Resting Heart Rate: गर्मी, भागदौड़ और स्ट्रेस के बीच हम अक्सर दिल की धड़कन पर ध्यान ही नहीं देते. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आराम की स्थिति में चल रही आपकी दिल की धड़कन, यानी रेस्टिंग हार्ट रेट, आपकी सेहत और उम्र दोनों के बारे में बहुत कुछ बता सकती है. आम तौर पर 60 से 100 बीट प्रति मिनट को नॉर्मल माना जाता है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है कि “नॉर्मल” का मतलब हमेशा “सेफ” नहीं होता. इसी एक नंबर से यह भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपका दिल कितनी मेहनत कर रहा है और शरीर कितना फिट है.
दरअसल, रेस्टिंग हार्ट रेट वही होता है जब आप पूरी तरह आराम में होते हैं, जैसे बैठते या सोते समय. यही वह स्थिति है जब दिल की असली “वर्किंग कंडीशन” सामने आती है. अगर इस समय भी दिल तेज धड़क रहा है, तो यह शरीर के अंदर चल रहे स्ट्रेस या फिटनेस लेवल के बारे में संकेत दे सकता है.
कम हार्ट रेट क्यों माना जाता है बेहतर (Why is a lower heart rate considered better?)
पहली नजर में 60 और 90 बीट प्रति मिनट दोनों नॉर्मल लग सकते हैं, लेकिन इन दोनों के बीच बड़ा अंतर है. जिस व्यक्ति का हार्ट रेट 90 के करीब रहता है, उसका दिल ज्यादा मेहनत कर रहा होता है. लंबे समय में इसका असर दिल और ब्लड वेसल्स पर पड़ सकता है. एक हेल्दी और फिट व्यक्ति का दिल कम धड़कनों में ही ज्यादा ब्लड पंप कर सकता है. यही वजह है कि जिन लोगों का रेस्टिंग हार्ट रेट कम होता है, उन्हें आम तौर पर ज्यादा फिट माना जाता है. यह इस बात का संकेत है कि आपका दिल मजबूत है और शरीर रिलैक्स मोड में काम कर रहा है.
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लेकिन हर किसी के लिए कम हार्ट रेट सही नहीं
यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है. अगर कोई एथलीट है, तो उसका हार्ट रेट 45–50 भी हो सकता है और यह सामान्य माना जाता है. लेकिन अगर कोई व्यक्ति एक्टिव नहीं है और उसका हार्ट रेट इतना कम है, तो यह किसी बीमारी का संकेत भी हो सकता है. अगर चक्कर, कमजोरी या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
कैसे कंट्रोल में रखें हार्ट रेट
दिल की धड़कन को बेहतर रखने के लिए रोजमर्रा की कुछ आसान आदतें काफी असर डाल सकती हैं. नियमित रूप से हल्की-फुल्की एक्सरसाइज या रोज की वॉक करने से दिल मजबूत होता है और इसकी कार्यक्षमता बेहतर होती है. इसके साथ ही अच्छी और पूरी नींद लेना भी जरूरी है, क्योंकि नींद के दौरान ही शरीर और दिल को रिकवर होने का समय मिलता है. स्ट्रेस को कम करने के लिए डीप ब्रीदिंग या मेडिटेशन जैसी एक्टिविटी अपनाना फायदेमंद रहता है, जिससे शरीर रिलैक्स मोड में आता है. वहीं, ब्लड शुगर और थायराइड जैसी स्थितियों को कंट्रोल में रखना भी जरूरी है, क्योंकि ये चीजें सीधे दिल की धड़कन को प्रभावित कर सकती हैं
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(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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