विज्ञापन

अंतरिक्ष में पहली बार, वैज्ञानिकों का कमाल, बना दिए लिवर और किडनी टिश्यू

वैज्ञानिकों ने पहली बार अंतरिक्ष में लिवर और किडनी के टिश्यू तैयार किए हैं, इससे भविष्य में अंगों की कमी और कई गंभीर बीमारियों के इलाज का रास्ता आसान हो सकता है.

अंतरिक्ष में पहली बार, वैज्ञानिकों का कमाल, बना दिए लिवर और किडनी टिश्यू
स्पेस में तैयार हुए मानव टिश्यू
space.com

जब भी अंतरिक्ष की बात होती है, हमारे मन में कई सवाल आते हैं. जैसे- अंतरिक्ष में लोग कैसे रहते हैं, खाना-पीना कैसे करते हैं और वहां अपना रोजमर्रा का काम कैसे करते हैं? कुछ समय पहले वैज्ञानिकों ने "स्पेस कप" बनाकर दिखाया था कि बिना ग्रैविटी के भी पानी पिया जा सकता है. अब उन्होंने एक और बड़ी सफलता हासिल की है. इस बार वैज्ञानिकों ने 3D बायो-प्रिंटिंग की मदद से लिवर और किडनी के कुछ टिश्यू तैयार किए हैं. माना जा रहा है कि भविष्य में इससे कई गंभीर बीमारियों का इलाज करना आसान हो सकता है.

कब पूरा हुआ ये मिशन

यह मिशन जून 2026 में पूरा हुआ और 17 जून को स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल के जरिए सभी सैंपल सुरक्षित तरीके से धरती पर वापस लाए गए. बता दें इस मिशन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि पहली बार अंतरिक्ष में लिवर और किडनी के टिश्यू तैयार किए गए. 

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: space.com

पहले भी हो चुके हैं ऐसे प्रयोग

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर इससे पहले भी बायोप्रिंटिंग से जुड़े कई प्रयोग किए जा चुके हैं. साल 2018 में रूसी अंतरिक्ष यात्री ओलेग कोनोनेन्को ने एक खास मशीन की मदद से कार्टिलेज (हड्डियों के बीच का मुलायम हिस्सा) की कोशिकाओं को जोड़ने का सफल परीक्षण किया था. 

इस बार क्या था नया?

इस बार वैज्ञानिक सिर्फ मशीन की जांच नहीं कर रहे थे. वे यह समझना चाह रहे थे कि क्या आने वाले समय में अंतरिक्ष में बड़े पैमाने पर इंसानी शरीर से जुड़े टिश्यू और दूसरे मेडिकल प्रोडक्ट बनाए जा सकते हैं. यही वजह है कि उन्होंने कई तरह के जैविक उत्पाद तैयार किए.  

इस मिशन में क्या-क्या बनाया गया?

इस मिशन के दौरान वैज्ञानिकों ने कई अहम चीजें तैयार कीं, जिनमें शामिल हैं

  • रिसर्च के लिए लिवर के टिश्यू
  • पहली बार अंतरिक्ष में तैयार किए गए किडनी के टिश्यू
  • हड्डियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले कार्टिलेज के सैंपल
  • खराब नसों की मरम्मत के लिए 28 खास इम्प्लांट
space.com

Photo Credit: space.com

किसने किया यह मिशन?

यह मिशन Auxilium Biotechnologies और Wake Forest Institute for Regenerative Medicine ने मिलकर पूरा किया. Auxilium ने इस मिशन के लिए खास बायोप्रिंटर दिया, जबकि Wake Forest Institute ने कोशिकाओं की डिजाइन और पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया तैयार की.

वैज्ञानिकों का क्या कहना है?

वैज्ञानिकों के मुताबिक यह सिर्फ एक प्रयोग नहीं था, इससे यह साबित हुआ है कि अंतरिक्ष में कई तरह के मेडिकल टिश्यू और दूसरे जैविक उत्पाद बनाए जा सकते हैं. अगर आगे भी ऐसे प्रयोग सफल रहे, तो भविष्य में इनका बड़े पैमाने पर उत्पादन भी किया जा सकेगा. 

माइक्रोग्रैविटी क्यों फायदेमंद है?

धरती पर ग्रैविटी होने की वजह से कोशिकाएं हमेशा सही तरीके से विकसित नहीं हो पातीं, लेकिन अंतरिक्ष में ग्रैविटी बहुत कम होती है. ऐसे माहौल में कोशिकाएं बराबर तरीके से फैलती हैं और सही जगह पर जुड़ती हैं. इसलिए इससे तैयार होने वाले टिश्यू ज्यादा मजबूत और बेहतर क्वालिटी के बनते हैं. 

इसे भी पढ़ें: भारत में बंद हुई मेनोपॉज की दवा प्रेमारिन क्रीम, अब महिलाओं के सामने क्या हैं ऑप्शन?

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Space News, Space Research, ISS, Liver Tissue For Transplant, 3d Printing
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com