8 अक्टूबर की सुबह बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के अचानक चले जाने की खबर आई. उनके फेन्स के लिए इस खबर पर यकीन करना नामुमकिन सा था. डॉक्टरों ने तकरीबन 45 मिनट तक सीपीआर देकर उनकी सांसों को थामने की जी-तोड़ कोशिश की, पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. उनकी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पता चला कि दिल की मुख्य नस (लेफ्ट मेन कोरोनरी आर्टरी) में खून का एक थक्का था. यह सिर्फ एक दुखद खबर नहीं, बल्कि हमारे शरीर और दिल के भीतर चलने वाले उस नाज़ुक तंत्र की हकीकत है जिसे हम अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं.
इस दुखद घटना ने हम सबके सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. आखिर सीने के भीतर ऐसा क्या होता है कि बिल्कुल ठीक दिख रहा इंसान अचानक गिर पड़ता है? आइए इस पूरे मामले को बहुत सीधी-सादी भाषा में समझते हैं, ताकि हम खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकें.
ब्लड क्लॉट क्या होता है?
ब्लड क्लॉट खून का जमा हुआ थक्का होता है. जब यह दिल की किसी धमनी के भीतर बन जाता है और रक्त प्रवाह रोक देता है, तब हार्ट अटैक का खतरा पैदा हो सकता है.
खून की नली में थक्का कैसे बनता है?
हमारा दिल दिन-रात बिना रुके काम करता है. पूरे शरीर में खून पहुंचाने के लिए दिल की अपनी मांसपेशियों को भी लगातार आक्सीजन और ताजे खून की जरूरत होती है. यह काम कोरोनरी धमनियां करती हैं.
उम्र के साथ गलत खान-पान, तेल-मसाले और तनाव की वजह से इन नसों की दीवारों पर चर्बी और कोलेस्ट्रॉल जमने लगता है. मेडिकल भाषा में इसे एथेरोस्क्लेरोसिस कहते हैं. वक्त के साथ यह मैल सख्त होकर प्लाक बन जाता है.
अक्सर लोग सोचते हैं कि नस धीरे-धीरे बंद होती होगी, तभी दौरा पड़ता है. पर असलियत में खेल कुछ और होता है. कई बार यह जमा हुआ प्लाक अचानक चटक जाता है. शरीर इसे किसी अंदरूनी चोट की तरह देखता है और खून को रोकने के लिए वहां प्लेटलेट्स भेज देता है. देखते ही देखते वहां खून का एक थक्का यानी क्लॉट बन जाता है. अगर यह थक्का पूरी नली का रास्ता रोक ले, तो दिल की उस हिस्से की आक्सीजन उसी सेकेंड कट जाती है.
लेफ्ट मेन आर्टरी का ब्लाक होना सबसे खतरनाक क्यों?
डाक्टर बताते हैं कि दिल की नसों में सबसे मुख्य नस लेफ्ट मेन आर्टरी होती है. इसे दिल की मुख्य पाइपलाइन माना जा सकता है.
- यही नस आगे जाकर दो बड़ी नसों में बंट जाती है.
- यह दिल के एक बहुत बड़े हिस्से को ताजा खून सप्लाई करती है.
- अगर रुकावट इसी मुख्य नस में आ जाए, तो दिल का आधा से ज्यादा पंपिंग सिस्टम तुरंत बैठ जाता है.
नाना पाटेकर के मामले में भी यही हुआ. जब इतने बड़े हिस्से को खून नहीं मिला, तो दिल ने पंप करना बंद कर दिया. इसे कार्डियोजेनिक शाक या अचानक कार्डियक अरेस्ट कहा जाता है, जिसमें मरीज को संभलने का मौका तक नहीं मिलता.
हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट में फर्क
- बहुत से लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है:
- हार्ट अटैक एक 'प्लंबिंग' की समस्या है. इसमें खून की नली में रुकावट आ जाती है और दिल की मांसपेशियों में खून नहीं पहुंच पाता.
- कार्डियक अरेस्ट एक 'इलेक्ट्रिकल' खराबी है. इसमें दिल का करंट गड़बड़ा जाता है और दिल अचानक धड़कना बंद कर देता है.
- हां, यह सच है कि बड़ा हार्ट अटैक आने पर दिल की धड़कनें बेकाबू होकर कार्डियक अरेस्ट में बदल सकती हैं.
क्या बिना किसी बीमारी के भी अटैक आ सकता है?
ऐसी खबरें अक्सर सुनने को मिलती हैं कि किसी ऐसे व्यक्ति को, जो दौड़ भाग करता था, जिम जाता था, अचानकर हार्ट अटैक आ गया. तो क्या वाकई स्वस्थ लोगों को हार्ट अटैक हो सकते हैं. सच्चाई तो यह है कि दिल की बीमारी सालों तक बिना किसी शोर के पनपती है.
जब तक नस में सत्तर-अस्सी फीसदी रुकावट न हो या थक्का न बने, तब तक कोई लक्षण नहीं दिखता. इसे ही साइलेंट किलर कहते हैं.
- हाई ब्लड प्रेशर और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल.
- डायबिटीज और मोटापा.
- सिगरेट, बीड़ी या तंबाकू की लत.
- परिवार में पहले किसी को दिल की बीमारी रही हो.
- दिनभर बैठे रहना और कसरत न करना.
शरीर के वो इशारे जिन्हें गैस समझकर टालना भारी पड़ सकता है
दिल जब मुसीबत में होता है, तो वह कई तरह के संकेत देता है. बस हम उन्हें अनदेखा कर देते हैं. जैसे, सीने के बीच में भारीपन, ऐसा लगना जैसे किसी ने भारी पत्थर रख दिया हो. बिना किसी मेहनत के अचानक ठंडा पसीना छूटना और घबराहट होना इसका बड़ा लक्षण है. इसके अलावा सांस लेने में तकलीफ होना या दम घुटना भी कई बार दिल के रोगों का लक्षण हो सकता है. वहीं, दर्द का सीने से उठकर बाएं हाथ, जबड़े, गर्दन या पीठ की तरफ फैलना और अचानक बहुत ज्यादा कमजोरी, चक्कर आना या उल्टी जैसा महसूस होना भी हार्ट अटैक के लक्षणों में से एक है.
बहुत से लोग सीने की जलन को साधारण एसिडिटी मानकर एंटासिड पी लेते हैं और अस्पताल जाने में देर कर देते हैं. यही देरी जानलेवा साबित होती है.
सामने किसी को अटैक आए तो क्या करें?
अगर आपके सामने किसी को ऐसे लक्षण दिखें या वह बेहोश हो जाए:
- बिना एक पल गंवाए तुरंत एंबुलेंस को फोन लगाएं.
- घरेलू नुस्खे आजमाने या आराम करने के इंतजार में कीमती वक्त बिल्कुल खराब न करें.
- मरीज को सहारा देकर आरामदायक स्थिति में बैठाएं, उसे चलने या खड़े रहने न दें.
- अगर मरीज सांस लेना बंद कर दे और बेहोश हो जाए, तो तुरंत छाती के बीच दोनों हाथों से सीपीआर (कार्डियक मसाज) देना शुरू करें.
दिल को मजबूत रखने के आसान उपाय
- दिल की सेहत कोई एक दिन का काम नहीं है, यह हमारी रोजमर्रा की आदतों से बनती है.
- हर छह महीने या सालभर में अपना बीपी, शुगर और लिपिड प्रोफाइल टेस्ट जरूर कराएं.
- खाने में ज्यादा नमक, रिफाइंड तेल और पैकेट बंद चीजों से दूरी बनाएं.
- रोजाना कम से कम तीस मिनट तेज चाल से टहलें.
- धूम्रपान और तंबाकू को आज ही जिंदगी से बाहर निकालें.
- रात में सात से आठ घंटे की भरपूर नींद लें और काम के तनाव को दिमाग पर हावी न होने दें.
जिंदगी की रफ्तार चाहे कितनी भी तेज हो, अपने सीने में धड़क रहे इस छोटे से अंग की अनदेखी कभी मत कीजिए. सही समय पर पहचान और तुरंत डाक्टरी मदद ही दिल के दौरे से जान बचा सकती है.
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