहत के लिए नुकसानदायक है. उन्होंने PTI को दिए एक इंटरव्यू में एनर्जी ड्रिंक्स के सेवन और इसके नुकसान पर बात की, उन्होंने कहा,
एनर्जी ड्रिंक्स के लिए लिमिट हमेशा से एक अहम बात रही है. जब एनर्जी ड्रिंक्स के नियम अपनाए गए थे, तब मैं FSSAI में प्रोडक्ट अप्रूवल का डायरेक्टर था. जब हमने 5 अगस्त 2011 को FSS एक्ट 2006 लागू करना शुरू किया, तो हमारे पास कैफीन वाले ड्रिंक्स या एनर्जी ड्रिंक्स के लिए कोई स्टैंडर्ड नहीं थे. लेकिन FSSAI ने एनर्जी ड्रिंक्स की सेफ्टी की जांच के लिए एक एक्सपर्ट ग्रुप बनाया था, क्योंकि कैफीन को लंबे समय से कैंसर का कारण (कार्सिनोजेनिक) माना जाता रहा है. एक्सपर्ट ग्रुप ने कैफीन वाले ड्रिंक्स की सेफ्टी पर स्टडी की और सुझाव दिया कि कोई भी कंज्यूमर ज़्यादा से ज़्यादा 320 ppm (यानी 320 मिलीग्राम प्रति लीटर) कैफीन का इस्तेमाल कर सकता है. लेकिन बाद में, हमारे साइंटिफिक पैनल ने इसे घटाकर 300 मिलीग्राम प्रति लीटर कर दिया, ताकि यह पक्का किया जा सके कि कैफीन, कैफीन वाले ड्रिंक्स या एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन पूरी तरह से सुरक्षित हो, क्योंकि एनर्जी ड्रिंक्स कॉलेज के छात्रों और पार्टी करने वालों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं. इसलिए, उन्हें जरूरत से ज्यादा कैफीन का सेवन नहीं करना चाहिए. इसलिए इसे 300 मिलीग्राम प्रति लीटर प्रति दिन तक सीमित कर दिया गया है. तो, कैफीन की मात्रा मुख्य चिंता का विषय है. साथ ही, लेबलिंग में भी हमने कुछ सावधानियां जोड़ी हैं, जैसे कि एक दिन में 500 ml से ज्यादा कैफीन वाले ड्रिंक्स या एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन न करें, और यह स्तनपान कराने वाली और गर्भवती महिलाओं और बहुत ज़्यादा संवेदनशील (हाइपरसेंसिटिव) लोगों के लिए ठीक नहीं है। तो, FSSAI के मुख्य उद्देश्य या चिंताएं यही हैं.
ये हाई कैफीन ड्रिंक्स सच में शरीर को तुरंत एनर्जी देती हैं या फिर ये आपके शरीर को किस तरह से नुकसान पहुंचाती हैं आइए जानते हैं.
हार्ट की बीमारी से लेकर स्ट्रोक तक का खतरा
PUBMed में छपी एक रिसर्च बताती है कि एनर्जी ड्रिंक का सेवन हाई बीपी की वजह बन सकता है. इसको पीने से साइनस टैकीकार्डिया और हाई बीपी जैसी समस्या हो सकती है. इसके साथ ही इसका असर हार्ट पर भी हो सकता है. एनर्जी ड्रिंक्स में कैफीन और शुगर की अधिक मात्रा पाई जाती है जो हार्ट रेट को बढ़ा सकती है. अचानक से बीपी का बढ़ा सकती है जिस वजह से बेचैनी जैसी कई दूसरी समस्याएं हो सकती हैं. इसके साथ ही इनका सेवन नींद ना आने की समस्या, दांतों को खराब करने, मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा भी बढ़ा सकता है.
PUBMed में छपी एक दूसरी रिसर्च में बताया गया कि एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन शरीर के किन अंगों पर बुरा असर डालती हैं. इसका सेवन करने से घबराहट, पेट खराब होना या पेट में किसी तरह की गड़बड़ी और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. एनर्जी ड्रिंक का सेवन करने से अंगों के खराब होने का रिस्क भी बढ़ जाता है. एक्यूट किडनी इंजरी वेंट्रिकुलर फाइब्रिलेशन, दौरे पड़ना, एक्यूट मेनिया और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं.
स्टडी में ये भी कहा गया कि एनर्जी ड्रिंक्स का सेवन की वजह से कई मौत के मामले भी सामने आए हैं. नेशनल हेल्थ एंड न्यूट्रिशन एग्जामिनेशन सर्वे के डेटा पर नजर डालें तो इससे पता लगता है कि हर रोज युवा औसतन 61 मिलीग्राम कैफीन का सेवन कर लेते हैं. बीते कुछ समय से एनर्जी ड्रिंक पीने वाले की संख्या काफी तेजी से बढ़ गई है. स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों से लेकर बड़े तक इसका सेवन कर रहे हैं.
क्यों पहुंचाती है नुकसान
- एनर्जी ड्रिंक्स को बनाने के लिए कई तरह के केमिकल मिलाए जाते हैं.
- इनमें चीनी की मात्रा बहुत अधिक होती है. इसलिए इसका सेवन करने से कई तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
- इसके साथ ही इन ड्रिंक्स का सेवन करने की लत भी लग जाती है.
- लत लगने की वजह है इसमें पाया जाने वाला शुगर और कैफीन जो डोपामाइन को बूस्ट करता है शरीर को इसकी लत लग जाती है.
हालांकि ये ड्रिंक्स ना तो शरीर को एनर्जी देती हैं और ना ही किसी तरह से भी सेहत के लिए फायदेमंद हैं.
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