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This Article is From Sep 10, 2025

बच्‍चे को फ्रीज में रखकर सो गई मां, दादी ने दौड़कर बचाया, क्‍यों अक्‍सर अपने ही बच्‍चे को मार देना चाहती हैं मां, क्‍या होता है Postpartum Depression

बच्चे के रोने की आवाज सुनकर उसकी दादी दौड़कर रसोई में गईं, जहां उन्होंने शिशु को फ्रिज के अंदर पाया. उन्होंने बच्चे को तुरंत बाहर निकाला. परिवार के सदस्यों ने बताया कि बच्चे को तत्काल एक डॉक्टर के पास ले जाया गया, जिन्होंने पुष्टि की कि वह पूरी तरह सुरक्षित है.

बच्‍चे को फ्रीज में रखकर सो गई मां, दादी ने दौड़कर बचाया, क्‍यों अक्‍सर अपने ही बच्‍चे को मार देना चाहती हैं मां, क्‍या होता है Postpartum Depression
5 सितंबर को महिला कथित रूप से बच्चे को फ्रिज में रखकर सो गई.

मुरादाबाद के करूला इलाके में प्रसवोत्तर मनोविकृति (Postpartum Psychosis) से पीड़ित 23 वर्षीय एक महिला ने कथित तौर पर अपने 15 दिन के नवजात शिशु को फ्रिज में रख दिया. हालांकि समय रहते दादी ने बच्चे को फ्रिज से निकाल लिया और वह सुरक्षित है. महिला ने हाल ही में एक बेटे को जन्म दिया था और पांच सितंबर को वह कथित रूप से बच्चे को फ्रिज में रखकर सो गई. बच्चे के रोने की आवाज सुनकर उसकी दादी दौड़कर रसोई में गईं, जहां उन्होंने शिशु को फ्रिज के अंदर पाया. उन्होंने बच्चे को तुरंत बाहर निकाला. परिवार के सदस्यों ने बताया कि बच्चे को तत्काल एक डॉक्टर के पास ले जाया गया, जिन्होंने पुष्टि की कि वह पूरी तरह सुरक्षित है.

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महिला को मनोरोग एवं नशा मुक्ति केंद्र ले जाया गया

बताया जाता है कि शुरू में परिवार को संदेह हुआ कि महिला किसी बुरी शक्ति के प्रभाव में है, इसलिए उन्होंने पारंपरिक अनुष्ठान करने की कोशिश की. जब कोई सुधार नहीं हुआ, तो महिला को मनोरोग एवं नशा मुक्ति केंद्र ले जाया गया, जहां मनोचिकित्सक डॉ. कार्तिकेय गुप्ता ने उसे प्रसवोत्तर मनोविकृति से पीड़ित बताया. डॉक्टरों ने बताया कि महिला की इस समय काउंसलिंग और इलाज की प्रक्रिया जारी है.

पोस्टपार्टम डिप्रेशन के कारण

मनोचिकित्सक डॉ. मेघना गुप्ता ने बताया कि प्रसवोत्तर अवसाद और मनोविकृति उन कंडीशन में पैदा हो सकते हैं जब प्रसव के बाद महिलाओं की उपेक्षा की जाती है और उन्हें पर्याप्त इमोशनल सपोर्ट नहीं मिलता. उन्होंने बताया कि इससे मनोदशा में गंभीर उतार-चढ़ाव हो सकते हैं और चरम मामलों में यह असामान्य व्यवहार का कारण बन सकता है. डॉ. गुप्ता ने कहा, 'ऐसे मामलों में अंधविश्वास के बजाय, रोगी को उचित मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए मनोचिकित्सक के पास ले जाना चाहिए.

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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)

लेखक के बारे में
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अवधेश पैन्यूली
Senior Sub Editor
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