मम्मा, क्या आप बूढ़ी हो गई हो? आप मुझे गोद में लेकर सीढ़ियां क्यों नहीं चढ़ पा रहीं? ये सवाल मेघना के लिए काफी था. नोएडा की रहने वाली मेघना की जिंदगी बदलने के लिए न तो किसी डॉक्टर की चेतावनी जिम्मेदार थी और न ही वजन मशीन पर दिखने वाला बढ़ता हुआ आंकड़ा. उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ उनकी बड़ी बेटी के इस मासूम सवाल से आया.
जब मेघना की बेटी ने उनसे पूछा मम्मा, क्या आप बूढ़ी हो गई हो? आप मुझे गोद में लेकर सीढ़ियां क्यों नहीं चढ़ पा रहीं? यह सवाल सुनकर 32 साल की मेघना ठिठक गई. वह अपनी बेटी को गोद में लेकर सीढ़ियां चढ़ने की कोशिश कर रही थी, लेकिन कुछ ही सीढ़ियां चढ़ने के बाद उनकी सांस फूल गई. यही पल उनके लिए बदलाव की शुरुआत बना. सॉफ्टवेयर इंजीनियर से स्कूल प्रशासक बनीं मेघना का दावा है कि उन्होंने महज 6 महीनों में लगभग 30 किलो वजन कम किया. उनका कहना है कि उनका मकसद पतला दिखना नहीं, बल्कि स्वस्थ बनना था.

हालांकि, डॉक्टरों का कहना है कि मेघना की इच्छाशक्ति और अनुशासन प्रेरणादायक हैं, लेकिन इतनी तेजी से वजन कम करना हर नई मां के लिए सही या सुरक्षित नहीं माना जा सकता.
मां बनने के बाद स्वास्थ्य पीछे छूट गया-
मेघना की पहली बेटी का जन्म 2022 में तो वहीं दूसरी बेटी का जन्म 2024 में हुआ. दोनों बच्चों का जन्म सीजेरियन के जरिए हुआ. एनडीटीवी से बातचीत में मेघना ने कहा, मेरी बेटी सिर्फ दो महीने की थी, जब मैंने दोबारा काम शुरू कर दिया. मेरे बच्चे और मेरा काम ही मेरी प्राथमिकता बन गए. मैं हमेशा अपने काम को अपना तीसरा बच्चा मानती थी. इसी बीच मेरी अपनी सेहत सबसे पीछे छूट गई.
न जिम, न क्रैश डाइट सिर्फ अनुशासन-
दूसरी डिलीवरी के कुछ महीनों बाद मेघना ने अपना हेल्थ चेकअप कराया. रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ था, ब्लड शुगर सामान्य से अधिक थी और थायरॉयड से जुड़ी समस्या भी सामने आई. उस समय उनका वजन करीब 90 किलो पहुंच चुका था. मेघना बताती हैं कि उन्होंने न तो जिम जॉइन किया और न ही किसी महंगी डाइट का सहारा लिया. उन्होंने सिर्फ अपनी दिनचर्या और खानपान में अनुशासन लाया. वह दिन में तीन बार संतुलित भोजन करती थी और जरूरत से ज्यादा खाने से बचती थी. कोशिश रहती थी कि सूर्यास्त से पहले रात का भोजन कर लें.
कैसे होती थी उनकी दिन की शुरूआत-
मेघना की सुबह आंवला, अनार, सेब, चुकंदर और खीरे के जूस से होती थी. नाश्ते में दलिया या पोहा के साथ दही या छाछ लेती थी. दोपहर के भोजन में एक रोटी, मौसमी सब्जियां, सलाद और छाछ शामिल रहती थी. शाम को चाय के साथ बिस्कुट की जगह भुना हुआ मखाना खाती थी और रात का खाना सादा होता था, जिसमें दाल के साथ रोटी या चावल शामिल रहते थे. मेघना कहती हैं, मैंने कभी अपने शरीर को सजा नहीं दी. अनुशासन और सजा, दोनों अलग-अलग चीजें हैं.

किन चीजों से बनाई दूरी-
मेघना ने प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाई, कभी खाना नहीं छोड़ा और रात के भोजन के बाद रोज कम से कम एक घंटे तक पैदल चलने की आदत बनाई. सप्ताह में एक दिन वह अपनी पसंद का खाना भी खाती थीं, चाहे वह पिज्जा हो, गोलगप्पे हों या छोले-भटूरे. इसके अलावा वह हर सोमवार व्रत भी रखती थी.
डॉक्टरों ने दी सावधानी बरतने की सलाह-
कैलाश हॉस्पिटल, नोएडा की वरिष्ठ गायनाकॉलॉजिस्ट डॉ. सुजाता भट्ट का कहना है कि मेघना की कहानी प्रेरणादायक जरूर है, लेकिन इसे हर महिला के लिए आदर्श मॉडल नहीं माना जाना चाहिए. उन्होंने कहा, मेघना ने मातृत्व, काम और अपनी सेहत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की, जो सराहनीय है. लेकिन प्रसव के बाद तेजी से वजन कम करना हर महिला के लिए सुरक्षित नहीं होता.

उन्होंने कहा, वजन कम करने के लिए संतुलित और नियंत्रित कैलोरी वाला भोजन जरूरी है, जिससे शरीर की रिकवरी भी होती रहे और स्तनपान पर भी असर न पड़े. डॉ. भट्ट ने सलाह दी कि प्रसव के बाद वजन कम करने की योजना में नियमित व्यायाम, पौष्टिक भोजन और डॉक्टर की सलाह जरूर शामिल होनी चाहिए, क्योंकि हर महिला की स्वास्थ्य स्थिति अलग होती है.
क्या सूर्यास्त के बाद खाना छोड़ना सही है?
मेघना की सूर्यास्त के बाद भोजन न करने की आदत पर डॉ. भट्ट ने कहा कि टाइम-रिस्ट्रिक्टेड ईटिंग कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन प्रसव के बाद शुरुआती 6 महीनों तक स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए यह तरीका उचित नहीं माना जाता.
उन्होंने कहा, शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे तक कुछ न खाना कुछ परिस्थितियों में ठीक हो सकता है, लेकिन स्तनपान कराने वाली माताओं को पर्याप्त पोषण की जरूरत होती है. लंबे समय तक भोजन न करने से दूध का उत्पादन कम हो सकता है और थकान भी बढ़ सकती है.
तेजी से वजन घटाने के नुकसान-
- डॉ. भट्ट के अनुसार, प्रसव के बाद बहुत तेजी से वजन कम करने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जिनमें
- पोषक तत्वों की कमी
- आयरन की कमी और एनीमिया
- कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी
- लगातार थकान
- शरीर में दर्द
- स्तनपान के लिए दूध कम बनना
उन्होंने यह भी कहा कि जहां वजन कम होने से कुछ महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ सकता है, वहीं जरूरत से ज्यादा तेजी से वजन घटाने का शारीरिक दबाव कई महिलाओं में थकान बढ़ा सकता है और मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है.
कामकाजी माताओं के लिए डॉक्टर की सलाह-
डॉ. भट्ट ने नौकरी करने वाली नई माताओं को सलाह दी कि वे जरूरत पड़ने पर परिवार की मदद लें, उन्होंने कहा कि यदि संभव हो तो शुरुआती दिनों में वर्क फ्रॉम होम करें, पहले से स्तन दूध निकालकर सुरक्षित रखें ताकि देखभाल करने वाले उसे बच्चे को दे सकें, घर के काम परिवार के साथ बांटें और पर्याप्त नींद, संतुलित भोजन तथा नियमित शारीरिक गतिविधि को प्राथमिकता दें.
उन्होंने कहा, शुरुआत में नौकरी और मातृत्व के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण लगता है, लेकिन परिवार का सहयोग और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर महिलाएं धीरे-धीरे एक टिकाऊ वर्क-लाइफ बैलेंस बना सकती हैं.
मेघना की कहानी यह जरूर दिखाती है कि अनुशासन और जीवनशैली में बदलाव से सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि प्रसव के बाद वजन कम करने की प्रक्रिया धीरे-धीरे और प्रत्येक महिला की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार होनी चाहिए. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नई माताएं क्रैश डाइट या बिना चिकित्सकीय सलाह के कठिन व्यायाम शुरू न करें और किसी भी वेट लॉस प्लान को अपनाने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें.
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