Sonam Wangchuk Hunger Strike Health Update: दिल्ली के जंतर मंतर पर देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य को लेकर जारी आंदोलन अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच चुका है. आज उनकी भूख हड़ताल का 18वां दिन है. लंबे समय तक खाना न खाने की वजह से उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही है. रोजाना डॉक्टर की टीम उनका मेडिकल टेस्ट करते हैं, लेकिन लंबे समय से अनशन के कारण सोनम वांगचुक की हालत खराब होती जा रही है.
जिसके बाद उनकी हेल्थ को देखते हुए एक नई चर्चा शुरू हो गई है, राजनीतिक उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हड़ताल के दौरान उनका करीब 8.2 किलो वजन कम हो चुका है, उनका ब्लड ग्लूकोज स्तर 67 mg/dL तक पहुंच गया है, जबकि कल यानि 17 वें दिन पर उनका ब्लड प्रेशर 107/70 mm Hg दर्ज किया गया है.
अनशन के कारण सोनम वांगचुक के शरीर पर बेहद गंभीर असर पड़ा है. मेडिकल रिपोर्ट्स और प्रदर्शन के आयोजकों के मुताबिक, पिछले 16-17 दिनों में सोनम वांगचुक का वजन 8 किलोग्राम से अधिक घट चुका है. उनका ब्लड शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर लगातार नीचे गिर रहा है, जिसके कारण उन्हें अत्यधिक कमजोरी और चक्कर आने की शिकायत हो रही है. डॉक्टरों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए है, लेकिन स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है.
असल में इतने लंबे समय तक भूखा रहना शरीर पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है. क्या हो अगर कोई व्यक्ति 17 दिन जितने या इससे लंबे समय तक भूखा रहे, इससे उसके शरीर पर क्या असर पड़ता है? आइए, इसे 3-3 दिन के अंतराल में समझते हैं.
10 दिन या लंबे समय तक भूखा रहने से क्या होता है, शरीर पर पड़ता है कैसा असर?
1 से 3 दिन: शरीर जमा ऊर्जा का इस्तेमाल करता है
जब एक इंसान खाना बंद कर देता है, तो शुरुआत में शरीर पहले से मौजूद एनर्जी का इस्तेमाल करता है. पहले दिन तक शरीर को ज्यादा परेशानी नहीं होती, लेकिन 2 से 3 दिन बीतने के बाद जब एनर्जी कम होने लगती है, तो बार-बार भूख लग सकती है, कमजोरी महसूस हो सकती है, सिर दर्द और चक्कर आने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. कई लोगों में चिड़चिड़ापन और थकान भी बढ़ने लगती है.
4 से 6 दिन: शरीर फैट बर्न करने लगता है
जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ते हैं, तो शरीर में ग्लाइकोजन लगभग खत्म हो जाता है, ऐसे मामले में शरीर एनर्जी लेने के लिए जमा चर्बी का इस्तेमाल करना शुरू कर देता है, जिससे न सिर्फ वजन तेजी से घटने लगता है, बल्कि कई लोगों को मुंह से बदबू आना, थकावट महसूस होना और काम में ध्यान लगाने में परेशानी होने लगती है.
7 से 9 दिन: कमजोरी बढ़ने लगती है
जैसी ही एक हफ्ता बीतता है, खाना न मिलने की वजह से शरीर का संतुलन बिगड़ने लगता है जिसके कारण ब्लड प्रेशर कम हो सकता है और शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी होने लगती है और शरीर ऊर्जा के लिए प्रोटीन का इस्तेमाल करना शुरू कर देता है. इतने बदलावों के कारण चलने-फिरने में थकान महसूस हो सकती है और मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं.
10 से 12 दिन: शरीर संकेत देने लगता है
लगातार भूखे रहने पर शरीर के कई अंगों पर दबाव बढ़ जाता है. वजन तेजी से कम होने लगता है और इम्यूनिटी कमजोर पड़ सकती है. ऐसे लोगों में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है. कई बार ब्लड शुगर बहुत नीचे जा सकती है, जिससे चक्कर आना, घबराहट और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
13 से 15 दिन: मांसपेशियों का नुकसान बढ़ता है
इस फेज तक आते-आते शरीर सिर्फ फैट ही नहीं बल्कि मांसपेशियों को भी तोड़कर एनर्जी लेने लगता है. इस समय तक इंसान इतना थक चुका होता है कि बी बेहद कमजोर महसूस करता है. जिसके कारण दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर में बदलाव आ सकते हैं और शरीर के जरूरी अंगों तक पूरा पोषण नहीं पहुंचने से तबीयत बिगड़ने लगती है.
16 से 17 दिन: हालत खराब हो जाती है
लगभग 17 दिन तक भोजन न करने पर शरीर पर गंभीर असर दिखने लगते हैं, वजन में भारी गिरावट, बहुत कम ब्लड शुगर, अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना और बेहोशी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. लंबे समय तक ऐसी स्थिति रहने पर दिल, किडनी और अन्य अंगों के कामकाज पर भी असर पड़ सकता है. इसलिए ऐसी स्थिति में लगातार मेडिकल निगरानी बेहद जरूरी होती है.
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