वीकेंड पर दोस्तों के साथ पार्टी करना या सस्ती डील देखकर शराब खरीद लेना कई लोगों की आदत होती है. लेकिन अगर आपकी ड्रिंक में मेथनॉल जैसा जहरीला केमिकल मिला हो, तो यही एक पैग जानलेवा साबित हो सकता है. सबसे खतरनाक बात यह है कि शुरुआत में इसका असर सामान्य शराब जैसा ही लगता है, इसलिए ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं चलता कि वे शराब नहीं, बल्कि जहर पी चुके हैं. आइए जानते हैं कि मिलावटी शराब इतनी खतरनाक क्यों होती है और इससे कैसे बचा जा सकता है.
आखिर शराब में मिलावट क्यों की जाती है?
ब्रांडेड शराब पर टैक्स ज्यादा होने के कारण उसकी कीमत भी अधिक होती है. इसी का फायदा उठाकर कुछ लोग ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए नकली शराब में मेथनॉल मिला देते हैं.
कई बार अवैध तरीके से शराब बनाने के दौरान गलत प्रक्रिया अपनाने से भी मेथनॉल बन जाता है. चूंकि यह इंडस्ट्रियल केमिकल सस्ता होता है, इसलिए इसका गलत इस्तेमाल किया जाता है.

शरीर के अंदर से कैसे नुकसान पहुंचाती है ये?
मेथनॉल शरीर में पहुंचने के बाद फॉर्मेल्डिहाइड और फिर फॉर्मिक एसिड में बदल जाता है. इससे खून जरूरत से ज्यादा अम्लीय हो जाता है, जिसे मेडिकल भाषा में मेटाबॉलिक एसिडोसिस कहा जाता है.
शुरुआत में व्यक्ति को सामान्य शराब जैसा ही नशा महसूस होता है, लेकिन 12 से 24 घंटे बाद तेज पेट दर्द, उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, धुंधला दिखाई देना, अंधापन, दौरे और कोमा जैसे गंभीर लक्षण सामने आ सकते हैं.
अगर गलती से पी ली तो क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति ने मिलावटी शराब पी ली हो या ऐसा संदेह हो, तो बिना देर किए उसे ऐसे अस्पताल ले जाएं जहां डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध हो.
हमेशा लाइसेंस प्राप्त और भरोसेमंद दुकानों से ही शराब खरीदें. सील बंद बीयर, वाइन या ड्यूटी फ्री से खरीदी गई शराब में मिलावट की संभावना अपेक्षाकृत कम होती है. घर में बनी शराब, लोकल कॉकटेल या बाजार भाव से बहुत सस्ती मिलने वाली ड्रिंक्स से बचें.
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