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कीमोथेरेपी के अगले दिन जिम और शूटिंग, संजय दत्त की इस जिद में छिपा है कैंसर से जंग जीतने का सबसे बड़ा मेडिकल सीक्रेट

कैंसर के इलाज के दौरान मानसिक मजबूती क्यों जरूरी है. मशहूर डॉक्टर और संजय दत्त की कहानी से जानिए कैसे बिना डरे इस बड़ी बीमारी को हराया जा सकता है. इस दौरान क्या करना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए.

कीमोथेरेपी के अगले दिन जिम और शूटिंग, संजय दत्त की इस जिद में छिपा है कैंसर से जंग जीतने का सबसे बड़ा मेडिकल सीक्रेट
कैंसर आपकी जिंदगी छीन सकता है, पर हिम्मत नहीं. ( Image NDTV)

कैंसर का नाम सुनते ही अच्छे-भले इंसान के पैरों तले जमीन खिसक जाती है. अचानक से सब कुछ सिर्फ इस बीमारी के आसपास घूमने लगता है. दवाइयां, हॉस्पिटल के चक्कर, टेस्ट रिपोर्ट्स और मन में पहला ख्याल आता है, 'क्या अब सब कुछ खत्म हो गया.' लेकिन क्या आप जानते हैं कि कैंसर सिर्फ एक शारीरिक बीमारी नहीं, बल्कि दिमाग की भी लड़ाई है और इस लड़ाई को जीतने का एक बहुत बड़ा सीक्रेट हाल ही में सोशल मीडिया पर सामने आया है.

मशहूर डॉक्टर रवि गुप्ता (dr.ravikgupta) ने अपने इंस्टाग्राम पर बॉलीवुड स्टार संजय दत्त का एक बेहद इंस्पायरिंग वीडियो शेयर किया है. इस वीडियो के साथ उन्होंने कैंसर के मरीजों को एक ऐसी सलाह दी है, जिसे हर उस इंसान को जानना चाहिए जो किसी न किसी बड़ी बीमारी से जूझ रहा है. आइए जानते हैं, संजय दत्त ने स्टेज-4 कैंसर के दौरान ऐसा क्या किया, जिसे डॉक्टर भी एक 'मेडिकल मिसाल' मान रहे हैं.

मैं सिर्फ एक मिनट के लिए रोया- संजय दत्त

बॉलीवुड एक्टर संजय दत्त की कहानी इसकी सबसे बड़ी मिसाल है. 2020 में उन्हें स्टेज 4 लंग कैंसर डायग्नोज हुआ. यानी कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों तक भी फैल चुका था. ये किसी के लिए भी सुनना आसान नहीं होता है. लेकिन इस मुश्किल दौर में भी संजय दत्त ने इलाज के साथ-साथ अपनी जिंदगी को पूरी तरह रुकने नहीं दिया.

संजय दत्त ने एक शो के दौरान अपने दिल की बात शेयर करते हुए बताया कि जब उन्हें पता चला कि उन्हें स्टेज-4 कैंसर है, तो वह टूट गए थे. अपने छोटे बच्चों का चेहरा याद करके वह सिर्फ एक मिनट के लिए रोए, लेकिन अगले ही पल उन्होंने खुद से एक वादा किया, 'मैं जीतूंगा और यह बीमारी हारेगी.' इसके बाद जो हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया.

संजय दत्त ने कैंसर के इलाज के दौरान क्या किया

संजय दत्त ने कीमोथेरेपी कराने के अगले ही दिन हार मानने के बजाय जिम का रुख किया. उन्होंने बीमारी के दौरान दो-दो घंटे हैवी वर्कआउट किया. इसी मुश्किल दौर में उन्होंने अपनी सुपरहिट फिल्में 'KGF' और 'शमशेरा' की शूटिंग पूरी की. आज वह पूरी तरह ठीक हैं. उन्होंने कहा, 'मैं जीत गया और कैंसर हार गया.'

डॉक्टर की सलाह, कैंसर को अपनी पहचान मत बनाओ

डॉ. रवि गुप्ता कहते हैं कि वह अपने लगभग हर कैंसर मरीज को एक ही बात समझाते हैं कि कैंसर को अपनी पूरी पहचान मत बनने दीजिए. इसका मतलब है कि बीमार होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप 24 घंटे सिर्फ अस्पताल, दवाओं और बीमारी के बारे में ही सोचते रहें. डॉक्टरों के मुताबिक, इलाज और आराम अपनी जगह है.

दवाएं समय पर लेना और आराम करना बहुत जरूरी है. अगर आपके डॉक्टर कहते हैं कि बाहर जाना सुरक्षित है, तो अपनी जिंदगी को खुलकर जिएं. लोगों से मिलें, सुबह-शाम वॉक पर जाएं और वो हर काम करें, जिससे आपको खुशी मिलती है.

क्या कहता है मेडिकल साइंस

संजय दत्त की कहानी कोई चमत्कार नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक मजबूत मेडिकल साइंस काम करता है. डॉक्टरों ने देखा है कि जो मरीज बीमारी के दौरान खुश रहते हैं और एक्टिव रहते हैं, उनकी सेहत में बहुत तेजी से सुधार होता है. जब आप खुश रहते हैं और अपनी पसंदीदा चीजें करते हैं, तो दिमाग से स्ट्रेस कम होता है.

तनाव कम होने से हमारे शरीर का इम्यून सिस्टम बहुत बेहतर तरीके से काम करने लगता है. एक खुशहाल और मजबूत दिमाग वाले शरीर पर कैंसर की दवाएं और कीमोथेरेपी दोगुनी तेजी से असर करती हैं.

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