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रात को नींद नहीं आती और दिमाग रहता है अशांत? रोज 2 मिनट करें भ्रामरी प्राणायाम, तनाव होगा गायब

भ्रामरी प्राणायाम क्या है? जानें इसके फायदे, सही तरीका, सावधानियां और कैसे यह तनाव कम करने व बेहतर नींद पाने में मदद कर सकता है.

रात को नींद नहीं आती और दिमाग रहता है अशांत? रोज 2 मिनट करें भ्रामरी प्राणायाम, तनाव होगा गायब
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भ्रामरी प्राणायाम (Bhramari Pranayama) योग की एक लोकप्रिय श्वास तकनीक है, जिसे मानसिक तनाव कम करने, मन को शांत रखने और बेहतर नींद के लिए किया जाता है. आयुष मंत्रालय भी इसे मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी प्राणायामों में शामिल करता है. आइए जानते हैं भ्रामरी प्राणायाम के फायदे, इसे करने का सही तरीका और जरूरी सावधानियां.

अगर आपका भी मन हर वक्त अशांत रहता है, छोटी-छोटी बात पर चिढ़ या गुस्सा आता है और गहरी नींद तो जैसे सपना बन गई है, तो आपको किसी महंगी दवा की जरूरत नहीं है. हमारे प्राचीन योग विज्ञान में इसका एक बहुत ही सरल और चमत्कारी उपाय बताया गया है, जिसे भ्रामरी प्राणायाम कहते हैं. सिर्फ दो से पांच मिनट का यह आसान अभ्यास आपके दिमाग के सारे तनाव को ऐसे दूर भगा सकता है जैसे तेज हवा बादलों को उड़ा ले जाती है.

आखिर क्या है भ्रामरी प्राणायाम और इसका नाम कैसे पड़ा

भ्रामरी शब्द संस्कृत के भ्रमर से निकला है, जिसका मतलब होता है काला भौंरा. जब आप इस प्राणायाम का अभ्यास करते हैं, तो सांस छोड़ते वक्त गले से एक मधुर गुंजन निकलती है जो बिल्कुल किसी भौंरे की भिनभिनाहट जैसी सुनाई देती है. इसी आवाज की वजह से इसे भ्रामरी प्राणायाम कहा जाता है.

योग शास्त्र में प्राणायम को केवल सांस लेने की कसरत नहीं, बल्कि प्राण-शक्ति को नियंत्रित करने का जरिया माना गया है. महर्षि पतंजलि ने अपने अष्टांग योग में प्राणायाम को चौथा स्थान दिया है. जब आप अपनी सांसों पर ध्यान टिकाते हैं और भौंरे जैसी कंपन पैदा करते हैं, तो वो वाइब्रेशन सीधे आपके दिमाग के नर्वस सिस्टम तक पहुंचती है और बेचैन मन को तुरंत शांत कर देती है.

भ्रामरी करने से शरीर और दिमाग को मिलते हैं ये बड़े फायदे

आयुष मंत्रालय भी मानता है कि भ्रामरी प्राणायाम मानसिक स्वास्थ्य को ठीक करने के लिए सबसे आसान और असरदार तकनीकों में से एक है.

  1. नींद की परेशानी दूर करे: अनिद्रा यानी इनसोमनिया के शिकार लोगों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है. रात को सोने से पहले इसे करने से दिमाग के न्यूरॉन्स शांत होते हैं और गहरी, सुकून भरी नींद आती है.
  2. तनाव और गुस्सा कम करे: जब भी मन में घबराहट हो, बीपी बढ़ता महसूस हो या किसी बात पर तेज गुस्सा आ रहा हो, तो आंखें बंद करके इसे दो मिनट कर लें. इससे शरीर में हैप्पी हार्मोन्स रिलीज होते हैं और गुस्सा पलभर में ठंडा पड़ जाता है.
  3. याददाश्त और फोकस बढ़ाए: पढ़ाई करने वाले छात्रों और बच्चों के लिए यह बेहद फायदेमंद है. इससे एकाग्रता बढ़ती है, दिमाग की नसें तेज काम करती हैं और पढ़ी हुई बातें लंबे समय तक याद रहती हैं.
  4. सिरदर्द और माइग्रेन में राहत: जो लोग दिनभर कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन के सामने काम करते हैं, उन्हें अक्सर शाम को सिर में तेज दर्द होने लगता है. भ्रामरी की कंपन सिर की जकड़न को खत्म करती है और माइग्रेन के दर्द को हल्का करती है.

भ्रामरी प्राणायाम करने का सबसे सही तरीका क्या है

इस प्राणायाम को करना बेहद आसान है और इसके लिए आपको किसी बड़े साधन या पार्क में जाने की भी जरूरत नहीं है. आप इसे अपने कमरे में बिस्तर पर बैठकर भी कर सकते हैं.

  1. सबसे पहले किसी शांत जगह पर सुखासन या पद्मासन में आराम से बैठ जाएं. रीढ़ की हड्डी और गर्दन को एकदम सीधा रखें.
  2. अपनी दोनों आंखें बंद कर लें और शरीर को पूरी तरह ढीला छोड़ दें.
  3. अब षण्मुखी मुद्रा बनाएं. यानी अपने दोनों हाथों के अंगूठों से दोनों कानों के सुराख को हल्के से बंद करें ताकि बाहर की कोई आवाज न सुनाई दे.
  4. अपनी तर्जनी उंगली (इंडेक्स फिंगर) को माथे पर रखें और बाकी की तीनों उंगलियों को आंखों और नाक के पास हल्के से टिकाएं. ध्यान रहे कि आंखों पर ज्यादा दबाव नहीं डालना है.
  5. अब नाक से धीरे-धीरे गहरी और लंबी सांस अंदर खींचें.
  6. इसके बाद मुंह को पूरी तरह बंद रखते हुए, गले से भौंरे की तरह 'ऊं' या 'म्मम' की ध्वनि निकालते हुए सांस को धीरे-धीरे नाक से बाहर छोड़ें.
  7. इस गुंजन की कंपन को अपने पूरे सिर, माथे और दिमाग में महसूस करें.
  8. इस पूरी प्रक्रिया को शुरुआत में 5 से 7 बार दोहराएं. धीरे-धीरे आप इसे 10 से 15 बार तक ले जा सकते हैं.

अभ्यास करते समय इन सावधानियों को न भूलें

भ्रामरी बहुत सुरक्षित प्राणायाम है, लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है ताकि इसका कोई उल्टा असर न पड़े.

  • इसे हमेशा खाली पेट या भोजन करने के कम से कम 3 से 4 घंटे बाद ही करना चाहिए. सुबह का समय इसके लिए सबसे उत्तम माना जाता है.
  • जिन लोगों को कान में गंभीर संक्रमण, मवाद आने की शिकायत या बहुत ज्यादा साइनस का दर्द हो, उन्हें यह अभ्यास उस समय नहीं करना चाहिए.
  • गर्भवती महिलाएं या हाई ब्लड प्रेशर और दिल के गंभीर मरीज इसे करने से पहले किसी योग एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें.
  • गुंजन की आवाज निकालते समय गले पर जोर न लगाएं, आवाज एकदम सहज और स्वाभाविक होनी चाहिए.
  • अगर अभ्यास करते समय अचानक चक्कर आए या बेचैनी महसूस होने लगे, तो तुरंत रुक जाएं और सामान्य रूप से सांस लें.

मन को शांत रखना आज के समय में सबसे बड़ी दौलत है. अगर दिमाग हर वक्त बेचैन रहेगा, तो दुनिया की कोई भी सुख-सुविधा हमें खुशी नहीं दे सकती. इसलिए रोज सिर्फ पांच मिनट अपने लिए निकालें और भ्रामरी प्राणायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं. कुछ ही दिनों में आप खुद महसूस करेंगे कि आपका मन कितना शांत हो गया है और चेहरे पर एक अलग ही कुदरती चमक लौट आई है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)
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