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अब एक्सपायर के करीब दवाएं नहीं! सरकार ला सकती है नया बड़ा नियम

सरकार आयातित दवाओं के लिए कम से कम 12 महीने की शेल्फ लाइफ अनिवार्य करने की तैयारी में है. जानें क्या बदलेगा और किन दवाओं पर असर नहीं होगा.

अब एक्सपायर के करीब दवाएं नहीं! सरकार ला सकती है नया बड़ा नियम
Imported Medicines Rule Change: मरीजों को मिलेगा ज्यादा समय तक उपयोग योग्य दवा
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नयी दिल्ली:

मरीजों को बेहतर और लंबे समय तक उपयोग योग्य दवाएं सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार बड़ा बदलाव करने की तैयारी में है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने आयातित दवाओं के नियमों में संशोधन का प्रस्ताव जारी किया है, जिसके तहत अब विदेश से आने वाली दवाओं के लिए कम से कम 12 महीने की बची हुई शेल्फ लाइफ अनिवार्य की जा सकती है.

वर्तमान नियमों के अनुसार, आयातित दवाओं के लिए कुल शेल्फ लाइफ (एक्सपायरी का समय) का 60% हिस्सा बचा होना जरूरी होता है. लेकिन 22 जून को जारी मसौदा अधिसूचना में इसे बदलकर फिक्स 12 महीने करने का सुझाव दिया गया है.

क्या होगा फायदा?

सरकार का मानना है कि इस बदलाव से:

  • मरीजों को ज्यादा समय तक इस्तेमाल योग्य दवाएं मिलेंगी
  • दवा वितरण में आसानी होगी
  • सप्लाई चेन ज्यादा प्रभावी बनेगी

किन दवाओं पर लागू नहीं होगा ये नियम?  

हालांकि, जैविक उत्पाद (Biological Products) और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स को इस बदलाव से बाहर रखा गया है. इन पर पुराने नियम यानी 60% शेष शेल्फ लाइफ की शर्त ही लागू रहेगी.

सरकार ने क्या कहा?

स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, यह कदम दवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उठाया जा रहा है. खासतौर पर आयात के समय पर्याप्त शेष अवधि होने से दवाओं के उपयोग और वितरण के लिए ज्यादा समय मिलेगा.

क्या बदलेगा और क्या नहीं?

मंत्रालय ने साफ किया है कि:

  • यह बदलाव सिर्फ शेल्फ लाइफ की शर्त तक सीमित है.
  • दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता से जुड़े नियमों में कोई बदलाव नहीं होगा.
  • सभी मौजूदा नियम ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत ही लागू रहेंगे.

सार्वजनिक सुझाव आमंत्रित  : सरकार ने इस मसौदे पर सभी हितधारकों और आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां भी मांगी हैं.

इससे आम लोगों को क्या फायदा होगा?

इस प्रस्तावित नियम से आम लोगों और मरीजों को सीधे कई फायदे मिल सकते हैं:

  1. ज्यादा समय तक इस्तेमाल योग्य दवा मिलेगी : अब आयातित दवाओं के पास कम से कम 12 महीने की शेल्फ लाइफ होगी, यानी मरीजों को जल्दी एक्सपायर होने वाली दवा नहीं मिलेगी.
  2. दवा बेकार होने का खतरा कम होगा : कई बार दवाएं स्टोर और फार्मेसी तक पहुंचते‑पहुंचते एक्सपायर के करीब होती हैं. नए नियम से यह समस्या कम होगी.
  3. इलाज में बाधा नहीं आएगी : लंबी शेल्फ लाइफ वाली दवाएं होने से मरीज बिना जल्दबाजी के पूरा कोर्स कर सकेंगे.
  4. दवा की उपलब्धता बेहतर होगी : डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम को पर्याप्त समय मिलेगा, जिससे दवाएं समय पर हर जगह पहुंच सकेंगी.
  5. पैसों की बचत : कम शेल्फ लाइफ के कारण दवा फेंकने की नौबत कम आएगी, जिससे मरीजों और अस्पतालों दोनों का नुकसान घटेगा.
  6. एक लाइन में समझें : नया नियम लागू हुआ तो मरीजों को ज्यादा भरोसेमंद, ज्यादा समय तक चलने वाली दवाएं मिलेंगी.
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