ज्यादातर लोग वजन घटाने की बात सिर्फ इसलिए करते हैं ताकि वे देखने में पतले और फिट लगें. लेकिन बढ़ा हुआ वजन सिर्फ आपके लुक्स पर असर नहीं डालता, बल्कि यह सबसे ज्यादा मार आपके घुटनों और कूल्हों पर करता है. हमारे घुटनों को पूरे शरीर का बोझ उठाकर चलना पड़ता है. जब शरीर पर चर्बी बढ़ती है, तो जोड़ों पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ने लगता है. लंबे समय तक ज्यादा वजन जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है और ऑस्टियोआर्थराइटिस का जोखिम बढ़ाने वाले कारणों में शामिल हो सकता है.
इस बारे में और जानकारी पाने के लिए जब एनडीटीवी ने डॉ. सुशील शर्मा से बात की तो उन्होंने बताया कि गठिया की अकेली वजह सिर्फ मोटापा नहीं है. उम्र का बढ़ना, जेनेटिक्स, पुरानी चोट या दिनभर एक ही जगह बैठे रहने की आदत भी जोड़ों को बीमार कर सकती है. कई बार दुबले-पतले लोगों को भी गठिया की शिकायत हो जाती है.
जोड़ों पर वजन की दोहरी मार
चलने, सीढ़ियां चढ़ने या उठने-बैठने के दौरान घुटनों और कूल्हों पर शरीर का भार पड़ता है. वजन ज्यादा होने पर इन जोड़ों को अतिरिक्त भार उठाना पड़ सकता है. पहले से ऑस्टियोआर्थराइटिस या घुटनों की समस्या हो तो दर्द और चलने-फिरने की परेशानी बढ़ सकती है.
लेकिन बात सिर्फ वजन के बोझ तक सीमित नहीं है. एक्सपर्ट ने बताया कि मामला केवल जोड़ों पर पड़ने वाले वजन तक सीमित नहीं है. शरीर में मौजूद अतिरिक्त फैट टिश्यू सूजन से जुड़ी प्रक्रियाओं को भी प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए मोटापा और जोड़ों की परेशानी के बीच संबंध को सिर्फ शरीर के वजन से जोड़कर नहीं देखा जाता.
वजन कम करने से घुटनों को कैसे फायदा मिल सकता है?
अगर वजन ज्यादा है और घुटनों में दर्द रहता है, तो डॉक्टर की सलाह से धीरे-धीरे वजन कम करना फायदेमंद हो सकता है. वजन कम होने से जोड़ों पर पड़ने वाला अतिरिक्त भार घट सकता है और कुछ लोगों को चलने-फिरने में आसानी महसूस हो सकती है.
एक्सपर्ट के अनुसार वजन घटाने के लिए अचानक भूखे रहने के बजाय खाने की आदतों में धीरे-धीरे बदलाव करना बेहतर है. भोजन में सब्जियां, दालें, फल और प्रोटीन वाली चीजों को जगह दें और बहुत ज्यादा तली हुई चीजों, मीठे और ज्यादा कैलोरी वाले खाने की मात्रा पर ध्यान दें.
इसके साथ ही शरीर को थोड़ा हिलाना-डुलाना भी जरूरी है. अगर घुटनों में पहले से दर्द है, तो दौड़ने या कूदने के बजाय हल्की सैर करें या जिम वाली स्थिर साइकिल चलाएं. अगर दर्द ज्यादा रहता है, तो कोई भी कसरत शुरू करने से पहले फिजियोथेरेपिस्ट से सही तरीका जरूर समझ लें.
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डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
अगर घुटनों में लगातार दर्द, सूजन या अकड़न बनी रहती है, चलने-फिरने में परेशानी होती है या रोजमर्रा के काम प्रभावित होने लगे हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है. हर घुटने के दर्द को सिर्फ बढ़े हुए वजन या उम्र का असर मानना सही नहीं है.
एक्सपर्ट के बारे में: डॉ. सुशील शर्मा कैलाश अस्पताल, नोएडा में सीनियर कंसल्टेंट और जॉइंट व नी रिप्लेसमेंट सर्जन हैं. वह घुटनों और जोड़ों से जुड़ी समस्याओं तथा जॉइंट रिप्लेसमेंट से जुड़े मरीजों को देखते हैं. इस लेख में डॉ. शर्मा ने बढ़े हुए वजन और जोड़ों की सेहत के बीच संबंध को समझाया है. साथ ही उन्होंने बताया कि सही वजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और जरूरत पड़ने पर समय पर डॉक्टरी सलाह लेना जोड़ों की देखभाल में महत्वपूर्ण हो सकता है.
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