अक्सर किचन के कोनों में, रसोई की स्लैब पर या बगीचे में अक्सर हमें चींटियों की कतारें देखने को मिल जाती हैं. कई बार तो मीठी चीज पर ये इतनी जल्दी टूट पड़ती हैं कि देखकर हैरानी होती है. जैसे ही चींटियां हमारे शरीर पर चढ़कर डंक मारता है, तब समझ में आता है कि इनका असर कितना जोरदार हो सकता है. आमतौर पर हमारे घरों और आसपास दो तरह की चींटियां सबसे ज्यादा दिखती हैं, एक काली चींटी और दूसरी लाल चींटी.
बचपन से ही हम सब सुनते आए हैं कि लाल चींटी बुरी होती है और काली चींटी को शुभ माना जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि साइंस के हिसाब से इनमें से कौन सी ज्यादा खतरनाक होती है और किसके काटने पर सेहत को सचमुच खतरा हो सकता है.
कई लोग मानते हैं कि लाल चींटी का काटना ज्यादा दर्दनाक होता है, जबकि काली चींटी अपेक्षाकृत कम नुकसान पहुंचाती है. आइए जानते हैं कि साइंस के मुताबिक लाल चींटी और काली चींटी में क्या अंतर है, इनके काटने से क्या होता है और बचाव के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं.
काली चींटी: दिखने में शांत, पर हमेशा हानिरहित नहीं
काली चींटियां जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में कारपेंटर चींटियां या सामान्य गार्डन चींटियां कहा जाता है, आमतौर पर इंसानों से दूरी बनाकर ही रहती हैं.
स्वभाव में शर्मीली: ये चींटियां बिना किसी वजह के किसी को परेशान नहीं करतीं. जब तक आप इनके बिल को न छेड़ें या इन पर गलती से पैर न रख दें, ये आमतौर पर नहीं काटतीं.
काटने का तरीका: काली चींटी के पास डंक नहीं होता. ये अपने मजबूत जबड़ों (मैनडिबल्स) से चुटकी की तरह काटती हैं.
नुकसान का स्तर: इनके काटने से हल्की सी चुभन होती है और कभी-कभार थोड़ी सी लाली आ जाती है. यह दर्द कुछ ही मिनटों में गायब हो जाता है.
घर के लिए सिरदर्द: भले ही ये इंसान के लिए जानलेवा न हों, पर घर में मौजूद लकड़ी के पुराने फर्नीचर और दीवारों के बीच बिल बनाकर ये ढांचागत नुकसान जरूर पहुंचा सकती हैं.

लाल चींटी: छोटा आकार और आग जैसा तेज दर्द
लाल चींटियों को आमतौर पर 'फायर आंट्स' कहा जाता है. और सच कहें तो इनका यह नाम बिल्कुल सही रखा गया है, क्योंकि जब ये काटती हैं तो शरीर में ऐसा लगता है जैसे किसी ने आग का अंगारा छू दिया हो.
आक्रामक रवैया: लाल चींटियां स्वभाव से बहुत गुस्सैल होती हैं. अगर इनके इलाके में कोई पहुंच जाए, तो ये एक साथ झुंड बनाकर हमला करती हैं.
जहर का इंजेक्शन: लाल चींटी सिर्फ काटती नहीं है, बल्कि अपने जबड़े से स्किन को पकड़कर पीछे के डंक से शरीर में जहर छोड़ती है. इस जहर में फॉर्मिक एसिड और सोलेनोप्सिन नाम का एल्कलॉइड पाया जाता है.
फफोले और सूजन: इसके डंक मारते ही त्वचा पर तेज जलन, खुजली और सूजन शुरू हो जाती है. कई बार तो वहां सफेद रंग का छोटा फफोला (ब्लिस्टर) भी बन जाता है, जो ठीक होने में तीन से चार दिन ले लेता है.
गंभीर एलर्जी का रिस्क: जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है या जिन्हें कीट-पतंगों के डंक से एलर्जी होती है, उन्हें लाल चींटी के काटने से सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना या पूरे शरीर पर चकत्ते पड़ने जैसी समस्या हो सकती है.
कौन सी चींटी ज्यादा खतरनाक साबित होती है?
अगर सीधे शब्दों में तुलना करें, तो लाल चींटी काली चींटी के मुकाबले कई गुना ज्यादा खतरनाक होती है. काली चींटी का काटना सिर्फ एक मामूली चुटकी जैसा होता है, जिसमें कोई जहरीला असर नहीं होता. वहीं दूसरी ओर लाल चींटी का डंक सीधा स्किन के अंदर जहरीला रसायन छोड़ता है. अगर किसी छोटे बच्चे या बुजुर्ग को कई लाल चींटियां एक साथ काट लें, तो यह मेडिकल इमरजेंसी तक बन सकती है. इसलिए लाल चींटियों से हमेशा दूरी बनाकर रखनी चाहिए.
चींटी काट ले तो तुरंत क्या घरेलू उपाय करें?
अगर कभी रसोई या गार्डन में काम करते हुए लाल चींटी काट ले, तो घबराने की जगह घर में रखी इन आसान चीजों का इस्तेमाल करें.
- बर्फ से सिकाई: जहां चींटी ने काटा है, उस जगह पर तुरंत बर्फ का टुकड़ा रगड़ें. इससे जलन तुरंत शांत होगी और सूजन भी नहीं बढ़ेगी.
- साबुन और साफ पानी: सबसे पहले उस जगह को ठंडे पानी और साबुन से अच्छी तरह धो लें ताकि त्वचा पर मौजूद जहर का असर थोड़ा हल्का हो जाए.
- बेकिंग सोडा का लेप: बेकिंग सोडा में थोड़ा सा पानी मिलाकर गाढ़ा पेस्ट बना लें और डंक वाली जगह पर लगाएं. बेकिंग सोडा एल्केलाइन होता है, जो चींटी के फॉर्मिक एसिड के असर को बेअसर कर देता है.
- एलोवेरा जेल: घर में एलोवेरा का पौधा हो तो उसका ताजा जेल निकालकर लगाएं. इसकी ठंडी तासीर जलन और खुजली से तुरंत राहत देती है.
- तुलसी के पत्ते: तुलसी के दो-चार पत्ते पीसकर उसका रस लगाने से भी डंक के दर्द में बहुत आराम मिलता है.
घर से चींटियों को भगाने के आसान तरीके
रसोई में बार-बार चींटियों का आना खाने-पीने की चीजों को खराब करता है. केमिकल वाले कीटनाशक छिड़कने से बेहतर है कि आप इन घरेलू नुस्खों को आजमाएं.
- सिरका और पानी का स्प्रे: बराबर मात्रा में सफेद सिरका और पानी मिलाकर एक बोतल में भर लें. जहां भी चींटियां दिखें, वहां इसका छिड़काव करें. सिरके की महक से चींटियों की सूंघने की क्षमता गड़बड़ा जाती है.
- दालचीनी और लौंग का पाउडर: चींटियों को तेज मसालों की गंध बिल्कुल बर्दाश्त नहीं होती. रसोई की खिड़कियों और कोनों में थोड़ा दालचीनी पाउडर या दो-तीन लौंग रख दें.
- नींबू का रस: फर्श पर पोछा लगाते वक्त पानी में थोड़ा सा नींबू का रस निचोड़ दें. इससे फर्श साफ भी रहेगा और चींटियां भी दूर भागेंगी.
चींटियां कुदरत की सफाईकर्मी मानी जाती हैं, लेकिन घर के भीतर इनका होना परेशानी का सबब बन जाता है. खासकर लाल चींटियों के मामले में सावधानी बरतना बहुत जरूरी है, ताकि घर के छोटे बच्चे और बुजुर्ग इनके दर्दनाक डंक से बचे रहें.
FAQs
1. लाल चींटी का काटना ज्यादा खतरनाक क्यों होता है?
लाल चींटी के डंक से दर्द, जलन और सूजन हो सकती है. कुछ लोगों में एलर्जी जैसी प्रतिक्रिया भी देखी जा सकती है.
2. काली चींटी काट ले तो क्या होता है?
आमतौर पर हल्की चुभन, खुजली या लाली दिखाई दे सकती है जो कुछ समय बाद ठीक हो जाती है.
3. चींटी काटने पर तुरंत क्या लगाना चाहिए?
बर्फ की सिकाई, साबुन-पानी से सफाई और एलोवेरा जेल लगाने से राहत मिल सकती है.
4. घर से चींटियों को कैसे भगाएं?
सिरका, नींबू, दालचीनी और लौंग जैसे घरेलू उपाय मददगार हो सकते हैं.
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