हम सालों से इस बात की चिंता करते रहे हैं कि बच्चे अपने फोन पर कितना समय बिताते हैं. जबकि एक ताजा स्टडी में हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई है. नई स्टडी कहती है कि हमें अपनी आदतों में भी बदलाव करने की जरूरत है. नई रिसर्च के मुताबिक, माता-पिता का अपने स्मार्टफोन और स्क्रीन से लगाव उनके बच्चों के लिए भी खतरनाक साबित हो रहा है.
स्टडी में पाया गया कि जिन बच्चों को लगता है कि उनके माता-पिता डिवाइस से भटक जाते हैं, उनमें रिसर्चर के अनुसार “इनसिक्योर अटैचमेंट” होने की संभावना ज्यादा होती है, जो बड़े होने पर उनके कॉन्फिडेंस, रिश्तों और इमोशनल वेलबीइंग को आकार दे सकता है.
स्टडी में क्या पाया गया
रिसर्चर्स ने बताया कि माता-पिता की फोन की आदतें सच में बच्चों में इनसिक्योर अटैचमेंट में योगदान दे सकती हैं, जिससे उनके भविष्य के रिश्ते ज्यादा एंग्जायटी वाले या अवॉइडेंट महसूस हो सकते हैं.
अमेरिकन साइकोलॉजिकल एसोसिएशन के एक साइकोलॉजिस्ट और फेलो डॉन ग्रांट ने इसके संभावित असर को काफी साफ-साफ समझाया. उन्होंने कहा कि इनसिक्योर अटैचमेंट से कॉन्फिडेंस कम हो सकता है, करीबी रिश्ते बनाने में मुश्किल हो सकती है, और ऐसे रिस्क लेने में हिचकिचाहट हो सकती है जो अक्सर पर्सनल या प्रोफेशनल सफलता के लिए जरूरी होते हैं.
ये नतीजे पिछले महीने पीयर-रिव्यूड जर्नल फ्रंटियर्स इन साइकोलॉजी में छपी एक स्टडी से आए हैं. रिसर्चर्स ने 12 से 17 साल के 600 अमेरिकी किशोरों का सर्वे किया, और एक बार-बार आने वाली बात सामने आई. कई पार्टिसिपेंट्स ने कहा कि जब भी उनके माता-पिता साथ में समय बिताते थे और अपने फोन पर बिजी रहते थे, तो उन्हें अनदेखा या साइडलाइन महसूस होता था.

यह रिसर्च अलग क्यों है
सालों से, बच्चों और स्क्रीन के बारे में ज्यादातर पब्लिक बातचीत पूरी तरह से बच्चों के अपने सोशल मीडिया इस्तेमाल पर ही फोकस रही है. रिसर्चर्स के मुताबिक, इस बात पर बहुत कम ध्यान दिया गया है कि माता-पिता की स्क्रीन की आदतें उनके बच्चों पर कैसे असर डालती हैं, और यह स्टडी ठीक वही कमी भरने की कोशिश करती है.
ग्रांट ने इसे सबसे बड़ी स्टडीज में से एक बताया जो खास तौर पर इस बात पर ध्यान देती है कि बच्चे अपने माता-पिता के टेक्नोलॉजी इस्तेमाल को कैसे देखते हैं, और यह सोच समय के साथ माता-पिता और बच्चे के रिश्ते को कैसे बनाती है.
टेक्नोफेंस का बच्चों पर असर
यह रिसर्च “टेक्नोफ्रेंस” के बारे में भी बात करती है, जो मूल रूप से उस रुकावट को बताता है जो तब होती है जब लोग आमने-सामने बातचीत के दौरान अपने डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं. जबकि पहले की स्टडीज में ज्यादातर यह देखा गया था कि यह एडल्ट रिश्तों, जैसे पार्टनर या दोस्तों के बीच, को कैसे प्रभावित करता है, यह नई रिसर्च खास तौर पर बच्चों और टीनएजर्स पर फोकस करती है.
इस कहानी का एक और दिलचस्प हिस्सा यह है कि माता-पिता और बच्चे एक ही स्थिति को कितने अलग-अलग तरीके से देखते हैं. प्यू रिसर्च सेंटर के 2024 के डेटा के मुताबिक, लगभग आधे अमेरिकी टीनएजर्स ने कहा कि बातचीत के दौरान उनके पेरेंट्स अपने फोन से डिस्ट्रैक्ट होते हैं. दूसरी ओर, जब पेरेंट्स से उनके अपने बिहेवियर के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने यह मानने की संभावना बहुत कम थी कि यह एक रेगुलर इशू था.
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