गर्मियों और बरसात के मौसम में अक्सर बालकनी, खिड़की या घर के किसी कोने में मधुमक्खी या फिर पीली ततैया अपना छत्ता बनाना शुरू कर देती हैं. जब ये छोटा होता है तो इस पर ध्यान नहीं जाता है. लेकिन जैसे-जैसे ये बड़ा होता जाता है तो फिर इनके काटने का डर भी लगा रहता है.
आज हम बात कर रहे हैं पीली ततैया कि जिसके छत्ते को देखकर इससे कोई नुकसान होने से पहले ही इसको हटाने का ख्याल दिमाग में आ जाता है. सोशल मीडिया पर भी की तरह के वीडियो और घरेलू नु्स्खे आपको मिल जाएंगे जिनमें इस छत्ते को नष्ट करने के सैकड़ों तरीके बताए जाते हैं.
लेकिन क्या आपने इनको हटाने से पहले कभी ये सोचा है कि आखिर ये ततैया या मधुमक्खियां केवल डंक मारने वाले कीड़े नहीं हैं. बल्कि ये हमारे नेचर को बैलेंस बनाए रखने में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं.
आज हम आपको बताएंगे ततैया के छत्ते को भगाने का तरीका इसके साथ ही इनसे जुड़े कुछ ऐसा सवाल जिनका जवाब हर किसी को पता होना चाहिए.
ततैया और मधुमक्खी एक ही होती है?
ततैया और मधुमक्खी दोनों एक नहीं होती हैं. ये दोनों दिखने में एक जैसी लग सकती हैं. लेकिन इन दोनो में ही डिफरेंस होता है.
क्या करती हैं मधुमक्खियां
जो शहद हम खाते हैं वो मधुमक्खियां आमतौर पर फलों के रस को इकट्ठा कर के बनाती हैं.
क्या करती हैं ततैया
वहीं बात करें ततैया की तो ये पीले रंग की होती हैं और ये ज्यादा आक्रामक मानी जाती हैं. ये दूसरे कीड़ों का शिकार करती हैं और इनका छत्ता मधुमक्खी के छत्ते से साइज और बनावट में काफी अलग होता है.
बालकनी से कैसे हटाएं ततैया का छत्ता?
ततैया का छत्ता हटाने के लिए घरेलू नुस्खों की बात करें तो इसके लिए पानी और पुदीने के तेल को या फिर साबुन वाली पानी को छत्ते पर स्प्र किया जाता है. ऐसा कहा जाता है कि इसकी महक से ततैया भाग जाती हैं या उस जगह को छोड़ देती हैं.
हालांकि अगर ततैया का छत्ता बड़ा है तो इसको खुद हटाने की कोशिश करने से बचना चाहिए. आप इसके लिए पेस्ट कंट्रोल एक्सपर्ट को बुलाकर इसको हटा सकते हैं.
इन बातों का रखें ध्यान
- जिस समय छत्ते में ततैया ज्यादा दिखें और दिन के समय उसको छेड़ने से बचना चाहिए.
- जिस जगह पर छत्ता लगा है उस जगह से बच्चों और पालतू जानवरों को दूर रखें.
ये तो बात हो गई ततैया के छत्ते से छुटकारा पाने की, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ततैया नेचर के लिए भी बेहद जरूरी होती हैं? अक्सर लोग इनको देखकर डर जाते हैं या फिर परेशान होते हैं, लेकिन असल में ये हमारे नेचर के लिए बेहद जरूरी पार्ट निभाती हैं.
रिसर्चगेट में पब्लिश एक पेपर में ततैया के परागणकर्ता के तौर पर उसके महत्व को भी बताया गया है. अमूमन लोगों को लगता है कि सिर्फ मधुमक्खी ही परागणकर्ता है. लेकिन असल में ऐसा नहीं है.
क्या होता है परागण?
सरल शब्दों में समझें तो परागण का मतलब होता है, पौधों के बच्चा पैदा करने का तरीका. अगर परागण नहीं होगा तो फूल मुरझा जाएगा, फल खत्म हो जाएगा. बीज नहीं बनेंगे और फसल नहीं उगेगी. सीधे शब्दों में परागण से ही नए फल, सब्जी और बीज बनते हैं.
प्रकृति के लिए ततैया के 5 बड़े योगदान
- परागण- कई तरह के पौधों पर जाती है. अंजीर और आर्किड जैसे कुछ ऐसे पौधे भी हैं जो सिर्फ ततैया द्वारा ही परागित होते हैं.
- पौधों को नुकसान पहुंचाने वाले कीड़ों को नष्ट करती हैं. कैटरपिलर, मक्खी, टिड्डे के लार्वा को खा जाती हैं जो फसल को नुकसान पहुंचाते हैं.
- मरे हुई कीड़ों को खा जाती हैं.
- फूड चेन को बैलेंस करने में भी है मददगार. मेढ़क, चिड़िया और मकड़ी इसको खा जाते हैं.
- जमीन में बिल बनाती हैं. जिस वजह से मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है.
अगर ततैया खत्म हो जाएंगी तो क्या होगा?
- अगर ततैया पूरी तरह से खत्म हो जाएंगी तो कई तरह के फल नहीं उगेंगे जैसे अंजीर.
- फसल खराब करने वाली कीड़ों को मारने के लिए केमिकल डालना पड़ेगा. क्योंकि ये नेचुरली तौर पर खत्म नहीं होंगे.
- कई जंगली पौधे नहीं उग पाएंगे.
- कई जीवों का खाना कम हो जाएगा.
यानी ततैया प्राकृतिक तौर पर कीटों के नियंत्रण में मदद करती है.
ततैया के काटने पर क्या करें?
अगर ततैया ने काट लिया है तो आप जिस जगह पर उसने डंक मारा है उस जगह को अच्छी तरह से धोकर साफ कर लें. फिर उस जगह की बर्फ से सिकाई करें. कुछ देर में राहत मिल सकती है.
कई लोगों को इनसे एलर्जी होती है. ऐसी कंडीशन में फौरन डॉक्टर के पास जाएं और इलाज करें.
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में भी ततैया के जहर में मौजूद रासायनिक तत्वों का इस्तेमाल चिकित्सा क्षेत्र, जैविक अनुसंधानों और नैनोप्रौधोगिकी में कैसे किया जाएगा इस पर शोध हुआ है.
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