आज के इस डिजिटल दौर में हम सब का हाथ फोन से कभी अलग ही नहीं होता. सुबह आंख खुलते ही व्हाट्सएप चेक करने से लेकर रात को सोने तक स्क्रीन ही स्क्रीन दिखाई देती है. लेकिन पिछले कुछ सालों में एक नई आदत लगभग हर घर में देखने को मिल रही है, और वो है टॉयलेट सीट पर बैठकर मोबाइल चलाना. शौच के लिए गए तो थे बस 5 मिनट के लिए, लेकिन हाथ में फोन आते ही रील्स देखते-देखते, खबरें पढ़ते या यूट्यूब वीडियो स्क्रोल करते हुए कब आधा घंटा बीत गया पता ही नहीं चलता.
क्या आप भी टॉयलेट सीट पर बैठकर मोबाइल चलाते हैं? अगर हां, तो यह आदत आपकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. इस बारे में एनडीटीवी ने बात की डॉ. अजहर आलम से. वे आरजी हॉस्पिटल्स एवं आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लैप्रोस्कोपी हॉस्पिटल, कोलकाता में सीनियर कंसल्टेंट और कोलोरेक्टल साइंसेज विभाग के प्रमुख हैं. डॉक्टर के मुताबिक टॉयलेट में लंबे समय तक फोन इस्तेमाल करने से बवासीर (Piles), एनल फिशर और कब्ज जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है.
देखने में यह बड़ी मासूम और बेवकूफी भरी नहीं लगती, बल्कि लगता है कि चलो कुछ देर सुकून से अपना फोन देख लिया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आरामदायक लगने वाली आदत आपके शरीर के निचले हिस्से को कितनी बुरी तरह बीमार कर रही है. कोलकाता के आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लेप्रोस्कोपी हॉस्पिटल के जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. अजहर आलम बताते हैं कि टॉयलेट में फोन चलाने की यह आदत सीधे-सीधे आपको बवासीर और गुदा से जुड़ी गंभीर बीमारियों के दलदल में धकेल रही है.
सीट पर ज्यादा देर बैठने से क्या होता है असर
जब हम किसी सामान्य कुर्सी या सोफे पर बैठते हैं, तो हमारा वजन जांघों और कूल्हों पर बराबर बंट जाता है. लेकिन टॉयलेट सीट की बनावट एकदम अलग होती है.
- कमोड के बीच में खाली जगह यानी कटआउट होता है, जिसके कारण गुदा और मलाशय (रेक्टम) के हिस्से को नीचे से कोई सहारा नहीं मिलता.
- जब आप वहां 10 या 20 मिनट तक लगातार बैठे रहते हैं, तो गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव से पेल्विक हिस्से की नसों पर भारी दबाव बनने लगता है.
- इस लगातार दबाव के चलते गुदा के आसपास की बारीक नसें यानी ब्लड वेसल्स खून से भर जाती हैं और फूलने लगती हैं.
- अगर यह रोज का सिलसिला बन जाए, तो यही फूली हुई नसें धीरे-धीरे बवासीर यानी पाइल्स का रूप ले लेती हैं.
फोन की वजह से भूल जाते हैं शरीर के सिग्नल
डॉ. आलम बताते हैं कि अस्पताल में जितने भी मरीज कब्ज, बवासीर या गुदा में चीरा यानी एनल फिशर की शिकायत लेकर आते हैं, उनमें से ज्यादातर लोगों में टॉयलेट में लंबा वक्त बिताने की आदत पाई जाती है.
कई बार लोग फोन में इतने खो जाते हैं कि पेट साफ होने के बाद भी केवल स्क्रीन पर आंखें गड़ाए बैठे रहते हैं. वहीं कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें कब्ज की वजह से मल त्यागने में दिक्कत होती है. वो टाइम पास करने के लिए फोन चलाते रहते हैं और बीच-बीच में बहुत ज्यादा जोर (स्ट्रेनिंग) लगाते हैं. यह दोहरा खतरा पैदा करता है. एक तरफ सीट का दबाव और दूसरी तरफ पेट से लगाया गया अतिरिक्त जोर, दोनों मिलकर गुदा की कोमल त्वचा को छील देते हैं और नसों को कमजोर कर देते हैं.
किन लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करें
शुरुआत में लोग गुदा से जुड़ी समस्याओं को शर्म या झिझक के कारण किसी को बताते नहीं हैं. लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता है, यह तकलीफ बहुत भयानक रूप ले लेती है. अगर आपको ये संकेत दिख रहे हैं, तो तुरंत सावधान हो जाएं.
- शौच करते वक्त या बाद में खून की बूंदें गिरना.
- मल त्यागने के दौरान असहनीय जलन या ऐसा दर्द होना जैसे कांच चुभ रहा हो.
- गुदा द्वार के आसपास कोई गांठ, मस्सा या सूजन महसूस होना.
- टॉयलेट जाने के बाद भी ऐसा लगना कि पेट पूरी तरह हल्का नहीं हुआ है.
- कई हफ्तों से लगातार पेट साफ न होना और सख्त मल आना.
अगर इनमें से कोई भी दिक्कत सामने आ रही है, तो घर पर सिर्फ चूरन या घरेलू नुस्खे आजमाने के बजाय किसी अच्छे प्रोक्टोलॉजिस्ट या सर्जन को दिखाना बहुत जरूरी है.
कब्ज और बवासीर से बचने के आसान देसी उपाय
टॉयलेट में केवल बैठने की आदत बदलने से ही सब कुछ ठीक नहीं होगा, इसके लिए आपको अपनी रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और खाने-पीने में भी कुछ बुनियादी सुधार करने होंगे.
- भरपूर पानी पिएं: दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं. शरीर में पानी की कमी होने पर बड़ी आंत मल का सारा पानी सोख लेती है, जिससे पेट में सूखापन बढ़ जाता है.
- डाइट में शामिल करें फाइबर: खाने में ताजे मौसमी फल, खीरा, ककड़ी, हरी पत्तेदार सब्जियां, दलिया और चोकर वाला आटा शामिल करें. फाइबर पेट को बांधता है और मल को मुलायम बनाता है.
- शारीरिक मेहनत जरूरी है: दिनभर एक ही जगह बैठे रहने से आंतों की चाल सुस्त पड़ जाती है. रोजाना 20 से 30 मिनट तेज पैदल चलें या हल्का व्यायाम करें.
- टॉयलेट को रीडिंग रूम न बनाएं: जब सच में शौच की हाजत महसूस हो, तभी बाथरूम जाएं. अपने साथ फोन, अखबार या मैग्जीन ले जाने की आदत को आज ही पूरी तरह छोड़ दें.
- 5 मिनट का नियम बांधें: टॉयलेट सीट पर 5 से 7 मिनट से ज्यादा कभी न बैठें. अगर मल आसानी से नहीं आ रहा है, तो जोर लगाने के बजाय उठकर बाहर आ जाएं और पानी पीकर थोड़ा टहलें.
फोन अपने आप में कोई बुरी चीज नहीं है, लेकिन बाथरूम जैसी जगह पर इसका इस्तेमाल आपके शरीर के प्राकृतिक सिस्टम को पूरी तरह बिगाड़ देता है. शौच एक सामान्य शारीरिक क्रिया है, इसे किसी मनोरंजन के साथ जोड़ना बंद करें. अपनी इस छोटी सी आदत को बदलकर आप भविष्य में होने वाली असहनीय पीड़ा और सर्जरी के झंझट से खुद को आसानी से बचा सकते हैं.
FAQs-
क्या टॉयलेट में मोबाइल चलाने से बवासीर हो सकती है?
लंबे समय तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहने से गुदा की नसों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे बवासीर का जोखिम बढ़ सकता है.
टॉयलेट में कितनी देर बैठना सुरक्षित माना जाता है?
विशेषज्ञ आमतौर पर 5-7 मिनट से ज्यादा समय न बिताने की सलाह देते हैं.
क्या टॉयलेट में फोन चलाने से कब्ज बढ़ सकती है?
फोन में व्यस्त रहने से लोग शरीर के प्राकृतिक संकेतों को नजरअंदाज कर सकते हैं, जिससे कब्ज की समस्या बढ़ सकती है.
बवासीर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
शौच के दौरान खून आना, दर्द, जलन, सूजन या गांठ महसूस होना इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं.
एक्सपर्ट के बारे में
यह लेख डॉ. अजहर आलम से बातचीत पर आधारित है. डॉ. अजहर आलम आरजी हॉस्पिटल्स एवं आरजी स्टोन यूरोलॉजी एंड लैप्रोस्कोपी हॉस्पिटल, कोलकाता में सीनियर कंसल्टेंट और कोलोरेक्टल साइंसेज विभाग के प्रमुख हैं. वे पूर्वी भारत के अग्रणी कोलोरेक्टल सर्जनों में शामिल हैं और 1,000 से अधिक सफल सर्जरी कर चुके हैं. डॉ. आलम को बेनाइन कोलोरेक्टल रोगों के लिए लेजर सर्जरी शुरू करने वाले पायनियर सर्जनों में गिना जाता है. उन्होंने फिस्टुला-इन-एनो के उपचार के लिए "आलम्स फिस्टुलोप्लास्टी" नामक तकनीक विकसित की है, जिसे इस क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण नवाचार माना जाता है.
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