- संसद के मॉनसून सत्र के 16 दिनों में हंगामा हुआ, बावजूद इसके कुछ बिल पारित कराए गए हैं
- सरकार ने विपक्ष की मांग मानते हुए छात्रों पर पुलिस कार्रवाई पर चर्चा और गृह मंत्री के जवाब की बात कही
- एफसीआरए और परिसीमन बिलों पर विवाद जारी है, स्पीकर ने इसे जेपीसी को भेजने का प्रस्ताव रखा है
संसद के मॉनसून सत्र के अब केवल तीन दिन बचे हैं. 20 जुलाई को शुरू हुए सत्र के 16 दिनों में ज़बरदस्त हंगामा हुआ है. सरकार ने हंगामे के बीच ही कुछ बिल पारित करा लिए हैं, लेकिन विवादास्पद एफसीआरए और परिसीमन बिलों को लेकर तस्वीर अब भी साफ नहीं है. आज बिज़नेस एडवाइज़री कमेटी की बैठक में सरकार ने विपक्ष की उस मांग को मान लिया, जिसमें 20 जुलाई को संसद भवन की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई को लेकर चर्चा और गृह मंत्री अमित शाह के जवाब की मांग की थी. सरकार ने कहा कि शाह हर बात का जवाब देंगे, लेकिन विपक्ष को सुनना पड़ेगा.
इसके बाद विपक्ष में एक राय नहीं दिखा. समाजवादी पार्टी ने कहा कि वह राम मंदिर के चढ़ावा चोरी के मामले पर भी चर्चा चाहती है और पीएम मोदी इसका जवाब दें. इस बीच सरकार ने बीएसी की बैठक में एफसीआरए संशोधन बिल और परिसीमन संविधान संशोधन बिल को लेकर कोई संकेत नहीं दिया. हालांकि इस बिल पर गतिरोध सुलझाने के लिए स्पीकर ने पहल की है. कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल के मुताबिक स्पीकर ने कहा कि इस बिल को जेपीसी को भेजा जा सकता है. इससे पहले प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई कांग्रेस सांसदों ने स्पीकर से मुलाकात भी की थी.
हालांकि वेणुगोपाल ने इस बिल को जेपीसी को भेजने के प्रस्ताव को नकार दिया. उन्होंने कहा कि सरकार को यह बिल वापस लेना ही होगा. इसके बाद गृह मंत्री अमित शाह भी स्पीकर से मिले. इस बीच सरकारी सूत्रों ने कहा कि बचे तीन दिनों में एफसीआरए और परिसीमन बिल लाने का विकल्प खुला है. सरकार इस मुद्दे पर डीएमके और कांग्रेस जैसे दलों के साथ ‘गिव एंड टेक' के लिए भी तैयार है. गौरतलब है कि डीएमके भी एफसीआरए बिल का विरोध कर रही है. सरकार एफसीआरए बिल पर कदम पीछे खींच कर परिसीमन बिल पर डीएमके का समर्थन लेने का रास्ता साफ कर सकती है. यही नहीं, एक सरकारी सूत्र के अनुसार सरकार एफसीआरए बिल में एक संशोधन भी कर सकती है ताकि विरोध कम किया जा सके. पिछले सप्ताह मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद कहा था कि सरकार बारह अगस्त को यह बिल चर्चा और पारित कराने के लिए सूचीबद्ध करेगी.
परिसीमन बिल पर क्या है सरकारी की तैयारी, शरद पवार गुट के मिलने से कयास
वहीं परिसीमन बिल को लेकर अभी रास्ते बंद नहीं हैं. आज सुबह ही एनसीपी शरद पवार के सभी आठ लोक सभा सांसदों ने पीएम मोदी से मुलाकात की. वैसे तो इसका एजेंडा महाराष्ट्र में सूखे और अकाल की स्थिति पर चर्चा बताया गया, लेकिन परिसीमन बिल को लेकर सरकार के समर्थन हासिल करने की कोशिश से भी इसे जोड़ कर देखा जा रहा है. सरकारी सूत्रों के अनुसार परिसीमन और महिला आरक्षण के संविधान संशोधन को पारित कराने के लिए सरकार के पास आवश्यक दो तिहाई संख्या हो गई है. लेकिन अगर संख्या बल है तो फिर सरकार यह बिल क्यों नहीं ला रही? यह प्रश्न संसद के गलियारों में तैर रहा है. सरकारी सूत्रों के अनुसार विपक्ष परिसीमन बिल को रोकने के लिए ही एक के बाद एक मुद्दे खड़े कर संसद में गतिरोध बनाना चाहता है. वरना गृह मंत्री के सदन में चर्चा का जवाब देने के प्रस्ताव के बावजूद आखिर विपक्ष इसे स्वीकार क्यों नहीं कर रहा. प्रश्न यह भी है कि अगर अगले दो दिनों में परिसीमन बिल पारित नहीं होता है तो क्या सरकार शीतकालीन सत्र तक इंतज़ार करेगी या फिर विशेष सत्र बुलाया जाएगा?
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