हंगरी की सुपरमॉडल बारबरा पाल्विन ने डिलीवरी के महज 6 हफ्ते बाद विक्टोरियाज सीक्रेट के रैंप पर वापसी करके सबको चौंका दिया. एक्टर डायलन स्प्रूस के साथ बेटी के जन्म के तुरंत बाद उनका इस तरह फैशन शो में उतरना एक पुरानी बहस को फिर से जिंदा कर गया है. आखिर बच्चे के जन्म के कितने दिन बाद किसी महिला को कसरत या भारी काम शुरू करना चाहिए.
पीपुल मैगजीन को दिए एक इंटरव्यू में पाल्विन ने कहा कि डिलीवरी के इतनी जल्दी बाद रैंप पर चलना कोई बहुत बड़ी बात नहीं थी. लेकिन उनके इस बयान ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सचमुच 6 हफ्ते का वक्त एक महिला के शरीर को प्रेग्नेंसी और डिलीवरी के तनाव से पूरी तरह उबारने के लिए काफी होता है.
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डॉक्टरों का साफ कहना है कि इसका कोई एक तय नियम सब पर लागू नहीं होता. हर महिला का शरीर अलग होता है. कुछ महिलाएं डिलीवरी के कुछ ही दिन बाद हल्की-फुल्की वॉक या मूवमेंट के लिए तैयार हो सकती हैं, लेकिन रनिंग, भारी वजन उठाना या तेज वर्कआउट करने के लिए बहुत सावधानी बरतने की जरूरत होती है.
हर किसी के लिए 6 हफ्ते का समय कोई पासपोर्ट नहीं है
रूबी हॉल क्लिनिक, पुणे के गायनेकोलॉजिकल एंडोस्कोपिक सर्जन डॉ. मनीष मचवे बताते हैं कि हर महिला की रिकवरी बिल्कुल अलग होती है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि डिलीवरी नॉर्मल हुई थी या सिजेरियन (C-section), प्रेगनेंसी में कोई जटिलता तो नहीं थी, पेल्विक फ्लोर मांसपेशियां कितनी मजबूत हैं और पहले की फिटनेस कैसी थी.
डॉ. मचवे कहते हैं कि 6 हफ्ते पर होने वाले रूटीन चेकअप को भारी कसरत में कूदने का कोई पासपोर्ट न समझें. धीरे-धीरे शरीर को एक्टिविटी में वापस लाना ही सही तरीका है.
मुंबई के लीलावती अस्पताल की सीनियर गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. किरण कोएल्हो भी इस बात का समर्थन करती हैं. उनका कहना है कि शरीर के अंदरूनी हिस्सों की हीलिंग नॉर्मल और सिजेरियन दोनों में लगभग एक जैसी ही होती है. नॉर्मल डिलीवरी में पेट पर भले कोई चीरा न लगे, लेकिन नीचे के हिस्से में पेरिनियल टियर जैसी समस्याएं हो सकती हैं. इसके अलावा कई महिलाओं को यूरिन या मोशन कंट्रोल करने में भी शुरुआती परेशानी आती है.
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बाहर से फिट दिखने का मतलब अंदर से पूरी तरह ठीक होना नहीं
डॉ. कोएल्हो समझाती हैं कि अक्सर नई मां बाहर से देखने में फिट लग सकती है, लेकिन अंदर से उसके टिशूज अब भी हील हो रहे होते हैं. बच्चे को 9 महीने तक गर्भ में पालने के दौरान गर्भाशय का आकार बढ़ता है, हॉर्मोनल बदलाव होते हैं और शरीर के भीतर काफी टूट-फूट होती है. ऐसे में किसी भी महिला से तुरंत पतले होने या सख्त टाइमलाइन पर चलने की उम्मीद करना गलत है. हालांकि, बहुत धीमी गति से चलना-फिरना शुरू किया जा सकता है.
- नॉर्मल डिलीवरी अगर बिना किसी परेशानी के हुई हो, तो शुरुआती कुछ दिनों में ही हल्की चहलकदमी शुरू की जा सकती है.
- सिजेरियन या किसी मुश्किल डिलीवरी के बाद वॉक कब शुरू करनी है, यह डॉक्टर से पूछकर ही तय होना चाहिए.
- शुरुआत हमेशा घर के अंदर छोटी और आरामदायक चाल से करें, लंबा रास्ता नापने की कोशिश न करें.
शुरुआती 6 हफ्तों में अगर रिकवरी अच्छी है, तो बहुत हल्की वॉक और बेसिक स्ट्रेचिंग की जा सकती है. लेकिन दौड़ना, कूदना और भारी वजन उठाने वाली कसरत के लिए आमतौर पर 12 हफ्ते या उससे ज्यादा का इंतजार करना सही माना जाता है.
भारी कसरत शुरू करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. महिला बिना दर्द के तेज कदमों से चल पा रही हो, सीढ़ियां चढ़ते समय पेल्विक हिस्से में भारीपन न लगे और यूरिन लीक होने या ब्लीडिंग दोबारा तेज होने जैसी शिकायत न हो.
सैफी अस्पताल की कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिशियन और गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. निधि शर्मा चौहान हिदायत देती हैं कि वर्कआउट शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से राय जरूर लें. बहुत जल्दी कसरत शुरू करने से ठीक हो रहे टिशूज पर अतिरिक्त खिंचाव पड़ता है, पुराना दर्द उभर सकता है और पेट या पेल्विक मांसपेशियों की समस्या और गंभीर हो सकती है.
मॉडल का जल्दी लौटना क्या पूरी तरह स्वस्थ होने का सबूत है
एस्टेर विमेन एंड चिल्ड्रन की सीनियर कंसल्टेंट डॉ. दीप्ति अश्विन का कहना है कि काम पर लौट जाने या रैंप वॉक करने का यह कतई मतलब नहीं है कि शरीर पूरी तरह ठीक हो चुका है. कई बार महिलाएं हॉर्मोन के उतार-चढ़ाव, नींद की भारी कमी और कमजोर पेल्विक फ्लोर के बावजूद काम संभाल लेती हैं.
डॉ. अश्विन बताती हैं कि डिलीवरी के शुरुआती हफ्तों का इस्तेमाल सिर्फ शरीर को आराम देने, अच्छा खानपान रखने, नींद पूरी करने और बच्चे को फीड कराने में होना चाहिए. वजन घटाने की जल्दबाजी बिल्कुल न करें, क्योंकि शरीर डिलीवरी की थकान से निकल रहा होता है. कुछ वजन अपने आप कम हो जाता है और बाकी वजन घटने में कुदरती तौर पर थोड़ा वक्त लगता है.
शरीर की रिकवरी में खून की कमी (एनीमिया), पोषण, नींद का न मिलना और टिशूज की हीलिंग सीधा असर डालती है. प्रसव के बाद मां के शरीर को अपनी पुरानी ताकत पाने में समय लगता है.
किसी सुपरमॉडल का 6 हफ्ते में ग्लैमरस अंदाज में लौटना देखने में भले ही आकर्षक लगे, पर इसका यह मतलब नहीं कि हर आम महिला उसी समय वजन उठाने या दौड़ने के लिए तैयार है. 6 हफ्ता सिर्फ एक शुरुआती पड़ाव है, कोई फिटनेस सर्टिफिकेट नहीं. वर्कआउट कब शुरू करना है, इसका फैसला किसी सेलिब्रिटी की फोटो देखकर नहीं बल्कि अपने शरीर की स्थिति और डॉक्टर की सलाह से ही होना चाहिए.
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