Police Constable to IPS Success Story: क्या एक पुलिस कांस्टेबल कभी IPS बन सकता है. इसका जवाब है, बिल्कुल हां. लेकिन इसके लिए मेहनत, धैर्य और खुद पर भरोसा होना चाहिए. देश में ऐसे कई लोग हैं, जिन्होंने कांस्टेबल की नौकरी से शुरुआत की और बाद में देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक UPSC पास कर IPS अफसर बने. आइए जानते हैं ऐसे ही 3 पुलिस सिपाहियों की कहानी, जिन्होंने लोगों के ताने सुने, बार-बार फेल हुए, लेकिन मैदान छोड़कर भागे नहीं और आज देश के बड़े पुलिस अफसर हैं.
1. राजस्थान के विजय, 3 बार प्रीलिम्स में फेल, फिर बने IPS
राजस्थान के एक छोटे से गांव देवीपुरा के रहने वाले विजय पढ़ाई में बिल्कुल एवरेज स्टूडेंट थे. पिता किसान थे, इसलिए घर का खर्च चलाना आसान नहीं था. विजय ने आर्मी, राजस्थान पुलिस और टीचर बनने के बहुत सारे पेपर दिए, लेकिन हर जगह रिजेक्ट हो गए. 2009 में उन्हें पहला सफलता मिली और दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल बन गए. यहां जॉब करते-करते आगे बढ़े, सब-इंस्पेक्टर बने, फिर SSC पास करके केरल में कस्टम्स में लग गए. इसके बाद दिल्ली में इनकम टैक्स इंस्पेक्टर बने.
तीन बार फेल फिर बने पुलिस अफसर
इनकम टैक्स इंस्पेक्टर बनकर भी विजय खुश नहीं थे, क्योंकि उनका सपना UPSC पास करना था. लगातार 3 बार वे प्री-एग्जाम (Prelims) में ही फेल हो गए. हिम्मत टूट गई, शादी भी हो चुकी थी, तो घर की जिम्मेदारी भी थी. एक दिन वे इतने निराश हुए कि अपनी सारी किताबें कबाड़ी वाले को बेचने जा रहे थे. तभी उनकी पत्नी ने कहा, 'इतने दिन मेहनत की है, 4 महीने की बात और है...एक आखिरी मौका और दे दो.' पत्नी की इस बात ने विजय के अंदर फिर से आग लगा दी. उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू की और अगली ही बार में UPSC में 574वीं रैंक लाकर IPS बन गए.
2. मनोज कुमार रावत, सनी देओल की फिल्म देख बने पुलिस अफसर
जयपुर के एक छोटे से गांव के रहने वाले मनोज जब 8वीं क्लास में थे, तब उन्होंने सनी देओल की फिल्म 'इंडियन' देखी थी. उस फिल्म के जाबांज पुलिस ऑफिसर का रोल देखकर उन्होंने बचपन में ही तय कर लिया था कि बनना तो IPS ही है. 2008 में मनोज राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल बन गए, लेकिन दिल में तो बड़ा सपना पल रहा था. उन्होंने नौकरी के साथ-साथ BA और फिर पॉलिटिकल साइंस (Political Science) में MA किया.
सरकारी नौकरी छोड़ने पर लोग पागल कहने लगे
2013 में मनोज ने कांस्टेबल की नौकरी छोड़ दी और कोर्ट में क्लर्क बन गए. 2014 में उन्होंने क्लर्क की नौकरी भी छोड़ दी, ताकि पूरा फोकस सिर्फ UPSC पर लगा सकें. लोग उन्हें पागल कहते थे कि 'बनी-बनाई सरकारी नौकरी कौन छोड़ता है.' लेकिन मनोज ने किसी की नहीं सुनी. 4 बार असफल होने के बावजूद भी हार नहीं मानी और 5वें अटेंप्ट में 824वीं रैंक हासिल कर पुलिस अफसर बने.
उदय कृष्ण रेड्डी, सीनियर के ताने ने बना दिया IPS
आंध्र प्रदेश के उदय की कहानी भी काफी इंस्पायरिंग है. बचपन में ही माता-पिता का साया उठ गया था. दादी ने सड़क पर सब्जी बेच-बेचकर उदय को पाला और पढ़ाया. 2013 में आंध्र प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल भर्ती हुए. 2018 में एक ट्रेनिंग के दौरान एक बड़े अफसर ने सबके सामने उदय की बेइज्जती करते हुए कहा, 'तुम सिर्फ एक मामूली कांस्टेबल हो, अपनी औकात में रहो.' इस बात ने उदय को अंदर तक झकझोर दिया. उन्होंने उसी वक्त नौकरी से इस्तीफा दे दिया और ठान लिया कि अब इस ताने का जवाब सिर्फ और सिर्फ IPS बनकर ही दिया जाएगा. इसके बाद उदय दिन-रात एक करके पढ़ाई में जुट गए और UPSC में ऑल इंडिया 350वीं रैंक हासिल कर पुलिस अफसर बनें.
ये भी पढ़ें - CJP की तरफ से सरकार से बात करने वाले सौरव दास कौन हैं? जानें क्या करते हैं नौकरी
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं