Effects Of Too Much Screen Time On Children: मौजूदा समय में बच्चों के बीच तेजी से बढ़ता स्क्रीन एडिक्शन एक गंभीर समस्या का रूप लेता जा रहा है. मोबाइल फोन, टैबलेट और टीवी जैसे डिजिटल डिवाइस अब बच्चों के जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं. इससे उनका स्क्रीन टाइम लगातार बढ़ता जा रहा है. यह स्थिति अब देश के लगभग हर घर में आम होती जा रही है. माता-पिता की व्यस्तता और डिजिटल एजुकेशन के बढ़ते चलन ने इस ट्रेंड को काफी हवा दी है, जिससे स्क्रीन टाइम कंट्रोल करना एक बड़ी चुनौती बन गया है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों के के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास पर असर डाल सकता है.
बहुत कम उम्र से बढ़ रहा स्क्रीन टाइम Screen Time And Children
आजकल बच्चों को बहुत छोटी उम्र में ही स्क्रीन की लत लग जाती है. जबकि इस उम्र में उनका दिमाग भाषा, ध्यान और भावनाओं को समझने व विकसित करने की महत्वपूर्ण प्रक्रिया में होता है. इसका एक कारण माता-पिता भी माने जा रहे हैं, जो अक्सर बच्चों को खाना खिलाने या शांत करने के लिए मोबाइल या कार्टून का सहारा लेते हैं. इससे धीरे-धीरे बच्चे उसी पर निर्भर हो जाते हैं.
कोविड के बाद बढ़ी डिजिटल निर्भरता | Has COVID-19 Made You Addicted to Your Phone?
COVID-19 महामारी की वजह से भी स्क्रीन टाइम में काफी बढ़ोतरी हुई है. महामारी से शुरू हुआ ऑनलाइन क्लासेस और डिजिटल शिक्षा का ट्रेंड लगातार तेजी से बढ़ रहा है. इससे स्क्रीन टाइम कई गुना बढ़ा है. आज बच्चे दिन के कई घंटे मोबाइल, टैबलेट या टीवी पर बिता रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, टीनएजर्स औसतन 8 घंटे और छोटे बच्चे लगभग 5 घंटे स्क्रीन पर समय बिता रहे हैं.
शारीरिक और मानसिक विकास असर | Impact Of Screen Time On Physical And Mental Health
एक्सपर्ट्स के अनुसार, बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर असर डाल सकता है. शुरुआती उम्र में यह भाषा, सीखने की क्षमता, सामाजिक व्यवहार, इमेजिनेशन पावर और एकाग्रता (Concentration) को प्रभावित कर सकता है. कुछ स्टडीज में दिमाग और न्यूरल कनेक्टिविटी पर भी गहरे प्रभाव की बात सामने आई है. हालांकि, इनको लेकर कोई ठोस फैक्ट्स अभी तक नहीं मिले हैं.
जरूरी है बैलेंस
एक्सपर्ट्स के अनुसार, स्क्रीन पूरी तरह हानिकारक नहीं है, लेकिन इसका बहुत ज्यादा इस्तेमाल समस्या पैदा करता है. बच्चों के लिए असली विकास मानव संपर्क, खेल-कूद और बातचीत से होता है. इसलिए जरूरत इस बात की है कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल बैलेंस्ड और कंट्रोल्ड तरीके से किया जाए, ताकि बच्चों की ओवरऑल ग्रोथ प्रभावित न हो.
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